ताज़ा खबर

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी - हिरासत में मौतों पर 'बस अब बहुत हुआ!'

सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में हिंसा पर कड़ी फटकार लगाई: 'अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे!'
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत सभी राज्यों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि हिरासत में हिंसा और मौतें पूरे न्याय सिस्टम पर एक धब्बा हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा, "यह देश अब इसे और बर्दाश्त नहीं करेगा।" पांच साल पहले दिए गए CCTV लगाने के आदेश को लागू न करने पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा, "क्या आप हमें हल्के में ले रहे हैं? बहुत हो गया!"
इस फैसले से पूरे देश में हलचल मच गई है और ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट और कानूनी जानकार सुप्रीम कोर्ट का स्वागत कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि हिरासत में टॉर्चर लोकतंत्र की नींव पर हमला है। देश में पिछले कुछ सालों में हुई ऐसी घटनाओं के आंकड़ों को देखें तो हर साल औसतन 1,500 से ज़्यादा हिरासत में मौतें दर्ज की जाती हैं, जिनमें से ज़्यादातर में पुलिस पर शक होता है। लेकिन, CCTV की कमी से सबूत नष्ट हो जाते हैं और दोषी बच जाते हैं।
कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्यों को तुरंत आदेश दिए हैं: हर पुलिस स्टेशन में CCTV कैमरे लगाएं, उनकी रेगुलर जांच करें और कस्टोडियल डेथ के हर मामले की अलग से जांच करें। कोर्ट ने साफ किया, "मोदी सरकार समेत सभी राज्य इन आदेशों का सख्ती से पालन करें, नहीं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।" 2020 में जारी एक पुराने आदेश के मुताबिक, पुलिस स्टेशनों में CCTV लगाने की डेडलाइन खत्म हो गई है, लेकिन इसे लागू करना रुका हुआ है।
इस फैसले के क्या नतीजे होंगे? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह कदम पुलिस सुधारों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। हालांकि, अब केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। इससे पता चलता है कि न्यायपालिका नागरिकों की सुरक्षा के लिए सख्त रुख अपना रही है। डिटेल में खबरों के लिए कमेंट्स में दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Releated