अनिल अंबानी पर CBI का नया हमला: बैंक ऑफ़ बड़ौदा के साथ 2200 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड का मामला
मुंबई, 27 फरवरी, 2026: मशहूर उद्योगपति अनिल अंबानी की कानूनी मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के मुंबई में उनके शानदार घर 'अबोड' को ज़ब्त करने के बाद, अब सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने उनके खिलाफ एक नया केस दर्ज किया है। यह मामला बैंक ऑफ़ बड़ौदा से जुड़ा है और 2,220 करोड़ रुपये से ज़्यादा के कथित लोन फ्रॉड से जुड़ा है।
CBI ने यह केस बैंक ऑफ़ बड़ौदा की शिकायत के आधार पर दर्ज किया है। आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) ने 2013 से 2017 के बीच जो लोन लिए थे, उनका इस्तेमाल मंज़ूर मकसद के बजाय दूसरे कामों के लिए किया, जिससे बैंक को भारी फाइनेंशियल नुकसान हुआ। CBI के एक प्रवक्ता के मुताबिक, केस दर्ज होने के बाद अनिल अंबानी के घर और कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस पर छापे मारे गए। इन छापों में कई ज़रूरी डॉक्यूमेंट और सबूत ज़ब्त किए गए हैं। आरकॉम और उससे जुड़ी कंपनियों जैसे रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड ने बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से कुल 31,580 करोड़ रुपये उधार लिए थे। शिकायत में दावा किया गया है कि इन फंड का एक बड़ा हिस्सा दूसरे बैंकों से लोन चुकाने, संबंधित पार्टियों को पेमेंट और टेम्पररी इन्वेस्टमेंट के लिए इस्तेमाल किया गया था। फोरेंसिक ऑडिट में इन फंड के बिना इजाज़त इस्तेमाल और गलत इस्तेमाल के सबूत मिले हैं। बैंक का आरोप है कि लोन की रकम को तय शर्तों के मुताबिक इस्तेमाल करने के बजाय प्लान के मुताबिक दूसरी जगह लगाया गया।
इस अकाउंट को 5 जून, 2017 को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया गया था। इसके बाद इसे फ्रॉड के तौर पर क्लासिफाई करने का प्रोसेस शुरू किया गया था, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। 23 फरवरी को यह रोक हटने के बाद बैंक ने तुरंत CBI में शिकायत दर्ज कराई।
इस बीच, ED मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक अलग मामले में अनिल अंबानी से पूछताछ कर रहा है। ED ने उनसे करीब नौ घंटे पूछताछ की और उन्हें फिर से बुलाया है। यह नया मामला अनिल अंबानी की फाइनेंशियल दिक्कतों को और गंभीर बना रहा है।
मुंबई, 27 फरवरी, 2026: मशहूर उद्योगपति अनिल अंबानी की कानूनी मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के मुंबई में उनके शानदार घर 'अबोड' को ज़ब्त करने के बाद, अब सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने उनके खिलाफ एक नया केस दर्ज किया है। यह मामला बैंक ऑफ़ बड़ौदा से जुड़ा है और 2,220 करोड़ रुपये से ज़्यादा के कथित लोन फ्रॉड से जुड़ा है।
CBI ने यह केस बैंक ऑफ़ बड़ौदा की शिकायत के आधार पर दर्ज किया है। आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) ने 2013 से 2017 के बीच जो लोन लिए थे, उनका इस्तेमाल मंज़ूर मकसद के बजाय दूसरे कामों के लिए किया, जिससे बैंक को भारी फाइनेंशियल नुकसान हुआ। CBI के एक प्रवक्ता के मुताबिक, केस दर्ज होने के बाद अनिल अंबानी के घर और कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस पर छापे मारे गए। इन छापों में कई ज़रूरी डॉक्यूमेंट और सबूत ज़ब्त किए गए हैं। आरकॉम और उससे जुड़ी कंपनियों जैसे रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड ने बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से कुल 31,580 करोड़ रुपये उधार लिए थे। शिकायत में दावा किया गया है कि इन फंड का एक बड़ा हिस्सा दूसरे बैंकों से लोन चुकाने, संबंधित पार्टियों को पेमेंट और टेम्पररी इन्वेस्टमेंट के लिए इस्तेमाल किया गया था। फोरेंसिक ऑडिट में इन फंड के बिना इजाज़त इस्तेमाल और गलत इस्तेमाल के सबूत मिले हैं। बैंक का आरोप है कि लोन की रकम को तय शर्तों के मुताबिक इस्तेमाल करने के बजाय प्लान के मुताबिक दूसरी जगह लगाया गया।
इस अकाउंट को 5 जून, 2017 को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया गया था। इसके बाद इसे फ्रॉड के तौर पर क्लासिफाई करने का प्रोसेस शुरू किया गया था, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। 23 फरवरी को यह रोक हटने के बाद बैंक ने तुरंत CBI में शिकायत दर्ज कराई।
इस बीच, ED मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक अलग मामले में अनिल अंबानी से पूछताछ कर रहा है। ED ने उनसे करीब नौ घंटे पूछताछ की और उन्हें फिर से बुलाया है। यह नया मामला अनिल अंबानी की फाइनेंशियल दिक्कतों को और गंभीर बना रहा है।
CBI ने यह केस बैंक ऑफ़ बड़ौदा की शिकायत के आधार पर दर्ज किया है। आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) ने 2013 से 2017 के बीच जो लोन लिए थे, उनका इस्तेमाल मंज़ूर मकसद के बजाय दूसरे कामों के लिए किया, जिससे बैंक को भारी फाइनेंशियल नुकसान हुआ। CBI के एक प्रवक्ता के मुताबिक, केस दर्ज होने के बाद अनिल अंबानी के घर और कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस पर छापे मारे गए। इन छापों में कई ज़रूरी डॉक्यूमेंट और सबूत ज़ब्त किए गए हैं। आरकॉम और उससे जुड़ी कंपनियों जैसे रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड ने बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से कुल 31,580 करोड़ रुपये उधार लिए थे। शिकायत में दावा किया गया है कि इन फंड का एक बड़ा हिस्सा दूसरे बैंकों से लोन चुकाने, संबंधित पार्टियों को पेमेंट और टेम्पररी इन्वेस्टमेंट के लिए इस्तेमाल किया गया था। फोरेंसिक ऑडिट में इन फंड के बिना इजाज़त इस्तेमाल और गलत इस्तेमाल के सबूत मिले हैं। बैंक का आरोप है कि लोन की रकम को तय शर्तों के मुताबिक इस्तेमाल करने के बजाय प्लान के मुताबिक दूसरी जगह लगाया गया।
इस अकाउंट को 5 जून, 2017 को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया गया था। इसके बाद इसे फ्रॉड के तौर पर क्लासिफाई करने का प्रोसेस शुरू किया गया था, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। 23 फरवरी को यह रोक हटने के बाद बैंक ने तुरंत CBI में शिकायत दर्ज कराई।
इस बीच, ED मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक अलग मामले में अनिल अंबानी से पूछताछ कर रहा है। ED ने उनसे करीब नौ घंटे पूछताछ की और उन्हें फिर से बुलाया है। यह नया मामला अनिल अंबानी की फाइनेंशियल दिक्कतों को और गंभीर बना रहा है।
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