“डायपर भी लीक नहीं होते, लेकिन NTA के पेपर बार-बार फट जाते हैं!” खान सर ने NTA को ‘कभी भरोसे लायक एजेंसी’ कहा
नई दिल्ली/पटना: NEET-UG 2026 एग्जाम कैंसिल होने से देश भर के 22 लाख से ज़्यादा स्टूडेंट्स में गुस्सा है। इसी बैकग्राउंड में, जाने-माने टीचर खान सर ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कड़ी आलोचना की है।
खान सर ने कहा, “बच्चों के 10 रुपये के डायपर भी लीक नहीं होते, लेकिन NTA के पेपर बार-बार फट जाते हैं। यह कभी भरोसे लायक एजेंसी नहीं है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का नाम बदलकर कभी भरोसे लायक एजेंसी कर देना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि पेपर फटने के बाद, NTA ‘बदले के मोड’ में आ जाती है और अगले एग्जाम के लिए बहुत मुश्किल पेपर तैयार करती है। इससे स्टूडेंट्स पर और मेंटल स्ट्रेस पड़ता है। खान सर ने कहा, “एग्जाम के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले स्टूडेंट्स का भरोसा टूट रहा है। कई स्टूडेंट्स 700+ मार्क्स लाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब वे निराश हैं।” एक स्टूडेंट की इमोशनल कहानी बताते हुए उन्होंने कहा, “जनवरी में उसकी माँ गुज़र गईं, लेकिन वह डॉक्टर बनने के पक्के इरादे से पढ़ाई कर रहा था। अब हम ऐसे स्टूडेंट्स का सामना कैसे करेंगे?”
लड़कियों और गरीब परिवारों पर असर
खान सर ने कहा कि यह एग्जाम मिडिल क्लास परिवारों की लड़कियों के लिए पढ़ाई का आखिरी मौका है। पेपर लीक होने से उनका पूरा भविष्य दांव पर है। साथ ही, कई पेरेंट्स ने लोन लेकर अपने बच्चों की कोचिंग पर पैसे खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि वे दूर के सेंटर पर दोबारा एग्जाम नहीं दे सकते।
जांच और एक्शन की मांग
CBI जांच की रफ़्तार की आलोचना करते हुए खान सर ने कहा, “अगर जांच ऐसे ही चलती रही, तो बच्चों का MBBS तो पूरा हो जाएगा लेकिन जांच कभी खत्म नहीं होगी।” उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट इस केस को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज को सौंपें और दोषियों को कड़ी सज़ा दें।
खान सर ने कोचिंग इंडस्ट्री के कुछ इंस्टीट्यूशन्स पर भी निशाना साधा और सिर्फ़ प्रॉफिट के लिए चलाए जाने वाले बिज़नेस मॉडल की बुराई की।
खान सर ने मौजूदा हालात में NTA पर स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ 'खेलने' का आरोप लगाते हुए न्याय और जवाबदेही की मांग की है। स्टूडेंट्स और पेरेंट्स में NTA के गवर्नेंस के खिलाफ़ बहुत गुस्सा है।
नई दिल्ली/पटना: NEET-UG 2026 एग्जाम कैंसिल होने से देश भर के 22 लाख से ज़्यादा स्टूडेंट्स में गुस्सा है। इसी बैकग्राउंड में, जाने-माने टीचर खान सर ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कड़ी आलोचना की है।
खान सर ने कहा, “बच्चों के 10 रुपये के डायपर भी लीक नहीं होते, लेकिन NTA के पेपर बार-बार फट जाते हैं। यह कभी भरोसे लायक एजेंसी नहीं है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का नाम बदलकर कभी भरोसे लायक एजेंसी कर देना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि पेपर फटने के बाद, NTA ‘बदले के मोड’ में आ जाती है और अगले एग्जाम के लिए बहुत मुश्किल पेपर तैयार करती है। इससे स्टूडेंट्स पर और मेंटल स्ट्रेस पड़ता है। खान सर ने कहा, “एग्जाम के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले स्टूडेंट्स का भरोसा टूट रहा है। कई स्टूडेंट्स 700+ मार्क्स लाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब वे निराश हैं।” एक स्टूडेंट की इमोशनल कहानी बताते हुए उन्होंने कहा, “जनवरी में उसकी माँ गुज़र गईं, लेकिन वह डॉक्टर बनने के पक्के इरादे से पढ़ाई कर रहा था। अब हम ऐसे स्टूडेंट्स का सामना कैसे करेंगे?”
