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जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम नहीं होने पर दिल्ली में धरना; नेशनल OBC फेडरेशन का फैसला

नागपुर: नेशनल OBC फेडरेशन ने जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अलग रजिस्ट्रेशन के लिए एक खास कॉलम रखने की मांग को लेकर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर या रामलीला मैदान में धरना देने का फैसला किया है।
विदर्भ के OBC नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की आज नागपुर में एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में आने वाले विरोध की दिशा तय की गई, जिसे नेशनल OBC फेडरेशन के नेशनल प्रेसिडेंट बबनराव तायवाड़े ने लीड किया। तायवाड़े ने बताया कि यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक अनुसूचित जाति (SCs) और अनुसूचित जनजाति (STs) की तरह जनगणना एप्लीकेशन फॉर्म में OBC के लिए एक अलग कॉलम शामिल नहीं किया जाता।
फेडरेशन का मानना ​​है कि OBC समुदाय की सही आबादी का पता लगाने के लिए जाति के हिसाब से जनगणना ज़रूरी है। अगर ऑफिशियल डेटा उपलब्ध होगा, तो सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक नीतियां बनाना संभव होगा। मीटिंग में कहा गया कि सिर्फ़ अंदाज़े के आधार पर पॉलिसी बनाने के बजाय OBC की ऑफिशियल आबादी सामने लाना ज़रूरी है।
राज्य में कई OBC संगठन और ग्रुप एक्टिव हैं और कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं। तायवाड़े ने सभी संगठनों, नेताओं और एक्टिविस्ट से अंदरूनी मतभेद भुलाकर एक साथ आने की अपील की। ​​दिल्ली में होने वाले आंदोलन को सिर्फ़ एक संगठन तक सीमित न रखकर, अलग-अलग संगठनों को एक साथ लाकर एक बड़ा रूप देने का पक्का इरादा जताया गया। इसके लिए राज्य में जनजागरूकता अभियान और ऑर्गेनाइज़ेशनल मीटिंग की तैयारी शुरू हो जाएगी।
तायवाड़े ने यह भी कहा कि इस आंदोलन को देशव्यापी बनाने के लिए 20 सितंबर को देश भर के OBC संगठनों की मीटिंग रखी गई है।
OBC की सही आबादी सामने आने पर ही उस समुदाय की ज़रूरतों के हिसाब से असरदार पॉलिसी बनाई जा सकती हैं, इसलिए नेशनल OBC फेडरेशन ने साफ़ किया है कि जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम की मांग सोशल जस्टिस के लिहाज़ से बहुत ज़रूरी है।

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