ईरान के साये में अमेरिका का 'डबल प्रॉफ़िट'! मिडिल ईस्ट युद्ध से दुनिया के लिए फ़्यूल-गैस संकट, बंकर की बिक्री में तेज़ी
वॉशिंगटन (ऑनलाइन लोकमत प्रतिनिधि): मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध ने दुनिया भर में फ़्यूल और गैस का बड़ा संकट पैदा कर दिया है। यह बात सामने आई है कि इस युद्ध से अमेरिका को 'डबल प्रॉफ़िट' हुआ है। ईरान के डर से अमेरिका ने सऊदी अरब, तुर्की और इज़राइल जैसे देशों को भारी हथियार बेचे, वहीं अब उसी युद्ध के डर से खाड़ी देशों में टेम्पररी बंकरों की मांग बढ़ गई है। अमेरिकी कंपनी 'एटलस सर्वाइवल शेल्टर्स' को इससे अच्छी-खासी कमाई होने लगी है।
एक बंकर की कीमत 25 लाख रुपये है, और इसमें दो लोग आसानी से छिप सकते हैं। कंपनी ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से मिडिल ईस्ट में 60 से ज़्यादा बंकर बेचे जा चुके हैं। कंपनी के डायरेक्टर ने कहा, "अभी मिडिल ईस्ट से सबसे ज़्यादा डिमांड है। हमें ऐसे बंकर चाहिए जो हमें सबसे बुरे हालात में भी बचा सकें। अगले दो महीनों में कम से कम 500 बंकर बेचे जा सकते हैं।" दुबई और दोहा जैसे शहरों में अमीर लोग ईरानी ड्रोन हमलों के डर से छोटे टेम्पररी बंकर खरीद रहे हैं। ऐसे बंकरों की भी भारी डिमांड रही है जो न्यूक्लियर हमलों से भी सुरक्षा देते हैं। इसका मतलब है कि लोग मिडिल ईस्ट में किसी बड़ी लड़ाई से डरे हुए हैं।
इज़राइल के उलट, मिडिल ईस्ट के मुस्लिम देशों ने पहले सुरक्षित बंकर नहीं बनाए थे। इस वजह से मिसाइल और बम हमलों में ज़्यादा लोग घायल हो रहे हैं और मारे जा रहे हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के डेटा के मुताबिक, 2021-25 के दौरान दुनिया के 100 में से 42 हथियार अकेले अमेरिका ने बेचे। 2016-20 में यह आंकड़ा 60 था। अमेरिका ने सबसे ज़्यादा हथियार सऊदी अरब को बेचे। ईरान के कट्टर दुश्मन सऊदी अरब के साथ-साथ अमेरिका ने तुर्की, मिस्र और इज़राइल जैसे देशों को भी बड़ी मात्रा में हथियार सप्लाई किए। ईरान का डर दिखाकर अमेरिका ने हथियारों की बिक्री में अपना दबदबा बढ़ाया और अब बंकर बेचकर एक्स्ट्रा प्रॉफिट कमा रहा है। यह साफ है कि युद्ध लड़ना अमेरिका के लिए 'फायदे का सौदा' बनता जा रहा है।
वॉशिंगटन (ऑनलाइन लोकमत प्रतिनिधि): मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध ने दुनिया भर में फ़्यूल और गैस का बड़ा संकट पैदा कर दिया है। यह बात सामने आई है कि इस युद्ध से अमेरिका को 'डबल प्रॉफ़िट' हुआ है। ईरान के डर से अमेरिका ने सऊदी अरब, तुर्की और इज़राइल जैसे देशों को भारी हथियार बेचे, वहीं अब उसी युद्ध के डर से खाड़ी देशों में टेम्पररी बंकरों की मांग बढ़ गई है। अमेरिकी कंपनी 'एटलस सर्वाइवल शेल्टर्स' को इससे अच्छी-खासी कमाई होने लगी है।
