UPI चार्ज = एक्स्ट्रा टैक्स! अशनीर ग्रोवर ने सरकार को चेतावनी दी – भारत कैश इकॉनमी में वापस आ सकता है
BharatPe के को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन पर फीस लगाने के केंद्र सरकार के कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने साफ कहा कि UPI पर कोई भी फीस लगाना जनता पर एक और टैक्स लगाने जैसा है।
ग्रोवर ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “अगर आप UPI पर पैसे चार्ज करना शुरू करते हैं, तो इसे टाटा, बाय-बाय कहना होगा। UPI का खेल वहीं खत्म हो जाएगा।”
केंद्र सरकार की तरफ से 14 सितंबर को जारी एक गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, RuPay कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन पर 2,000 रुपये तक कोई फीस नहीं ली जाएगी। हालांकि, 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर फीस लगने की संभावना है। लिमिट पर सवाल उठाते हुए ग्रोवर ने कहा, “सरकार कहती है कि 2,000 रुपये से ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन कुल ट्रांज़ैक्शन का सिर्फ़ 4 परसेंट हैं। लेकिन वैल्यू के हिसाब से, ये ट्रांज़ैक्शन कुल UPI वैल्यू का 66 परसेंट है। सरकार ने एक आसान नंबर ढूंढ लिया है ताकि लोगों से ज़्यादा पैसे जमा किए जा सकें। इस फ़ैसले के पीछे कोई लॉजिकल आधार नहीं है।”
क्या देश वापस कैश इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है?
ग्रोवर ने चेतावनी दी कि अगर बड़े ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या फ़ीस लगाई जाती है, तो दुकानदार और व्यापारी 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI पेमेंट लेने से मना कर देंगे और सिर्फ़ कैश मांगेंगे। अगर लोग कैश ट्रांज़ैक्शन पर वापस लौटते हैं, तो बैंकों को ज़्यादा ATM और ऑफ़िस खोलने पड़ेंगे। ATM चलाने और कैश संभालने का खर्च बहुत बढ़ जाएगा।
उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई 12,000 रुपये देना चाहता है, तो लोग फ़ीस बचाने के लिए 2,000 रुपये या 6,000 रुपये के छोटे ट्रांज़ैक्शन करेंगे।”
“कौन परेशान हो रहा है?”
ग्रोवर ने एक सीधा सवाल पूछा – “अगर RBI, बैंक और NPCI सभी बहुत ज़्यादा प्रॉफ़िट कमा रहे हैं, तो UPI की वजह से असल में किसे नुकसान हो रहा है? और सरकार उन्हें कौन सी सब्सिडी दे रही है जो वे अफ़ोर्ड नहीं कर सकते?”
दूसरी तरफ़, सरकार का कहना है कि UPI सिस्टम को ठीक से चलाने के लिए कुछ फ़ीस ज़रूरी है। साइबर सिक्योरिटी को मज़बूत करने और ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए बहुत ज़्यादा इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत है और यह खर्च सिर्फ़ सरकारी सब्सिडी से पूरा नहीं किया जा सकता।
MDR रेट्स UPI और सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमेटी तय करेगी, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) हेड कर रही है।
अशनीर ग्रोवर की आलोचना ने एक बार फिर UPI के लिए फ़ीस चार्ज करने के मुद्दे पर बहस छेड़ दी है।
BharatPe के को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन पर फीस लगाने के केंद्र सरकार के कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने साफ कहा कि UPI पर कोई भी फीस लगाना जनता पर एक और टैक्स लगाने जैसा है।
ग्रोवर ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “अगर आप UPI पर पैसे चार्ज करना शुरू करते हैं, तो इसे टाटा, बाय-बाय कहना होगा। UPI का खेल वहीं खत्म हो जाएगा।”
केंद्र सरकार की तरफ से 14 सितंबर को जारी एक गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, RuPay कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन पर 2,000 रुपये तक कोई फीस नहीं ली जाएगी। हालांकि, 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर फीस लगने की संभावना है। लिमिट पर सवाल उठाते हुए ग्रोवर ने कहा, “सरकार कहती है कि 2,000 रुपये से ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन कुल ट्रांज़ैक्शन का सिर्फ़ 4 परसेंट हैं। लेकिन वैल्यू के हिसाब से, ये ट्रांज़ैक्शन कुल UPI वैल्यू का 66 परसेंट है। सरकार ने एक आसान नंबर ढूंढ लिया है ताकि लोगों से ज़्यादा पैसे जमा किए जा सकें। इस फ़ैसले के पीछे कोई लॉजिकल आधार नहीं है।”
क्या देश वापस कैश इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है?
