क्या शिंदे का चीफ लीडर का पद जाएगा? ठाकरे ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में दी मज़बूत दलील
मुंबई/नई दिल्ली: शिवसेना पार्टी के सिंबल और नाम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में उद्धव ठाकरे ग्रुप के वकील, सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने एकनाथ शिंदे के 'चीफ लीडर' के पद पर बड़ा सवाल उठाया है।
सिब्बल ने कोर्ट से पूछा, "एकनाथ शिंदे ने किस संविधान के आधार पर चीफ लीडर का पद लिया?" पार्टी संविधान के संबंधित नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 1999 के बाद पार्टी संविधान में चीफ लीडर के पद को लेकर साफ़ नियम थे। ठाकरे ग्रुप ने दलील दी कि चूंकि शिंदे ग्रुप ने दलबदल करने के बाद यह पद स्वीकार किया, इसलिए पार्टी संविधान के नियमों के अनुसार यह अमान्य है।
इलेक्शन कमीशन सिर्फ़ एक ट्रिब्यूनल है
कपिल सिब्बल ने एक और ज़रूरी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन सिर्फ़ एक ट्रिब्यूनल है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसका पार्टी संविधान की वैधता के बारे में पार्टी संविधान के पैराग्राफ 15 से क्या लेना-देना है। ठाकरे ग्रुप ने दावा किया कि शिंदे ग्रुप ने पार्टी का सिंबल और नाम लेते समय पार्टी संविधान के ज़रूरी नियमों का उल्लंघन किया।
कोर्ट में ठाकरे ग्रुप की तरफ से पेश की गई दलीलों के मुताबिक, शिंदे की सबसे बड़ी गलती पार्टी बदलने के बाद चीफ लीडर का पद स्वीकार करना था। दावा किया गया कि 1999 के बाद पार्टी में लागू नियमों के हिसाब से यह पद स्वीकार करना मुमकिन नहीं था।
शिंदे ग्रुप ने भी इस सुनवाई में अपनी दलीलें पेश की हैं, और सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आखिरी फैसला देगा। शिवसेना पार्टी का सिंबल (धनुष और तीर) और नाम किसके पास रहेगा, इस पर फैसला अहम होगा।
मुंबई/नई दिल्ली: शिवसेना पार्टी के सिंबल और नाम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में उद्धव ठाकरे ग्रुप के वकील, सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने एकनाथ शिंदे के 'चीफ लीडर' के पद पर बड़ा सवाल उठाया है।
सिब्बल ने कोर्ट से पूछा, "एकनाथ शिंदे ने किस संविधान के आधार पर चीफ लीडर का पद लिया?" पार्टी संविधान के संबंधित नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 1999 के बाद पार्टी संविधान में चीफ लीडर के पद को लेकर साफ़ नियम थे। ठाकरे ग्रुप ने दलील दी कि चूंकि शिंदे ग्रुप ने दलबदल करने के बाद यह पद स्वीकार किया, इसलिए पार्टी संविधान के नियमों के अनुसार यह अमान्य है।
इलेक्शन कमीशन सिर्फ़ एक ट्रिब्यूनल है
कपिल सिब्बल ने एक और ज़रूरी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन सिर्फ़ एक ट्रिब्यूनल है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसका पार्टी संविधान की वैधता के बारे में पार्टी संविधान के पैराग्राफ 15 से क्या लेना-देना है। ठाकरे ग्रुप ने दावा किया कि शिंदे ग्रुप ने पार्टी का सिंबल और नाम लेते समय पार्टी संविधान के ज़रूरी नियमों का उल्लंघन किया।
कोर्ट में ठाकरे ग्रुप की तरफ से पेश की गई दलीलों के मुताबिक, शिंदे की सबसे बड़ी गलती पार्टी बदलने के बाद चीफ लीडर का पद स्वीकार करना था। दावा किया गया कि 1999 के बाद पार्टी में लागू नियमों के हिसाब से यह पद स्वीकार करना मुमकिन नहीं था।
शिंदे ग्रुप ने भी इस सुनवाई में अपनी दलीलें पेश की हैं, और सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आखिरी फैसला देगा। शिवसेना पार्टी का सिंबल (धनुष और तीर) और नाम किसके पास रहेगा, इस पर फैसला अहम होगा।
सिब्बल ने कोर्ट से पूछा, "एकनाथ शिंदे ने किस संविधान के आधार पर चीफ लीडर का पद लिया?" पार्टी संविधान के संबंधित नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 1999 के बाद पार्टी संविधान में चीफ लीडर के पद को लेकर साफ़ नियम थे। ठाकरे ग्रुप ने दलील दी कि चूंकि शिंदे ग्रुप ने दलबदल करने के बाद यह पद स्वीकार किया, इसलिए पार्टी संविधान के नियमों के अनुसार यह अमान्य है।
इलेक्शन कमीशन सिर्फ़ एक ट्रिब्यूनल है
कपिल सिब्बल ने एक और ज़रूरी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन सिर्फ़ एक ट्रिब्यूनल है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसका पार्टी संविधान की वैधता के बारे में पार्टी संविधान के पैराग्राफ 15 से क्या लेना-देना है। ठाकरे ग्रुप ने दावा किया कि शिंदे ग्रुप ने पार्टी का सिंबल और नाम लेते समय पार्टी संविधान के ज़रूरी नियमों का उल्लंघन किया।
कोर्ट में ठाकरे ग्रुप की तरफ से पेश की गई दलीलों के मुताबिक, शिंदे की सबसे बड़ी गलती पार्टी बदलने के बाद चीफ लीडर का पद स्वीकार करना था। दावा किया गया कि 1999 के बाद पार्टी में लागू नियमों के हिसाब से यह पद स्वीकार करना मुमकिन नहीं था।
शिंदे ग्रुप ने भी इस सुनवाई में अपनी दलीलें पेश की हैं, और सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आखिरी फैसला देगा। शिवसेना पार्टी का सिंबल (धनुष और तीर) और नाम किसके पास रहेगा, इस पर फैसला अहम होगा।
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