विद्यासागर जी का अस्थि संचय हुआ
-अस्थि कलश जमीन में दबाया जाएगा, उसी जगह बनेगी समाधि
-उत्तराधिकारी समय सागर 22 को पहुंचेंगे चंद्रगिरी
डोंगरगढ़। आचार्य विद्यासागर जी महाराज के महा समाधि में जाने के बाद मंगलवार को उनका अस्थि संचय किया गया। अस्थियों को शुद्धिकरण के बाद एक कलश में रखा गया है। आचार्य श्री शनिवार 17 फरवरी की रात 2:35 बजे महा समाधि में लीन हो गए थे। रविवार 18 फरवरी की दोपहर को उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया था।
जैन धर्म में अस्थियों को जल में विसर्जित नहीं किया जाता। आचार्य जी का अस्थि कलश जमीन में दबाया जाएगा। उसी जगह उनकी समाधि बनाई जाएगी। इससे पहले अंतिम संस्कार स्थल पर विद्यासागर जी के अनुयायी नारियल चढ़ाकर भभूति ले जा रहे थे। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों के लोग डोंगरगढ़ पहुंच रहे हैं।
मुनि समय सागर महाराज को गद्दी सौंपी जाएगी
आचार्य विद्यासागर जी ने 6 फरवरी को मुनि योग सागर से चर्चा करने के बाद आचार्य पद का त्याग कर दिया था। उन्होंने मुनि समय सागर जी महाराज को आचार्य पद देने की घोषणा की थी। मुनि समय सागर महाराज के चंद्रगिरी तीर्थ पहुंचने के बाद विधिवत तरीके से उन्हें आचार्य की गद्दी सौंपी जाएगी।
विद्यासागर जी के उत्तराधिकारी बनाए गए मुनि समय सागर महाराज मंगलवार को महाराष्ट्र के रावल वाड़ी पहुंच गए। वे 43 साधुओं के साथ पैदल यात्रा कर 22 फरवरी को बालाघाट से डोगरगढ़ पहुंचेंगे। वहां उन्हें विधिवत रूप से आचार्य की गद्दी सौंपी जाएगी।
देशभर से संतों के पहुंचने का सिलिसला जारी
जैन चंद्रगृह तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष किशोर कुमार जैन और प्रतिभा स्थली के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन ने बताया कि देशभर से सभी संत पद यात्रा कर आ रहे हैं। सोमवार 19 फरवरी को हुई विनयांजलि सभा में हस्तिनापुर के मठाधीश दिगंबर समाज के कीर्ति रविंद्र जैन पहुंचे। ये ज्ञानमती माता के भाई हैं।
विद्यासागर जी ने संघ और आचार्य पद छोड़ दिया था
विद्यासागर जी का इलाज कर रही टीम में 9 लोग थे। इसमें 2 नाड़ी वैद्य थे। आचार्य श्री ने 6 फरवरी को वैद्य से पूछा था कि उनके पास कितना वक्त है तो वैद्य ने बताया था कि नाड़ी बता रही कि अब उम्र ज्यादा नहीं बची है।
उसके बाद आचार्य श्री ने उसी दिन साथ के मुनियों को अलग भेजकर निर्यापक श्रवण मुनि योग सागर जी से चर्चा की और संघ संबंधी कार्यों से निवृत्ति ले ली। उसी दिन उन्होंने आचार्य पद त्यागकर समय सागर महाराज को आचार्य पद दे दिया था।
इसके बाद आचार्य विद्यासागर जी ने वसंत पंचमी के दिन से विधिवत सल्लेखणा धारण कर ली थी। जाग्रत अवस्था में रहते हुए उपवास ग्रहण कर उन्होंने आहार और संघ छोड़ दिया था। साथ ही अखंड मौन धारण कर लिया था।
-अस्थि कलश जमीन में दबाया जाएगा, उसी जगह बनेगी समाधि
-उत्तराधिकारी समय सागर 22 को पहुंचेंगे चंद्रगिरी
डोंगरगढ़। आचार्य विद्यासागर जी महाराज के महा समाधि में जाने के बाद मंगलवार को उनका अस्थि संचय किया गया। अस्थियों को शुद्धिकरण के बाद एक कलश में रखा गया है। आचार्य श्री शनिवार 17 फरवरी की रात 2:35 बजे महा समाधि में लीन हो गए थे। रविवार 18 फरवरी की दोपहर को उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया था।
जैन धर्म में अस्थियों को जल में विसर्जित नहीं किया जाता। आचार्य जी का अस्थि कलश जमीन में दबाया जाएगा। उसी जगह उनकी समाधि बनाई जाएगी। इससे पहले अंतिम संस्कार स्थल पर विद्यासागर जी के अनुयायी नारियल चढ़ाकर भभूति ले जा रहे थे। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों के लोग डोंगरगढ़ पहुंच रहे हैं।
मुनि समय सागर महाराज को गद्दी सौंपी जाएगी
आचार्य विद्यासागर जी ने 6 फरवरी को मुनि योग सागर से चर्चा करने के बाद आचार्य पद का त्याग कर दिया था। उन्होंने मुनि समय सागर जी महाराज को आचार्य पद देने की घोषणा की थी। मुनि समय सागर महाराज के चंद्रगिरी तीर्थ पहुंचने के बाद विधिवत तरीके से उन्हें आचार्य की गद्दी सौंपी जाएगी।
