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इस गांव में 102 पॉजिटिव मरीज, कोविद बॉडी मरीज़ों को जलाने के लिए पर्याप्त जलाऊ लकड़ी नहीं हैं।

भंडारा - कोविद मृत रोगियों को जलाने के लिए पर्याप्त जलाऊ लकड़ी प्रदान नहीं करता है।
लाशें आधी-अधूरी थीं।
मुंह में लाशों के हाथ, पैर और अन्य अंग दबाकर ... आवारा कुत्ते गांव में घूमते रहते हैं।

कोविद मृतकों की लाशों को दाह संस्कार के लिए भीलवाड़ा गाँव के पास कछारगाँव के श्मशान में लाया जाता है, वह भी बहुत कम लकड़ी के साथ। आग लगने के तुरंत बाद कुत्तों का जमावड़ा लग जाता है। ये आवारा कुत्ते पूरे गाँव को अपने मुंह में कोविद पॉजिटिव लाश के आधे जले हुए टुकड़ों के साथ घूमते हुए देखे जाते हैं।
आज भी इस गांव में 102 पॉजिटिव मरीज हैं, जिनमें से कई की मौत हो चुकी है।
अगर जल्द ही कोई व्यवस्था नहीं की गई तो पूरा गांव तबाह हो जाएगा। यह डर गांव के लोगों को सता रहा है।

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