दोबारा परीक्षा नहीं, लेकिन नीट काउंसलिंग जारी रहेगी
-सुप्रीम कोर्ट का आदेश, कहा - गड़बड़ियों से परीक्षा की विश्वसनीयता को चोट पहुंची
-एनटीए को नोटिस भेजकर कहा, हमें जवाब चाहिए
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नीट काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। ये याचिका स्टूडेंट शिवांगी मिश्रा और 9 अन्य छात्रों ने रिजल्ट की घोषणा से पहले 1 जून को दायर की थी। इसमें बिहार और राजस्थान के एग्जाम सेंटर्स पर गलत क्वेश्चन पेपर्स बंटने के चलते हुई गड़बड़ी की शिकायत की गई थी और परीक्षा रद्द कर एसआईटी जांच की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए को नोटिस जारी करते हुए कहा- नीट यूजी की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। हमें इसका जवाब चाहिए।
अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की वैकेशन बेंच ने मामले की सुनवाई की। अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
बता दें कि देश भर में छात्र इस मामले को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। वहीं इस मामले की सीबीआई जांच को लेकर कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में फाइल की गई हैं। पहले कोर्ट जुलाई में मामले की सुनवाई करने वाला था। हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले सुनवाई करने का फैसला किया गया।
फिर से परीक्षा कराने की मांग
बता दें कि कई याचिकाओं में नीट के परिणामों को रद्द करके फिर से परीक्षा कराने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से कड़े शब्दों में कहा कि परिणामों पर धांधली के आरोपों के बाद परीक्षा की पवित्रता पर सवाल उठे हैं और इसपर हमें जवाब चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने नीट यूजी 2024 की काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
4 जून को नीट यूजी परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए थे। 67 छात्र ऐसे थे, जिन्हें 720 में से 720 अंक मिले। इनमें से 6 एक ही परीक्षा केंद्र से हैं। ऐसे में परीक्षा में धांधली के आरोप लगने लगे। एनटीए पर भी परीक्षा में गड़बड़ी और ग्रेस मार्क्स को लेकर सवाल खड़े किए गए। छात्र और कई संगठनों का कहना है कि परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी है, इसलिए दोबारा परीक्षा करवाने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट में फाइल की गई याचिका में कहा गया था कि 720 में से 718 और 719 अंक आने भी असंभव हैं। वहीं परीक्षा में देरी होने पर ग्रेस मार्क देने के पीछे कुछ छात्रों को बैकडोर एंट्री देने का प्रयास भी है। याचिका में यह भी कहा गया था कि 29 अप्रैल को एजेंसी द्वारा प्रकाशित उत्तर कुंजी में भी कमियां हैं। वहीं 5 मई को आयोजित परीक्षा में भी पेपर लीक होने की शिकायतें सामने आई थीं।
-सुप्रीम कोर्ट का आदेश, कहा - गड़बड़ियों से परीक्षा की विश्वसनीयता को चोट पहुंची
-एनटीए को नोटिस भेजकर कहा, हमें जवाब चाहिए
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नीट काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। ये याचिका स्टूडेंट शिवांगी मिश्रा और 9 अन्य छात्रों ने रिजल्ट की घोषणा से पहले 1 जून को दायर की थी। इसमें बिहार और राजस्थान के एग्जाम सेंटर्स पर गलत क्वेश्चन पेपर्स बंटने के चलते हुई गड़बड़ी की शिकायत की गई थी और परीक्षा रद्द कर एसआईटी जांच की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए को नोटिस जारी करते हुए कहा- नीट यूजी की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। हमें इसका जवाब चाहिए।
अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की वैकेशन बेंच ने मामले की सुनवाई की। अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
बता दें कि देश भर में छात्र इस मामले को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। वहीं इस मामले की सीबीआई जांच को लेकर कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में फाइल की गई हैं। पहले कोर्ट जुलाई में मामले की सुनवाई करने वाला था। हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले सुनवाई करने का फैसला किया गया।