विद्यासागर जी के उत्तराधिकारी बनाए गए मुनि समय सागर महाराज मंगलवार को महाराष्ट्र के रावल वाड़ी पहुंच गए। वे 43 साधुओं के साथ पैदल यात्रा कर 22 फरवरी को बालाघाट से डोगरगढ़ पहुंचेंगे। वहां उन्हें विधिवत रूप से आचार्य की गद्दी सौंपी जाएगी।
देशभर से संतों के पहुंचने का सिलिसला जारी
जैन चंद्रगृह तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष किशोर कुमार जैन और प्रतिभा स्थली के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन ने बताया कि देशभर से सभी संत पद यात्रा कर आ रहे हैं। सोमवार 19 फरवरी को हुई विनयांजलि सभा में हस्तिनापुर के मठाधीश दिगंबर समाज के कीर्ति रविंद्र जैन पहुंचे। ये ज्ञानमती माता के भाई हैं।
विद्यासागर जी ने संघ और आचार्य पद छोड़ दिया था
विद्यासागर जी का इलाज कर रही टीम में 9 लोग थे। इसमें 2 नाड़ी वैद्य थे। आचार्य श्री ने 6 फरवरी को वैद्य से पूछा था कि उनके पास कितना वक्त है तो वैद्य ने बताया था कि नाड़ी बता रही कि अब उम्र ज्यादा नहीं बची है।
उसके बाद आचार्य श्री ने उसी दिन साथ के मुनियों को अलग भेजकर निर्यापक श्रवण मुनि योग सागर जी से चर्चा की और संघ संबंधी कार्यों से निवृत्ति ले ली। उसी दिन उन्होंने आचार्य पद त्यागकर समय सागर महाराज को आचार्य पद दे दिया था।
इसके बाद आचार्य विद्यासागर जी ने वसंत पंचमी के दिन से विधिवत सल्लेखणा धारण कर ली थी। जाग्रत अवस्था में रहते हुए उपवास ग्रहण कर उन्होंने आहार और संघ छोड़ दिया था। साथ ही अखंड मौन धारण कर लिया था।
-उत्तराधिकारी समय सागर 22 को पहुंचेंगे चंद्रगिरी
डोंगरगढ़। आचार्य विद्यासागर जी महाराज के महा समाधि में जाने के बाद मंगलवार को उनका अस्थि संचय किया गया। अस्थियों को शुद्धिकरण के बाद एक कलश में रखा गया है। आचार्य श्री शनिवार 17 फरवरी की रात 2:35 बजे महा समाधि में लीन हो गए थे। रविवार 18 फरवरी की दोपहर को उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया था।
जैन धर्म में अस्थियों को जल में विसर्जित नहीं किया जाता। आचार्य जी का अस्थि कलश जमीन में दबाया जाएगा। उसी जगह उनकी समाधि बनाई जाएगी। इससे पहले अंतिम संस्कार स्थल पर विद्यासागर जी के अनुयायी नारियल चढ़ाकर भभूति ले जा रहे थे। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों के लोग डोंगरगढ़ पहुंच रहे हैं।
मुनि समय सागर महाराज को गद्दी सौंपी जाएगी
आचार्य विद्यासागर जी ने 6 फरवरी को मुनि योग सागर से चर्चा करने के बाद आचार्य पद का त्याग कर दिया था। उन्होंने मुनि समय सागर जी महाराज को आचार्य पद देने की घोषणा की थी। मुनि समय सागर महाराज के चंद्रगिरी तीर्थ पहुंचने के बाद विधिवत तरीके से उन्हें आचार्य की गद्दी सौंपी जाएगी।
विद्यासागर जी के उत्तराधिकारी बनाए गए मुनि समय सागर महाराज मंगलवार को महाराष्ट्र के रावल वाड़ी पहुंच गए। वे 43 साधुओं के साथ पैदल यात्रा कर 22 फरवरी को बालाघाट से डोगरगढ़ पहुंचेंगे। वहां उन्हें विधिवत रूप से आचार्य की गद्दी सौंपी जाएगी।
देशभर से संतों के पहुंचने का सिलिसला जारी
जैन चंद्रगृह तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष किशोर कुमार जैन और प्रतिभा स्थली के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन ने बताया कि देशभर से सभी संत पद यात्रा कर आ रहे हैं। सोमवार 19 फरवरी को हुई विनयांजलि सभा में हस्तिनापुर के मठाधीश दिगंबर समाज के कीर्ति रविंद्र जैन पहुंचे। ये ज्ञानमती माता के भाई हैं।
विद्यासागर जी ने संघ और आचार्य पद छोड़ दिया था
विद्यासागर जी का इलाज कर रही टीम में 9 लोग थे। इसमें 2 नाड़ी वैद्य थे। आचार्य श्री ने 6 फरवरी को वैद्य से पूछा था कि उनके पास कितना वक्त है तो वैद्य ने बताया था कि नाड़ी बता रही कि अब उम्र ज्यादा नहीं बची है।
उसके बाद आचार्य श्री ने उसी दिन साथ के मुनियों को अलग भेजकर निर्यापक श्रवण मुनि योग सागर जी से चर्चा की और संघ संबंधी कार्यों से निवृत्ति ले ली। उसी दिन उन्होंने आचार्य पद त्यागकर समय सागर महाराज को आचार्य पद दे दिया था।
इसके बाद आचार्य विद्यासागर जी ने वसंत पंचमी के दिन से विधिवत सल्लेखणा धारण कर ली थी। जाग्रत अवस्था में रहते हुए उपवास ग्रहण कर उन्होंने आहार और संघ छोड़ दिया था। साथ ही अखंड मौन धारण कर लिया था।
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