दिल्ली हाई कोर्ट के सौरव-आशुतोष को कड़े शब्द: 'CJP संगठन वही है, लेकिन मकसद बदल गया है'; ज़मानत अर्ज़ी पर सीधा सवाल
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर:- 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की ज्यूडिशियल कस्टडी बढ़ाने के आदेश के खिलाफ़ दायर अर्ज़ी पर बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने पिटीशनर्स को राहत देने से इनकार करते हुए संगठन के मकसद पर गंभीर कमेंट्स किए। कोर्ट ने कहा, "CJP संगठन वही है, लेकिन उसका मकसद बदल गया है। शुरू में यह एक स्टूडेंट मूवमेंट था और इसमें छोटे बच्चे भी शामिल होते थे। लेकिन अब मकसद अलग लगता है। लोग वही हैं, संगठन वही है, लेकिन मकसद लगातार बदल रहा है। जब आप पहली बार जुलाई में आए थे, तो मकसद अलग था।" 'आप Gen-Z नहीं हैं'
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पिटीशनर्स की उम्र पूछी। वकील अभिक चिमिनी ने कहा कि सौरव दास 27 साल के हैं और आशुतोष रांका 32 साल के हैं। जज ने कमेंट किया, “तो फिर आप Gen-Z तो हैं ही नहीं। 1997 के बाद पैदा हुई पीढ़ी को Gen-Z कहा जाता है। इसलिए, आप खुद को युवा स्टूडेंट प्रोटेस्टर नहीं कह सकते।” शांति भंग करने का शक
बेंच ने आगे कहा, “आप कौन हैं? आपका ऑर्गनाइज़ेशन क्या है और असली इरादा क्या है? ये सवाल तब ज़रूरी हो जाते हैं जब लॉ एंड ऑर्डर को खतरा हो या शांति भंग होने की संभावना हो। आप पहले ही शांति का बंधन तोड़ चुके हैं। यह एक और घटना है।” ‘लोगों को सुनाने के लिए कोर्ट में ज़िद न करें’
कोर्ट ने वकीलों को सलाह दी, “सिर्फ़ लोगों को सुनाने के लिए कोर्ट में बहस न करें। जब यह मामला आज जूनियर मजिस्ट्रेट के सामने आ रहा है, तो सीधे हाई कोर्ट क्यों भागें? अगर वहाँ दो या चार बजे फ़ैसला आपके पक्ष में आता है, तो मामला खत्म हो जाएगा। अगर कोई उलटा फ़ैसला आता है, तो आप रिविज़न कोर्ट आ सकते हैं या यहाँ वापस आ सकते हैं। अभी बहस न करें क्योंकि फ़ैसला हमेशा के लिए आपके ख़िलाफ़ जाएगा।” भले ही हाई कोर्ट दशहरा की छुट्टियों के कारण बंद है, वकीलों ने अर्जेंट सुनवाई की माँग की थी। सोमवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने दोनों की कस्टडी 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि दोनों की कस्टडी आज खत्म हो रही है और उन्हें आज SEM के सामने पेश किया जा रहा है और उन्हें नए ज़मानत देने का निर्देश दिया गया है। वकील चिमिनी ने तर्क दिया कि कस्टडी बढ़ाने का 19 अक्टूबर का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर है और व्यक्तिगत आज़ादी का उल्लंघन है। कोर्ट ने ज़मानत देने से गलत तरीके से मना कर दिया, जबकि कानूनी ज़मानत दी गई थी। (सोर्स: लोकमत)
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर:- 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की ज्यूडिशियल कस्टडी बढ़ाने के आदेश के खिलाफ़ दायर अर्ज़ी पर बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने पिटीशनर्स को राहत देने से इनकार करते हुए संगठन के मकसद पर गंभीर कमेंट्स किए। कोर्ट ने कहा, "CJP संगठन वही है, लेकिन उसका मकसद बदल गया है। शुरू में यह एक स्टूडेंट मूवमेंट था और इसमें छोटे बच्चे भी शामिल होते थे। लेकिन अब मकसद अलग लगता है। लोग वही हैं, संगठन वही है, लेकिन मकसद लगातार बदल रहा है। जब आप पहली बार जुलाई में आए थे, तो मकसद अलग था।" 'आप Gen-Z नहीं हैं'
