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“समानता और अनुशासन भूल रहे जश्न? कोर्ट ने समाज को चेतावनी दी”

नागपुर | 14 अप्रैल को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर जयंती के मौके पर संविधान चौक पर हुए प्रोग्राम से हुए बड़े पैमाने पर नॉइज़ पॉल्यूशन को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने ऑर्गनाइज़र और समाज को बाबासाहेब के विचारों से अवगत कराया और साफ़ किया कि बाबासाहेब कभी भी नॉइज़ पॉल्यूशन का सपोर्ट नहीं करते।
कोर्ट ने कहा कि बाबासाहेब की जयंती सिर्फ़ एक जश्न नहीं है, बल्कि उनके समानता, न्याय और सामाजिक बदलाव के विचारों को श्रद्धांजलि है। इसलिए, ऐसे प्रोग्राम में उनके सिद्धांतों को फैलाना ज़रूरी है, और सिर्फ़ तेज़ शोर, नारे और पटाखों से त्योहार मनाना सही नहीं है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बताया कि प्रोग्राम में तेज़ साउंड सिस्टम, नारे और पटाखों की वजह से नॉइज़ पॉल्यूशन कंट्रोल नियमों का उल्लंघन हुआ। इस पर कोर्ट ने ऑर्गनाइज़र को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है और पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन से नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है।
कोर्ट ने आगे साफ़ किया कि हर नागरिक को शांति से रहने का अधिकार है। तेज़ आवाज़ का बुज़ुर्गों, बीमार लोगों और छोटे बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इसका असर पक्षियों पर भी पड़ता है। इसलिए, बाबासाहेब की इस सोच को याद रखना ज़रूरी है कि "आज़ादी को ज़ुल्म में नहीं बदलना चाहिए"।
कोर्ट ने ऑर्गनाइज़र से एक सीधा सवाल पूछा कि क्या सच में बाबासाहेब की जयंती मनाते समय उनके सिद्धांतों का प्रचार किया जा रहा है? इस बारे में जवाब देने के लिए 9 जून तक की डेडलाइन दी गई है।

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