आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सिस्टम राज्य पुलिस को जांच में मदद करेगा
नागपुर, 23 जून: यह पक्का करने के लिए कि अपराधों की जांच बहुत सख्ती और ट्रांसपेरेंट तरीके से हो सके, जांच में गैर-ज़रूरी इंसानी दखल से बचा जा सके और केस को कानून की कसौटी पर खरा उतरने लायक मज़बूती से पेश किया जा सके, राज्य सरकार की स्पेशल पर्पस व्हीकल 'MARVEL' एक 'AI इन्वेस्टिगेशन प्लेटफॉर्म' यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड इन्वेस्टिगेशन सिस्टम डेवलप कर रही है। इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल शुरू में दो पुलिस यूनिट्स में पायलट बेसिस पर किया जाएगा और अनुभव को ध्यान में रखने के बाद ही इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
इस बारे में जानकारी मार्वल के CEO और नागपुर रूरल के पुलिस सुपरिटेंडेंट हर्ष पोद्दार ने दी। पोद्दार ने कहा कि 'AI इन्वेस्टिगेशन प्लेटफॉर्म' में पांच मुख्य फीचर्स होंगे। इसमें शिकायत करने वाले, पीड़ित या गवाह के ऑडियो-विजुअल बयान को लिखित रूप में बदलने की सुविधा होगी। यह सिस्टम अपने आप जांच के लिए एक खास रोडमैप बनाएगा, जिसे पुलिस फोर्स के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा जांच के संबंध में समय-समय पर दिए गए निर्देशों के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, यह सिस्टम केस मटीरियल की सिक्योरिटी और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगा, जिससे जांच में आने वाली दिक्कतों से बचा जा सकेगा। पोद्दार ने कहा कि चूंकि यह पूरा प्रोसेस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-बेस्ड सिस्टम के ज़रिए होगा, इसलिए यह मैनिपुलेशन और इंसानी दखल की दिक्कतों से बचकर ज़्यादा ट्रांसपेरेंट होगा। इससे पुलिस थानों में रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को तेज़ करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा, जांच के बाद कोर्ट में फाइल की गई चार्जशीट की स्क्रूटनी भी इसी सिस्टम से हो सकेगी।
जांच सिस्टम का सेंटरपीस
इस सिस्टम का सेंटरपीस एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-बेस्ड जांच असिस्टेंट, यानी ‘इन्वेस्टिगेशन कोपायलट’ होगा। इसके बारे में जानकारी देते हुए पुलिस सुपरिटेंडेंट पोद्दार ने कहा कि वह जांच अधिकारियों को क्राइम के नेचर के आधार पर जांच की दिशा, सबूतों के इवैल्यूएशन, मौजूदा कानूनों और स्टैंडर्ड पुलिस प्रोसीजर के बारे में गाइड करेंगे। वह चार्जशीट फाइल करने से पहले उसमें गलतियों को भी बताएंगे। डिजिटल, ऑडियो और फिजिकल तीनों तरह के सबूतों के लिए एक ब्लॉकचेन-बेस्ड ‘चेन ऑफ कस्टडी’ सिस्टम प्रपोज़ किया गया है। डिजिटल सबूतों के सुरक्षित रिकॉर्ड से लेकर ऑडियो सबूतों के असली सोर्स के साथ एक जैसा रहने और ज़ब्त की गई चीज़ों की हर हैंडलिंग का रिकॉर्ड इंसानी दखल से दूर रखने तक, पूरे प्रोसेस को बनाए रखने की कोशिश की गई है। पुलिस जांच के लिए ज़रूरी कई फीचर्स इस सिस्टम में शामिल किए जा रहे हैं। पोद्दार ने कहा कि यह पूरा सिस्टम महाराष्ट्र पुलिस के कंट्रोल में और राज्य में बनाए जाने वाले सुरक्षित और अलग इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करेगा। पोद्दार ने कहा कि जिन जिलों में यह प्रोजेक्ट पायलट बेसिस पर लागू किया जाएगा, उन्हें डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस का ऑफिस चुनेगा।
नागपुर, 23 जून: यह पक्का करने के लिए कि अपराधों की जांच बहुत सख्ती और ट्रांसपेरेंट तरीके से हो सके, जांच में गैर-ज़रूरी इंसानी दखल से बचा जा सके और केस को कानून की कसौटी पर खरा उतरने लायक मज़बूती से पेश किया जा सके, राज्य सरकार की स्पेशल पर्पस व्हीकल 'MARVEL' एक 'AI इन्वेस्टिगेशन प्लेटफॉर्म' यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड इन्वेस्टिगेशन सिस्टम डेवलप कर रही है। इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल शुरू में दो पुलिस यूनिट्स में पायलट बेसिस पर किया जाएगा और अनुभव को ध्यान में रखने के बाद ही इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