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पिटीशनर्स की उम्र पूछी। वकील अभिक चिमिनी ने कहा कि सौरव दास 27 साल के हैं और आशुतोष रांका 32 साल के हैं। जज ने कमेंट किया, “तो फिर आप Gen-Z तो हैं ही नहीं। 1997 के बाद पैदा हुई पीढ़ी को Gen-Z कहा जाता है। इसलिए, आप खुद को युवा स्टूडेंट प्रोटेस्टर नहीं कह सकते।” शांति भंग करने का शक
बेंच ने आगे कहा, “आप कौन हैं? आपका ऑर्गनाइज़ेशन क्या है और असली इरादा क्या है? ये सवाल तब ज़रूरी हो जाते हैं जब लॉ एंड ऑर्डर को खतरा हो या शांति भंग होने की संभावना हो। आप पहले ही शांति का बंधन तोड़ चुके हैं। यह एक और घटना है।” ‘लोगों को सुनाने के लिए कोर्ट में ज़िद न करें’
कोर्ट ने वकीलों को सलाह दी, “सिर्फ़ लोगों को सुनाने के लिए कोर्ट में बहस न करें। जब यह मामला आज जूनियर मजिस्ट्रेट के सामने आ रहा है, तो सीधे हाई कोर्ट क्यों भागें? अगर वहाँ दो या चार बजे फ़ैसला आपके पक्ष में आता है, तो मामला खत्म हो जाएगा। अगर कोई उलटा फ़ैसला आता है, तो आप रिविज़न कोर्ट आ सकते हैं या यहाँ वापस आ सकते हैं। अभी बहस न करें क्योंकि फ़ैसला हमेशा के लिए आपके ख़िलाफ़ जाएगा।” भले ही हाई कोर्ट दशहरा की छुट्टियों के कारण बंद है, वकीलों ने अर्जेंट सुनवाई की माँग की थी। सोमवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने दोनों की कस्टडी 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि दोनों की कस्टडी आज खत्म हो रही है और उन्हें आज SEM के सामने पेश किया जा रहा है और उन्हें नए ज़मानत देने का निर्देश दिया गया है। वकील चिमिनी ने तर्क दिया कि कस्टडी बढ़ाने का 19 अक्टूबर का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर है और व्यक्तिगत आज़ादी का उल्लंघन है। कोर्ट ने ज़मानत देने से गलत तरीके से मना कर दिया, जबकि कानूनी ज़मानत दी गई थी। (सोर्स: लोकमत)
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पिटीशनर्स की उम्र पूछी। वकील अभिक चिमिनी ने कहा कि सौरव दास 27 साल के हैं और आशुतोष रांका 32 साल के हैं। जज ने कमेंट किया, “तो फिर आप Gen-Z तो हैं ही नहीं। 1997 के बाद पैदा हुई पीढ़ी को Gen-Z कहा जाता है। इसलिए, आप खुद को युवा स्टूडेंट प्रोटेस्टर नहीं कह सकते।” शांति भंग करने का शक
बेंच ने आगे कहा, “आप कौन हैं? आपका ऑर्गनाइज़ेशन क्या है और असली इरादा क्या है? ये सवाल तब ज़रूरी हो जाते हैं जब लॉ एंड ऑर्डर को खतरा हो या शांति भंग होने की संभावना हो। आप पहले ही शांति का बंधन तोड़ चुके हैं। यह एक और घटना है।” ‘लोगों को सुनाने के लिए कोर्ट में ज़िद न करें’
कोर्ट ने वकीलों को सलाह दी, “सिर्फ़ लोगों को सुनाने के लिए कोर्ट में बहस न करें। जब यह मामला आज जूनियर मजिस्ट्रेट के सामने आ रहा है, तो सीधे हाई कोर्ट क्यों भागें? अगर वहाँ दो या चार बजे फ़ैसला आपके पक्ष में आता है, तो मामला खत्म हो जाएगा। अगर कोई उलटा फ़ैसला आता है, तो आप रिविज़न कोर्ट आ सकते हैं या यहाँ वापस आ सकते हैं। अभी बहस न करें क्योंकि फ़ैसला हमेशा के लिए आपके ख़िलाफ़ जाएगा।” भले ही हाई कोर्ट दशहरा की छुट्टियों के कारण बंद है, वकीलों ने अर्जेंट सुनवाई की माँग की थी। सोमवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने दोनों की कस्टडी 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि दोनों की कस्टडी आज खत्म हो रही है और उन्हें आज SEM के सामने पेश किया जा रहा है और उन्हें नए ज़मानत देने का निर्देश दिया गया है। वकील चिमिनी ने तर्क दिया कि कस्टडी बढ़ाने का 19 अक्टूबर का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर है और व्यक्तिगत आज़ादी का उल्लंघन है। कोर्ट ने ज़मानत देने से गलत तरीके से मना कर दिया, जबकि कानूनी ज़मानत दी गई थी। (सोर्स: लोकमत)
.jpg)