लड़कियों और गरीब परिवारों पर असर
खान सर ने कहा कि यह एग्जाम मिडिल क्लास परिवारों की लड़कियों के लिए पढ़ाई का आखिरी मौका है। पेपर लीक होने से उनका पूरा भविष्य दांव पर है। साथ ही, कई पेरेंट्स ने लोन लेकर अपने बच्चों की कोचिंग पर पैसे खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि वे दूर के सेंटर पर दोबारा एग्जाम नहीं दे सकते।
जांच और एक्शन की मांग
CBI जांच की रफ़्तार की आलोचना करते हुए खान सर ने कहा, “अगर जांच ऐसे ही चलती रही, तो बच्चों का MBBS तो पूरा हो जाएगा लेकिन जांच कभी खत्म नहीं होगी।” उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट इस केस को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज को सौंपें और दोषियों को कड़ी सज़ा दें।
खान सर ने कोचिंग इंडस्ट्री के कुछ इंस्टीट्यूशन्स पर भी निशाना साधा और सिर्फ़ प्रॉफिट के लिए चलाए जाने वाले बिज़नेस मॉडल की बुराई की।
खान सर ने मौजूदा हालात में NTA पर स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ 'खेलने' का आरोप लगाते हुए न्याय और जवाबदेही की मांग की है। स्टूडेंट्स और पेरेंट्स में NTA के गवर्नेंस के खिलाफ़ बहुत गुस्सा है।
खान सर ने कहा, “बच्चों के 10 रुपये के डायपर भी लीक नहीं होते, लेकिन NTA के पेपर बार-बार फट जाते हैं। यह कभी भरोसे लायक एजेंसी नहीं है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का नाम बदलकर कभी भरोसे लायक एजेंसी कर देना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि पेपर फटने के बाद, NTA ‘बदले के मोड’ में आ जाती है और अगले एग्जाम के लिए बहुत मुश्किल पेपर तैयार करती है। इससे स्टूडेंट्स पर और मेंटल स्ट्रेस पड़ता है। खान सर ने कहा, “एग्जाम के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले स्टूडेंट्स का भरोसा टूट रहा है। कई स्टूडेंट्स 700+ मार्क्स लाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब वे निराश हैं।” एक स्टूडेंट की इमोशनल कहानी बताते हुए उन्होंने कहा, “जनवरी में उसकी माँ गुज़र गईं, लेकिन वह डॉक्टर बनने के पक्के इरादे से पढ़ाई कर रहा था। अब हम ऐसे स्टूडेंट्स का सामना कैसे करेंगे?”
लड़कियों और गरीब परिवारों पर असर
खान सर ने कहा कि यह एग्जाम मिडिल क्लास परिवारों की लड़कियों के लिए पढ़ाई का आखिरी मौका है। पेपर लीक होने से उनका पूरा भविष्य दांव पर है। साथ ही, कई पेरेंट्स ने लोन लेकर अपने बच्चों की कोचिंग पर पैसे खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि वे दूर के सेंटर पर दोबारा एग्जाम नहीं दे सकते।
जांच और एक्शन की मांग
CBI जांच की रफ़्तार की आलोचना करते हुए खान सर ने कहा, “अगर जांच ऐसे ही चलती रही, तो बच्चों का MBBS तो पूरा हो जाएगा लेकिन जांच कभी खत्म नहीं होगी।” उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट इस केस को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज को सौंपें और दोषियों को कड़ी सज़ा दें।
खान सर ने कोचिंग इंडस्ट्री के कुछ इंस्टीट्यूशन्स पर भी निशाना साधा और सिर्फ़ प्रॉफिट के लिए चलाए जाने वाले बिज़नेस मॉडल की बुराई की।
खान सर ने मौजूदा हालात में NTA पर स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ 'खेलने' का आरोप लगाते हुए न्याय और जवाबदेही की मांग की है। स्टूडेंट्स और पेरेंट्स में NTA के गवर्नेंस के खिलाफ़ बहुत गुस्सा है।
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