एक बंकर की कीमत 25 लाख रुपये है, और इसमें दो लोग आसानी से छिप सकते हैं। कंपनी ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से मिडिल ईस्ट में 60 से ज़्यादा बंकर बेचे जा चुके हैं। कंपनी के डायरेक्टर ने कहा, "अभी मिडिल ईस्ट से सबसे ज़्यादा डिमांड है। हमें ऐसे बंकर चाहिए जो हमें सबसे बुरे हालात में भी बचा सकें। अगले दो महीनों में कम से कम 500 बंकर बेचे जा सकते हैं।" दुबई और दोहा जैसे शहरों में अमीर लोग ईरानी ड्रोन हमलों के डर से छोटे टेम्पररी बंकर खरीद रहे हैं। ऐसे बंकरों की भी भारी डिमांड रही है जो न्यूक्लियर हमलों से भी सुरक्षा देते हैं। इसका मतलब है कि लोग मिडिल ईस्ट में किसी बड़ी लड़ाई से डरे हुए हैं।
इज़राइल के उलट, मिडिल ईस्ट के मुस्लिम देशों ने पहले सुरक्षित बंकर नहीं बनाए थे। इस वजह से मिसाइल और बम हमलों में ज़्यादा लोग घायल हो रहे हैं और मारे जा रहे हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के डेटा के मुताबिक, 2021-25 के दौरान दुनिया के 100 में से 42 हथियार अकेले अमेरिका ने बेचे। 2016-20 में यह आंकड़ा 60 था। अमेरिका ने सबसे ज़्यादा हथियार सऊदी अरब को बेचे। ईरान के कट्टर दुश्मन सऊदी अरब के साथ-साथ अमेरिका ने तुर्की, मिस्र और इज़राइल जैसे देशों को भी बड़ी मात्रा में हथियार सप्लाई किए। ईरान का डर दिखाकर अमेरिका ने हथियारों की बिक्री में अपना दबदबा बढ़ाया और अब बंकर बेचकर एक्स्ट्रा प्रॉफिट कमा रहा है। यह साफ है कि युद्ध लड़ना अमेरिका के लिए 'फायदे का सौदा' बनता जा रहा है।
एक बंकर की कीमत 25 लाख रुपये है, और इसमें दो लोग आसानी से छिप सकते हैं। कंपनी ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से मिडिल ईस्ट में 60 से ज़्यादा बंकर बेचे जा चुके हैं। कंपनी के डायरेक्टर ने कहा, "अभी मिडिल ईस्ट से सबसे ज़्यादा डिमांड है। हमें ऐसे बंकर चाहिए जो हमें सबसे बुरे हालात में भी बचा सकें। अगले दो महीनों में कम से कम 500 बंकर बेचे जा सकते हैं।" दुबई और दोहा जैसे शहरों में अमीर लोग ईरानी ड्रोन हमलों के डर से छोटे टेम्पररी बंकर खरीद रहे हैं। ऐसे बंकरों की भी भारी डिमांड रही है जो न्यूक्लियर हमलों से भी सुरक्षा देते हैं। इसका मतलब है कि लोग मिडिल ईस्ट में किसी बड़ी लड़ाई से डरे हुए हैं।
इज़राइल के उलट, मिडिल ईस्ट के मुस्लिम देशों ने पहले सुरक्षित बंकर नहीं बनाए थे। इस वजह से मिसाइल और बम हमलों में ज़्यादा लोग घायल हो रहे हैं और मारे जा रहे हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के डेटा के मुताबिक, 2021-25 के दौरान दुनिया के 100 में से 42 हथियार अकेले अमेरिका ने बेचे। 2016-20 में यह आंकड़ा 60 था। अमेरिका ने सबसे ज़्यादा हथियार सऊदी अरब को बेचे। ईरान के कट्टर दुश्मन सऊदी अरब के साथ-साथ अमेरिका ने तुर्की, मिस्र और इज़राइल जैसे देशों को भी बड़ी मात्रा में हथियार सप्लाई किए। ईरान का डर दिखाकर अमेरिका ने हथियारों की बिक्री में अपना दबदबा बढ़ाया और अब बंकर बेचकर एक्स्ट्रा प्रॉफिट कमा रहा है। यह साफ है कि युद्ध लड़ना अमेरिका के लिए 'फायदे का सौदा' बनता जा रहा है।
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