फिर से परीक्षा कराने की मांग
बता दें कि कई याचिकाओं में नीट के परिणामों को रद्द करके फिर से परीक्षा कराने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से कड़े शब्दों में कहा कि परिणामों पर धांधली के आरोपों के बाद परीक्षा की पवित्रता पर सवाल उठे हैं और इसपर हमें जवाब चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने नीट यूजी 2024 की काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
4 जून को नीट यूजी परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए थे। 67 छात्र ऐसे थे, जिन्हें 720 में से 720 अंक मिले। इनमें से 6 एक ही परीक्षा केंद्र से हैं। ऐसे में परीक्षा में धांधली के आरोप लगने लगे। एनटीए पर भी परीक्षा में गड़बड़ी और ग्रेस मार्क्स को लेकर सवाल खड़े किए गए। छात्र और कई संगठनों का कहना है कि परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी है, इसलिए दोबारा परीक्षा करवाने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट में फाइल की गई याचिका में कहा गया था कि 720 में से 718 और 719 अंक आने भी असंभव हैं। वहीं परीक्षा में देरी होने पर ग्रेस मार्क देने के पीछे कुछ छात्रों को बैकडोर एंट्री देने का प्रयास भी है। याचिका में यह भी कहा गया था कि 29 अप्रैल को एजेंसी द्वारा प्रकाशित उत्तर कुंजी में भी कमियां हैं। वहीं 5 मई को आयोजित परीक्षा में भी पेपर लीक होने की शिकायतें सामने आई थीं।
-एनटीए को नोटिस भेजकर कहा, हमें जवाब चाहिए
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नीट काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। ये याचिका स्टूडेंट शिवांगी मिश्रा और 9 अन्य छात्रों ने रिजल्ट की घोषणा से पहले 1 जून को दायर की थी। इसमें बिहार और राजस्थान के एग्जाम सेंटर्स पर गलत क्वेश्चन पेपर्स बंटने के चलते हुई गड़बड़ी की शिकायत की गई थी और परीक्षा रद्द कर एसआईटी जांच की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए को नोटिस जारी करते हुए कहा- नीट यूजी की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। हमें इसका जवाब चाहिए।
अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की वैकेशन बेंच ने मामले की सुनवाई की। अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
बता दें कि देश भर में छात्र इस मामले को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। वहीं इस मामले की सीबीआई जांच को लेकर कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में फाइल की गई हैं। पहले कोर्ट जुलाई में मामले की सुनवाई करने वाला था। हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले सुनवाई करने का फैसला किया गया।
फिर से परीक्षा कराने की मांग
बता दें कि कई याचिकाओं में नीट के परिणामों को रद्द करके फिर से परीक्षा कराने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से कड़े शब्दों में कहा कि परिणामों पर धांधली के आरोपों के बाद परीक्षा की पवित्रता पर सवाल उठे हैं और इसपर हमें जवाब चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने नीट यूजी 2024 की काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
4 जून को नीट यूजी परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए थे। 67 छात्र ऐसे थे, जिन्हें 720 में से 720 अंक मिले। इनमें से 6 एक ही परीक्षा केंद्र से हैं। ऐसे में परीक्षा में धांधली के आरोप लगने लगे। एनटीए पर भी परीक्षा में गड़बड़ी और ग्रेस मार्क्स को लेकर सवाल खड़े किए गए। छात्र और कई संगठनों का कहना है कि परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी है, इसलिए दोबारा परीक्षा करवाने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट में फाइल की गई याचिका में कहा गया था कि 720 में से 718 और 719 अंक आने भी असंभव हैं। वहीं परीक्षा में देरी होने पर ग्रेस मार्क देने के पीछे कुछ छात्रों को बैकडोर एंट्री देने का प्रयास भी है। याचिका में यह भी कहा गया था कि 29 अप्रैल को एजेंसी द्वारा प्रकाशित उत्तर कुंजी में भी कमियां हैं। वहीं 5 मई को आयोजित परीक्षा में भी पेपर लीक होने की शिकायतें सामने आई थीं।
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