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पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बड़ा फैसला! वोटर्स को वोटिंग का अधिकार देने के लिए ट्रिब्यूनल से क्लीन चिट; सुप्रीम कोर्ट का खास आदेश

नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बैकग्राउंड में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह उन वोटर्स को वोटिंग का अधिकार देने के लिए एक सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट पब्लिश करे, जिनके नाम अपीलेट अथॉरिटी (ट्रिब्यूनल) ने वोटर लिस्ट से बाहर होने के खिलाफ इजाज़त दी है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने 13 अप्रैल, 2026 के अपने आदेश में साफ किया कि अपील के आदेशों को लागू करने के बाद रिवाइज्ड वोटर लिस्ट पब्लिश की जानी चाहिए, जिस पर 21 अप्रैल या 27 अप्रैल, 2026 (जैसा भी मामला हो) तक फैसला लिया जा सकता है। इसके लिए संविधान के आर्टिकल 142 के तहत खास शक्तियों का इस्तेमाल किया गया है।
हालांकि, बेंच ने यह भी साफ किया कि जिन वोटर्स की अपील अभी भी पेंडिंग हैं, उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 13 लोगों के एक ग्रुप की अर्जी पर सुनवाई करने से मना कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर हैं, उन्हें अपील अथॉरिटी के पास जाना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) कैंपेन के दौरान, कई वोटरों के नाम लिस्ट से बाहर कर दिए गए थे। इस प्रोसेस के खिलाफ कई अपील फाइल की गईं। कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने इस मकसद के लिए 19 अपील अथॉरिटी बनाई हैं, जिन पर हाई कोर्ट के पुराने चीफ जस्टिस और जजों की चेयरमैनशिप में काम किया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो फेज में होने हैं – 23 अप्रैल और 29 अप्रैल, 2026। जानकारों का मानना ​​है कि इन चुनावों से पहले एक सप्लीमेंट्री लिस्ट पब्लिश करके वैलिड वोटरों को शामिल करने का निर्देश वोटिंग प्रोसेस को और ट्रांसपेरेंट और इनक्लूसिव बनाने में मदद करेगा।

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