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CBI चीफ के सिलेक्शन प्रोसेस पर राहुल गांधी ने नाराज़गी जताई; "पक्षपातपूर्ण प्रोसेस में हिस्सा नहीं लेंगे"

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के नए डायरेक्टर के सिलेक्शन प्रोसेस से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक लेटर लिखकर इस प्रोसेस को पक्षपातपूर्ण और साफ़ नहीं बताया है।
प्रधानमंत्री मोदी, चीफ जस्टिस सूर्यकांत और विपक्ष के नेता राहुल गांधी मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास पर हुई सिलेक्शन कमिटी की मीटिंग में शामिल हुए। मीटिंग के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी बात साफ़ की।
राहुल गांधी ने कहा, "मैं रबर स्टैम्प नहीं हूं। मैं सिर्फ़ एक फॉर्मैलिटी पूरी करने के लिए इस पक्षपातपूर्ण प्रोसेस का हिस्सा नहीं बन सकता। मैं अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी के तहत इस प्रोसेस का बॉयकॉट कर रहा हूं।"
राहुल गांधी के मुख्य आरोप:
कैंडिडेट्स के ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स (सेल्फ-अप्रेज़ल रिपोर्ट, 360-डिग्री रिपोर्ट) समय पर नहीं दिए गए।
मीटिंग में अचानक 69 कैंडिडेट्स के रिकॉर्ड चेक करने के लिए कहा गया, जो प्रैक्टिकली नामुमकिन था। सरकार पर आरोप है कि वह CBI का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और पत्रकारों को टारगेट करने के लिए कर रही है।
राहुल गांधी ने पहले मई 2025 और अक्टूबर 2025 में सिलेक्शन प्रोसेस के बारे में निर्देश दिए थे, लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया।
कौन है रेस में?
नए CBI डायरेक्टर के पद के लिए 1989 से 1992 बैच के IPS अधिकारियों के नामों पर विचार किया जा रहा है। इनमें RAW चीफ पराग जैन, महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते, शत्रुजीत सिंह कपूर, CRPF चीफ जी. पी. सिंह, दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा और दूसरे नाम शामिल हैं।
राहुल गांधी के इस रुख से CBI डायरेक्टर के सिलेक्शन पर राजनीतिक विवाद बढ़ने की संभावना है।

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