पुणे में टीचर्स की बड़ी रैली! 11 मई को एजुकेशन कमिश्नरेट पर बड़ा मार्च
पुणे/मालेगांव: महाराष्ट्र स्टेट जूनियर कॉलेज टीचर्स फेडरेशन ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र में जूनियर कॉलेज टीचर्स पर ग्रुप रिकग्निशन की दबाव वाली शर्तें थोपी जा रही हैं। इस पॉलिसी से राज्य में करीब 10 से 12 हज़ार और टीचर्स की नौकरी जाने का डर पैदा हो गया है।
एजुकेशन डिपार्टमेंट ने 15 मार्च, 2024 को ग्रुप रिकग्निशन के लिए नए क्राइटेरिया अनाउंस किए हैं। फेडरेशन ने दावा किया है कि इन क्राइटेरिया की वजह से हज़ारों जूनियर कॉलेज ग्रांट के लिए इनएलिजिबल हो जाएंगे और बड़ी संख्या में टीचिंग पोस्ट कम हो जाएंगी। प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में पहले ही हज़ारों टीचर्स जोड़े जा चुके हैं। अब कहा जा रहा है कि यही एक्सपेरिमेंट हायर सेकेंडरी लेवल पर भी किया जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों को बड़ी मार
नए नियमों के मुताबिक, एक क्लास में 120 स्टूडेंट्स और एक प्रैक्टिकल ग्रुप में 40 स्टूडेंट्स का इंतज़ाम किया गया है। इस बात पर एतराज़ जताया गया है कि इससे ग्रामीण, दूर-दराज और बहुजन कम्युनिटी के स्टूडेंट्स, खासकर लड़कियों के लिए पढ़ाई के मौके कम हो जाएंगे। 20 साल से ज़्यादा उम्र के स्टूडेंट्स को कोटे में न मानने और आदिवासी इलाकों में छूट खत्म करने की पॉलिसी का भी विरोध हो रहा है।
फेडरेशन ने 11 मई, 2026 को पुणे में एजुकेशन कमिश्नर के ऑफिस पर एक बड़ा मार्च निकालने का फैसला किया है। इस विरोध में राज्य भर से हज़ारों एडेड और पार्शियली एडेड टीचर हिस्सा लेंगे।
फेडरेशन के प्रेसिडेंट प्रो. डॉ. संजय शिंदे, जनरल सेक्रेटरी प्रो. लक्ष्मण रोडे, कोऑर्डिनेटर प्रो. मुकुंद अंढलकर ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इस चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया गया, तो भविष्य में और भी ज़ोरदार लड़ाई शुरू की जाएगी।
पुणे/मालेगांव: महाराष्ट्र स्टेट जूनियर कॉलेज टीचर्स फेडरेशन ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र में जूनियर कॉलेज टीचर्स पर ग्रुप रिकग्निशन की दबाव वाली शर्तें थोपी जा रही हैं। इस पॉलिसी से राज्य में करीब 10 से 12 हज़ार और टीचर्स की नौकरी जाने का डर पैदा हो गया है।
एजुकेशन डिपार्टमेंट ने 15 मार्च, 2024 को ग्रुप रिकग्निशन के लिए नए क्राइटेरिया अनाउंस किए हैं। फेडरेशन ने दावा किया है कि इन क्राइटेरिया की वजह से हज़ारों जूनियर कॉलेज ग्रांट के लिए इनएलिजिबल हो जाएंगे और बड़ी संख्या में टीचिंग पोस्ट कम हो जाएंगी। प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में पहले ही हज़ारों टीचर्स जोड़े जा चुके हैं। अब कहा जा रहा है कि यही एक्सपेरिमेंट हायर सेकेंडरी लेवल पर भी किया जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों को बड़ी मार
नए नियमों के मुताबिक, एक क्लास में 120 स्टूडेंट्स और एक प्रैक्टिकल ग्रुप में 40 स्टूडेंट्स का इंतज़ाम किया गया है। इस बात पर एतराज़ जताया गया है कि इससे ग्रामीण, दूर-दराज और बहुजन कम्युनिटी के स्टूडेंट्स, खासकर लड़कियों के लिए पढ़ाई के मौके कम हो जाएंगे। 20 साल से ज़्यादा उम्र के स्टूडेंट्स को कोटे में न मानने और आदिवासी इलाकों में छूट खत्म करने की पॉलिसी का भी विरोध हो रहा है।
फेडरेशन ने 11 मई, 2026 को पुणे में एजुकेशन कमिश्नर के ऑफिस पर एक बड़ा मार्च निकालने का फैसला किया है। इस विरोध में राज्य भर से हज़ारों एडेड और पार्शियली एडेड टीचर हिस्सा लेंगे।
फेडरेशन के प्रेसिडेंट प्रो. डॉ. संजय शिंदे, जनरल सेक्रेटरी प्रो. लक्ष्मण रोडे, कोऑर्डिनेटर प्रो. मुकुंद अंढलकर ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इस चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया गया, तो भविष्य में और भी ज़ोरदार लड़ाई शुरू की जाएगी।
एजुकेशन डिपार्टमेंट ने 15 मार्च, 2024 को ग्रुप रिकग्निशन के लिए नए क्राइटेरिया अनाउंस किए हैं। फेडरेशन ने दावा किया है कि इन क्राइटेरिया की वजह से हज़ारों जूनियर कॉलेज ग्रांट के लिए इनएलिजिबल हो जाएंगे और बड़ी संख्या में टीचिंग पोस्ट कम हो जाएंगी। प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में पहले ही हज़ारों टीचर्स जोड़े जा चुके हैं। अब कहा जा रहा है कि यही एक्सपेरिमेंट हायर सेकेंडरी लेवल पर भी किया जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों को बड़ी मार
नए नियमों के मुताबिक, एक क्लास में 120 स्टूडेंट्स और एक प्रैक्टिकल ग्रुप में 40 स्टूडेंट्स का इंतज़ाम किया गया है। इस बात पर एतराज़ जताया गया है कि इससे ग्रामीण, दूर-दराज और बहुजन कम्युनिटी के स्टूडेंट्स, खासकर लड़कियों के लिए पढ़ाई के मौके कम हो जाएंगे। 20 साल से ज़्यादा उम्र के स्टूडेंट्स को कोटे में न मानने और आदिवासी इलाकों में छूट खत्म करने की पॉलिसी का भी विरोध हो रहा है।
फेडरेशन ने 11 मई, 2026 को पुणे में एजुकेशन कमिश्नर के ऑफिस पर एक बड़ा मार्च निकालने का फैसला किया है। इस विरोध में राज्य भर से हज़ारों एडेड और पार्शियली एडेड टीचर हिस्सा लेंगे।
फेडरेशन के प्रेसिडेंट प्रो. डॉ. संजय शिंदे, जनरल सेक्रेटरी प्रो. लक्ष्मण रोडे, कोऑर्डिनेटर प्रो. मुकुंद अंढलकर ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इस चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया गया, तो भविष्य में और भी ज़ोरदार लड़ाई शुरू की जाएगी।
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