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"पढ़े-लिखे भारतीयों में जन्म दर में बड़ी गिरावट; एलन मस्क ने चिंता जताई"

नई दिल्ली: भारत का टोटल फर्टिलिटी रेट अब रिप्लेसमेंट लेवल (2.1) से नीचे आ गया है। यह गिरावट खास तौर पर बहुत पढ़े-लिखे और शहरी लोगों में दिख रही है। मशहूर अमेरिकी इंडस्ट्रियलिस्ट और टेस्ला-स्पेसएक्स के फाउंडर एलन मस्क ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है।
एलन मस्क ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "भारत में जन्म दर रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे आ गई है, और वह भी सबसे ज़्यादा पढ़े-लिखे लोगों में।" उन्होंने इसे एक गंभीर आबादी का संकट बताया।
भारतीय जनगणना और अलग-अलग स्टडीज़ के मुताबिक, शहरी इलाकों और ग्रेजुएट्स में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। यह स्थिति आर्थिक दबाव, करियर, महंगाई, देर से शादी और बदलते सामाजिक मूल्यों की वजह से बनी है। फर्टिलिटी रेट में खास तौर पर बहुत पढ़ी-लिखी महिलाओं में काफी कमी आई है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो भारत को भविष्य में लेबर फोर्स की कमी, बुज़ुर्ग आबादी के अनुपात में बढ़ोतरी और आर्थिक ग्रोथ पर असर का सामना करना पड़ सकता है। कुछ राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक) में यह अनुपात पहले ही 1.5-1.8 तक कम हो चुका है। एलन मस्क ने दुनिया भर में घटती जन्म दर के मुद्दे पर बार-बार बात की है। उनके अनुसार, "घटती जन्म दर इंसानियत के सामने सबसे बड़े खतरों में से एक है।" उन्होंने इस ओर ध्यान दिलाया क्योंकि यह समस्या भारत जैसे युवा आबादी वाले देश में भी हो रही है।
सरकार इस बारे में जागरूकता फैलाने और अपनी फ़ैमिली प्लानिंग पॉलिसी में बदलाव करने की ज़रूरत बता रही है।

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