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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को बड़ा झटका; ब्रिटेन ने मध्यस्थता की मांग ठुकराई

नागपुर/काठमांडू (1 जून, 2026): भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद में मध्यस्थता करने की नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की मांग को ब्रिटेन ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इस घटना से बालेन शाह को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।
सुगौली संधि (1816) का हवाला देते हुए बालेन शाह ने ब्रिटिश राजदूत रॉब फेन से मुलाकात की थी और मध्यस्थता का अनुरोध किया था। हालांकि, ब्रिटेन ने साफ कर दिया था कि यह पूरी तरह से द्विपक्षीय मामला है और ब्रिटेन इसमें दखल नहीं देगा।
नेपाल के मुख्य सलाहकार कुमार ब्यंजनकर ने ब्रिटिश राजदूत से कहा कि ब्रिटेन ईस्ट इंडिया कंपनी के समय की सुगौली संधि का एक पक्ष है, इसलिए उसे पहल करनी चाहिए। लेकिन ब्रिटिश राजदूत ने यह कहते हुए मना कर दिया कि यह द्विपक्षीय मामला है।
इस बीच, सीमा विवाद को लेकर बालेन शाह पर घरेलू स्तर पर भारी दबाव है। रविवार को संसद में बोलते हुए उनके विवादित बयान के कारण विपक्ष ने उन पर देशद्रोह का आरोप भी लगाया है। बलेन शाह ने कहा था, "प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि नेपाल ने भारत की कुछ ज़मीन भी हड़प ली है।" विदेश मंत्रालय को भी इस बयान पर सफाई देनी पड़ी। ब्रिटेन के इनकार ने बलेन शाह की हालत और खराब कर दी है।

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