विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में टैक्सेशन लॉज़ अमेंडमेंट बिल 2026 पास; विदेशी इन्वेस्टमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को बड़ी राहत
लोकसभा में गुरुवार को विपक्ष के ज़ोरदार शोर और नारेबाजी के बीच बिना किसी डिटेल में चर्चा के ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पास हो गया। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बिल पेश किया। बिल पर डिटेल में चर्चा नहीं हो सकी क्योंकि विपक्ष कई मुद्दों पर होम मिनिस्टर से बयान मांग रहा था। सदन ने संसद सदस्यों के अमेंडमेंट और ऑर्डिनेंस को रद्द करने के प्रस्ताव को दरकिनार करते हुए बिल को वॉइस वोट से पास कर दिया।
बिल का मुख्य मकसद देश में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) बढ़ाना, फॉरेन फंड मैनेजर्स के लिए नियमों को आसान बनाना और मोबाइल, लैपटॉप जैसी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों को 2040-41 तक बड़ी टैक्स छूट देना है। साथ ही, डेटा सेंटर और डिजिटल पेमेंट से जुड़े कई नियमों में छूट दी गई है।
बिल में ज़रूरी बदलाव
फॉरेन फंड मैनेजर्स के लिए राहत
भारत आने वाले फॉरेन इन्वेस्टर्स और फंड मैनेजर्स के लिए नियमों को काफी आसान बनाया गया है। अब भारत में इन्वेस्ट किए गए पैसे पर टैक्स लगने का प्रोसेस पहले से आसान हो जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को 2040 तक टैक्स में छूट
मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट, कंप्यूटर और सर्वर जैसे डिजिटल डिवाइस बनाने वाली विदेशी कंपनियों को 2040-41 तक टैक्स में छूट देने का प्रोविज़न है। अगर कोई विदेशी कंपनी भारतीय फैक्ट्रियों को स्पेयर पार्ट्स और मशीनरी सप्लाई करती है या वेयरहाउस में सामान स्टोर करती है, तो उसे 15 साल तक टैक्स में छूट मिलेगी। इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते होने की संभावना है।
डेटा सेंटर और क्लाउड कंपनियों के लिए सुविधा
भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों को बार-बार परमिशन लेने की ज़रूरत नहीं होगी। साथ ही, डेटा सेंटर अब लीज़ पर भी चलाए जा सकेंगे।
डिजिटल पेमेंट नियम
इनकम टैक्स एक्ट और पेमेंट सिस्टम एक्ट में बदलाव किया गया है ताकि 50 करोड़ रुपये से ज़्यादा टर्नओवर वाले बड़े व्यापारियों के लिए RuPay कार्ड और BHIM-UPI के इस्तेमाल से जुड़े प्रोविज़न को ज़्यादा प्रैक्टिकल बनाया जा सके।
सरकार का कहना है कि इस कानून से भारत की इकोनॉमिक पॉलिसी में ज़्यादा ट्रांसपेरेंसी आएगी और विदेशी कंपनियों के लिए भारत में बिज़नेस करना आसान हो जाएगा। इसे देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इन बदलावों से विदेशी निवेश बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
लोकसभा में गुरुवार को विपक्ष के ज़ोरदार शोर और नारेबाजी के बीच बिना किसी डिटेल में चर्चा के ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पास हो गया। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बिल पेश किया। बिल पर डिटेल में चर्चा नहीं हो सकी क्योंकि विपक्ष कई मुद्दों पर होम मिनिस्टर से बयान मांग रहा था। सदन ने संसद सदस्यों के अमेंडमेंट और ऑर्डिनेंस को रद्द करने के प्रस्ताव को दरकिनार करते हुए बिल को वॉइस वोट से पास कर दिया।
बिल का मुख्य मकसद देश में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) बढ़ाना, फॉरेन फंड मैनेजर्स के लिए नियमों को आसान बनाना और मोबाइल, लैपटॉप जैसी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों को 2040-41 तक बड़ी टैक्स छूट देना है। साथ ही, डेटा सेंटर और डिजिटल पेमेंट से जुड़े कई नियमों में छूट दी गई है।
बिल में ज़रूरी बदलाव
फॉरेन फंड मैनेजर्स के लिए राहत
भारत आने वाले फॉरेन इन्वेस्टर्स और फंड मैनेजर्स के लिए नियमों को काफी आसान बनाया गया है। अब भारत में इन्वेस्ट किए गए पैसे पर टैक्स लगने का प्रोसेस पहले से आसान हो जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को 2040 तक टैक्स में छूट
मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट, कंप्यूटर और सर्वर जैसे डिजिटल डिवाइस बनाने वाली विदेशी कंपनियों को 2040-41 तक टैक्स में छूट देने का प्रोविज़न है। अगर कोई विदेशी कंपनी भारतीय फैक्ट्रियों को स्पेयर पार्ट्स और मशीनरी सप्लाई करती है या वेयरहाउस में सामान स्टोर करती है, तो उसे 15 साल तक टैक्स में छूट मिलेगी। इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते होने की संभावना है।
डेटा सेंटर और क्लाउड कंपनियों के लिए सुविधा
भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों को बार-बार परमिशन लेने की ज़रूरत नहीं होगी। साथ ही, डेटा सेंटर अब लीज़ पर भी चलाए जा सकेंगे।
डिजिटल पेमेंट नियम
इनकम टैक्स एक्ट और पेमेंट सिस्टम एक्ट में बदलाव किया गया है ताकि 50 करोड़ रुपये से ज़्यादा टर्नओवर वाले बड़े व्यापारियों के लिए RuPay कार्ड और BHIM-UPI के इस्तेमाल से जुड़े प्रोविज़न को ज़्यादा प्रैक्टिकल बनाया जा सके।
सरकार का कहना है कि इस कानून से भारत की इकोनॉमिक पॉलिसी में ज़्यादा ट्रांसपेरेंसी आएगी और विदेशी कंपनियों के लिए भारत में बिज़नेस करना आसान हो जाएगा। इसे देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इन बदलावों से विदेशी निवेश बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
लोकसभा में गुरुवार को विपक्ष के ज़ोरदार शोर और नारेबाजी के बीच बिना किसी डिटेल में चर्चा के ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पास हो गया। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बिल पेश किया। बिल पर डिटेल में चर्चा नहीं हो सकी क्योंकि विपक्ष कई मुद्दों पर होम मिनिस्टर से बयान मांग रहा था। सदन ने संसद सदस्यों के अमेंडमेंट और ऑर्डिनेंस को रद्द करने के प्रस्ताव को दरकिनार करते हुए बिल को वॉइस वोट से पास कर दिया।
बिल का मुख्य मकसद देश में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) बढ़ाना, फॉरेन फंड मैनेजर्स के लिए नियमों को आसान बनाना और मोबाइल, लैपटॉप जैसी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों को 2040-41 तक बड़ी टैक्स छूट देना है। साथ ही, डेटा सेंटर और डिजिटल पेमेंट से जुड़े कई नियमों में छूट दी गई है।
बिल में ज़रूरी बदलाव
फॉरेन फंड मैनेजर्स के लिए राहत
भारत आने वाले फॉरेन इन्वेस्टर्स और फंड मैनेजर्स के लिए नियमों को काफी आसान बनाया गया है। अब भारत में इन्वेस्ट किए गए पैसे पर टैक्स लगने का प्रोसेस पहले से आसान हो जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को 2040 तक टैक्स में छूट
मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट, कंप्यूटर और सर्वर जैसे डिजिटल डिवाइस बनाने वाली विदेशी कंपनियों को 2040-41 तक टैक्स में छूट देने का प्रोविज़न है। अगर कोई विदेशी कंपनी भारतीय फैक्ट्रियों को स्पेयर पार्ट्स और मशीनरी सप्लाई करती है या वेयरहाउस में सामान स्टोर करती है, तो उसे 15 साल तक टैक्स में छूट मिलेगी। इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते होने की संभावना है।
डेटा सेंटर और क्लाउड कंपनियों के लिए सुविधा
भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों को बार-बार परमिशन लेने की ज़रूरत नहीं होगी। साथ ही, डेटा सेंटर अब लीज़ पर भी चलाए जा सकेंगे।
डिजिटल पेमेंट नियम
इनकम टैक्स एक्ट और पेमेंट सिस्टम एक्ट में बदलाव किया गया है ताकि 50 करोड़ रुपये से ज़्यादा टर्नओवर वाले बड़े व्यापारियों के लिए RuPay कार्ड और BHIM-UPI के इस्तेमाल से जुड़े प्रोविज़न को ज़्यादा प्रैक्टिकल बनाया जा सके।
सरकार का कहना है कि इस कानून से भारत की इकोनॉमिक पॉलिसी में ज़्यादा ट्रांसपेरेंसी आएगी और विदेशी कंपनियों के लिए भारत में बिज़नेस करना आसान हो जाएगा। इसे देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इन बदलावों से विदेशी निवेश बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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