ग्रोवर ने चेतावनी दी कि अगर बड़े ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या फ़ीस लगाई जाती है, तो दुकानदार और व्यापारी 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI पेमेंट लेने से मना कर देंगे और सिर्फ़ कैश मांगेंगे। अगर लोग कैश ट्रांज़ैक्शन पर वापस लौटते हैं, तो बैंकों को ज़्यादा ATM और ऑफ़िस खोलने पड़ेंगे। ATM चलाने और कैश संभालने का खर्च बहुत बढ़ जाएगा।
उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई 12,000 रुपये देना चाहता है, तो लोग फ़ीस बचाने के लिए 2,000 रुपये या 6,000 रुपये के छोटे ट्रांज़ैक्शन करेंगे।”
“कौन परेशान हो रहा है?”
ग्रोवर ने एक सीधा सवाल पूछा – “अगर RBI, बैंक और NPCI सभी बहुत ज़्यादा प्रॉफ़िट कमा रहे हैं, तो UPI की वजह से असल में किसे नुकसान हो रहा है? और सरकार उन्हें कौन सी सब्सिडी दे रही है जो वे अफ़ोर्ड नहीं कर सकते?”
दूसरी तरफ़, सरकार का कहना है कि UPI सिस्टम को ठीक से चलाने के लिए कुछ फ़ीस ज़रूरी है। साइबर सिक्योरिटी को मज़बूत करने और ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए बहुत ज़्यादा इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत है और यह खर्च सिर्फ़ सरकारी सब्सिडी से पूरा नहीं किया जा सकता।
MDR रेट्स UPI और सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमेटी तय करेगी, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) हेड कर रही है।
अशनीर ग्रोवर की आलोचना ने एक बार फिर UPI के लिए फ़ीस चार्ज करने के मुद्दे पर बहस छेड़ दी है।
ग्रोवर ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “अगर आप UPI पर पैसे चार्ज करना शुरू करते हैं, तो इसे टाटा, बाय-बाय कहना होगा। UPI का खेल वहीं खत्म हो जाएगा।”
केंद्र सरकार की तरफ से 14 सितंबर को जारी एक गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, RuPay कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन पर 2,000 रुपये तक कोई फीस नहीं ली जाएगी। हालांकि, 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर फीस लगने की संभावना है। लिमिट पर सवाल उठाते हुए ग्रोवर ने कहा, “सरकार कहती है कि 2,000 रुपये से ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन कुल ट्रांज़ैक्शन का सिर्फ़ 4 परसेंट हैं। लेकिन वैल्यू के हिसाब से, ये ट्रांज़ैक्शन कुल UPI वैल्यू का 66 परसेंट है। सरकार ने एक आसान नंबर ढूंढ लिया है ताकि लोगों से ज़्यादा पैसे जमा किए जा सकें। इस फ़ैसले के पीछे कोई लॉजिकल आधार नहीं है।”
क्या देश वापस कैश इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है?
ग्रोवर ने चेतावनी दी कि अगर बड़े ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या फ़ीस लगाई जाती है, तो दुकानदार और व्यापारी 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI पेमेंट लेने से मना कर देंगे और सिर्फ़ कैश मांगेंगे। अगर लोग कैश ट्रांज़ैक्शन पर वापस लौटते हैं, तो बैंकों को ज़्यादा ATM और ऑफ़िस खोलने पड़ेंगे। ATM चलाने और कैश संभालने का खर्च बहुत बढ़ जाएगा।
उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई 12,000 रुपये देना चाहता है, तो लोग फ़ीस बचाने के लिए 2,000 रुपये या 6,000 रुपये के छोटे ट्रांज़ैक्शन करेंगे।”
“कौन परेशान हो रहा है?”
ग्रोवर ने एक सीधा सवाल पूछा – “अगर RBI, बैंक और NPCI सभी बहुत ज़्यादा प्रॉफ़िट कमा रहे हैं, तो UPI की वजह से असल में किसे नुकसान हो रहा है? और सरकार उन्हें कौन सी सब्सिडी दे रही है जो वे अफ़ोर्ड नहीं कर सकते?”
दूसरी तरफ़, सरकार का कहना है कि UPI सिस्टम को ठीक से चलाने के लिए कुछ फ़ीस ज़रूरी है। साइबर सिक्योरिटी को मज़बूत करने और ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए बहुत ज़्यादा इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत है और यह खर्च सिर्फ़ सरकारी सब्सिडी से पूरा नहीं किया जा सकता।
MDR रेट्स UPI और सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमेटी तय करेगी, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) हेड कर रही है।
अशनीर ग्रोवर की आलोचना ने एक बार फिर UPI के लिए फ़ीस चार्ज करने के मुद्दे पर बहस छेड़ दी है।
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