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TMC के 20 बागी MPs के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का नोटिस; जस्टिस बागची की अहम टिप्पणी – डिसक्वालिफिकेशन केस पर फैसला समय पर होना चाहिए

नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी MPs को नोटिस जारी किया है। पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए इन MPs को डिसक्वालिफिकेशन देने के संबंध में यह याचिका TMC के नेशनल जनरल सेक्रेटरी और लोकसभा MP अभिषेक बनर्जी ने दायर की थी।
मंगलवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने साफ किया कि MPs के खिलाफ डिसक्वालिफिकेशन की कार्रवाई एक तय समय में पूरी होनी चाहिए। जस्टिस बागची ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा, “नोटिस जारी करने की फॉर्मैलिटी असली मुद्दा नहीं है, बल्कि कार्रवाई पूरी करना है।”
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में मौजूद थे। उन्होंने स्पीकर से नोटिस जारी न करने का अनुरोध किया और कहा कि स्पीकर पहले ही बागी MPs से जवाब मांग चुके हैं। इसके बाद कोर्ट ने स्पीकर के खिलाफ फॉर्मल नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया। TMC के बागी MPs ने एक इंडिपेंडेंट ग्रुप के तौर पर पहचान मांगी है। हालांकि, पार्टी ने कहा है कि ये MPs पार्टी सिंबल पर चुने गए थे और दूसरी पार्टी में शामिल होना एंटी-डिफेक्शन एक्ट का उल्लंघन है। बागी ग्रुप की लीडर काकोली घोष दस्तीदार ने 17 जून, 2026 को स्पीकर को एक लेटर देकर ऐलान किया था कि वे NDA के साथ काम करेंगे।
TMC MP कल्याण बनर्जी ने इस पर रिएक्शन देते हुए कहा, “यह तो बस शुरुआत है। MPs के खिलाफ एक्शन शुरू हो गया है, अब अगला नंबर बागी MLAs का होगा।”

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