बजट से पहले फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना: JM फाइनेंशियल की रिपोर्ट क्या कहती है?
मुंबई: पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें पिछले कई महीनों से स्थिर हैं, लेकिन अब इसमें बदलाव की संभावना है। ब्रोकरेज फर्म JM फाइनेंशियल की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार 1 फरवरी, 2026 को पेश होने वाले यूनियन बजट से पहले पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी 3 से 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ा सकती है। इससे आम नागरिक की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इस समय भारी मुनाफा कमा रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की मौजूदा कीमत लगभग $61 प्रति बैरल है, जो सामान्य लेवल से कम है। इससे कंपनियों का ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन (GMM) 10.6 रुपये प्रति लीटर और इंटीग्रेटेड ग्रॉस मार्जिन 19.2 रुपये हो गया है, जो हिस्टोरिकल एवरेज से ज़्यादा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार पर फिस्कल प्रेशर बढ़ रहा है। FY26 में रेवेन्यू कलेक्शन बजट अनुमान से पीछे रहा है – अप्रैल और नवंबर 2025 के बीच यह सिर्फ़ 56% था, जबकि पिछले साल इसी समय में यह 60% था। टैक्स कलेक्शन भी धीमा हो गया है।
इस एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ोतरी से सरकार को हर साल 50,000-70,000 करोड़ रुपये का एक्स्ट्रा रेवेन्यू मिल सकता है। 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से लगभग 17,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू आएगा। हालांकि, इससे तेल कंपनियों के प्रॉफिट पर असर पड़ सकता है। JM Financial ने HPCL पर ‘Sell’ रेटिंग और IOCL और BPCL पर ‘Reduce’ रेटिंग बनाए रखी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हाई मार्जिन ज़्यादा समय तक नहीं रहेंगे और इन्वेस्टर्स को सावधान रहना चाहिए।
सरकार का फिस्कल डेफिसिट टारगेट 4.4% और GDP ग्रोथ 8% रहने की उम्मीद है, लेकिन यह अभी भी चैलेंजिंग है। इस मामले में, फ्यूल टैक्स बढ़ाना सरकार के लिए एक आसान ऑप्शन हो सकता है। आने वाले दिनों में फ्यूल की कीमतों पर नज़र रखने की ज़रूरत है।
मुंबई: पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें पिछले कई महीनों से स्थिर हैं, लेकिन अब इसमें बदलाव की संभावना है। ब्रोकरेज फर्म JM फाइनेंशियल की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार 1 फरवरी, 2026 को पेश होने वाले यूनियन बजट से पहले पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी 3 से 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ा सकती है। इससे आम नागरिक की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इस समय भारी मुनाफा कमा रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की मौजूदा कीमत लगभग $61 प्रति बैरल है, जो सामान्य लेवल से कम है। इससे कंपनियों का ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन (GMM) 10.6 रुपये प्रति लीटर और इंटीग्रेटेड ग्रॉस मार्जिन 19.2 रुपये हो गया है, जो हिस्टोरिकल एवरेज से ज़्यादा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार पर फिस्कल प्रेशर बढ़ रहा है। FY26 में रेवेन्यू कलेक्शन बजट अनुमान से पीछे रहा है – अप्रैल और नवंबर 2025 के बीच यह सिर्फ़ 56% था, जबकि पिछले साल इसी समय में यह 60% था। टैक्स कलेक्शन भी धीमा हो गया है।
इस एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ोतरी से सरकार को हर साल 50,000-70,000 करोड़ रुपये का एक्स्ट्रा रेवेन्यू मिल सकता है। 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से लगभग 17,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू आएगा। हालांकि, इससे तेल कंपनियों के प्रॉफिट पर असर पड़ सकता है। JM Financial ने HPCL पर ‘Sell’ रेटिंग और IOCL और BPCL पर ‘Reduce’ रेटिंग बनाए रखी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हाई मार्जिन ज़्यादा समय तक नहीं रहेंगे और इन्वेस्टर्स को सावधान रहना चाहिए।
सरकार का फिस्कल डेफिसिट टारगेट 4.4% और GDP ग्रोथ 8% रहने की उम्मीद है, लेकिन यह अभी भी चैलेंजिंग है। इस मामले में, फ्यूल टैक्स बढ़ाना सरकार के लिए एक आसान ऑप्शन हो सकता है। आने वाले दिनों में फ्यूल की कीमतों पर नज़र रखने की ज़रूरत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इस समय भारी मुनाफा कमा रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की मौजूदा कीमत लगभग $61 प्रति बैरल है, जो सामान्य लेवल से कम है। इससे कंपनियों का ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन (GMM) 10.6 रुपये प्रति लीटर और इंटीग्रेटेड ग्रॉस मार्जिन 19.2 रुपये हो गया है, जो हिस्टोरिकल एवरेज से ज़्यादा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार पर फिस्कल प्रेशर बढ़ रहा है। FY26 में रेवेन्यू कलेक्शन बजट अनुमान से पीछे रहा है – अप्रैल और नवंबर 2025 के बीच यह सिर्फ़ 56% था, जबकि पिछले साल इसी समय में यह 60% था। टैक्स कलेक्शन भी धीमा हो गया है।
इस एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ोतरी से सरकार को हर साल 50,000-70,000 करोड़ रुपये का एक्स्ट्रा रेवेन्यू मिल सकता है। 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से लगभग 17,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू आएगा। हालांकि, इससे तेल कंपनियों के प्रॉफिट पर असर पड़ सकता है। JM Financial ने HPCL पर ‘Sell’ रेटिंग और IOCL और BPCL पर ‘Reduce’ रेटिंग बनाए रखी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हाई मार्जिन ज़्यादा समय तक नहीं रहेंगे और इन्वेस्टर्स को सावधान रहना चाहिए।
सरकार का फिस्कल डेफिसिट टारगेट 4.4% और GDP ग्रोथ 8% रहने की उम्मीद है, लेकिन यह अभी भी चैलेंजिंग है। इस मामले में, फ्यूल टैक्स बढ़ाना सरकार के लिए एक आसान ऑप्शन हो सकता है। आने वाले दिनों में फ्यूल की कीमतों पर नज़र रखने की ज़रूरत है।
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