इस बारे में जानकारी मार्वल के CEO और नागपुर रूरल के पुलिस सुपरिटेंडेंट हर्ष पोद्दार ने दी। पोद्दार ने कहा कि 'AI इन्वेस्टिगेशन प्लेटफॉर्म' में पांच मुख्य फीचर्स होंगे। इसमें शिकायत करने वाले, पीड़ित या गवाह के ऑडियो-विजुअल बयान को लिखित रूप में बदलने की सुविधा होगी। यह सिस्टम अपने आप जांच के लिए एक खास रोडमैप बनाएगा, जिसे पुलिस फोर्स के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा जांच के संबंध में समय-समय पर दिए गए निर्देशों के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, यह सिस्टम केस मटीरियल की सिक्योरिटी और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगा, जिससे जांच में आने वाली दिक्कतों से बचा जा सकेगा। पोद्दार ने कहा कि चूंकि यह पूरा प्रोसेस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-बेस्ड सिस्टम के ज़रिए होगा, इसलिए यह मैनिपुलेशन और इंसानी दखल की दिक्कतों से बचकर ज़्यादा ट्रांसपेरेंट होगा। इससे पुलिस थानों में रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को तेज़ करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा, जांच के बाद कोर्ट में फाइल की गई चार्जशीट की स्क्रूटनी भी इसी सिस्टम से हो सकेगी।
जांच सिस्टम का सेंटरपीस
इस सिस्टम का सेंटरपीस एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-बेस्ड जांच असिस्टेंट, यानी ‘इन्वेस्टिगेशन कोपायलट’ होगा। इसके बारे में जानकारी देते हुए पुलिस सुपरिटेंडेंट पोद्दार ने कहा कि वह जांच अधिकारियों को क्राइम के नेचर के आधार पर जांच की दिशा, सबूतों के इवैल्यूएशन, मौजूदा कानूनों और स्टैंडर्ड पुलिस प्रोसीजर के बारे में गाइड करेंगे। वह चार्जशीट फाइल करने से पहले उसमें गलतियों को भी बताएंगे। डिजिटल, ऑडियो और फिजिकल तीनों तरह के सबूतों के लिए एक ब्लॉकचेन-बेस्ड ‘चेन ऑफ कस्टडी’ सिस्टम प्रपोज़ किया गया है। डिजिटल सबूतों के सुरक्षित रिकॉर्ड से लेकर ऑडियो सबूतों के असली सोर्स के साथ एक जैसा रहने और ज़ब्त की गई चीज़ों की हर हैंडलिंग का रिकॉर्ड इंसानी दखल से दूर रखने तक, पूरे प्रोसेस को बनाए रखने की कोशिश की गई है। पुलिस जांच के लिए ज़रूरी कई फीचर्स इस सिस्टम में शामिल किए जा रहे हैं। पोद्दार ने कहा कि यह पूरा सिस्टम महाराष्ट्र पुलिस के कंट्रोल में और राज्य में बनाए जाने वाले सुरक्षित और अलग इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करेगा। पोद्दार ने कहा कि जिन जिलों में यह प्रोजेक्ट पायलट बेसिस पर लागू किया जाएगा, उन्हें डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस का ऑफिस चुनेगा।
इस बारे में जानकारी मार्वल के CEO और नागपुर रूरल के पुलिस सुपरिटेंडेंट हर्ष पोद्दार ने दी। पोद्दार ने कहा कि 'AI इन्वेस्टिगेशन प्लेटफॉर्म' में पांच मुख्य फीचर्स होंगे। इसमें शिकायत करने वाले, पीड़ित या गवाह के ऑडियो-विजुअल बयान को लिखित रूप में बदलने की सुविधा होगी। यह सिस्टम अपने आप जांच के लिए एक खास रोडमैप बनाएगा, जिसे पुलिस फोर्स के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा जांच के संबंध में समय-समय पर दिए गए निर्देशों के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, यह सिस्टम केस मटीरियल की सिक्योरिटी और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगा, जिससे जांच में आने वाली दिक्कतों से बचा जा सकेगा। पोद्दार ने कहा कि चूंकि यह पूरा प्रोसेस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-बेस्ड सिस्टम के ज़रिए होगा, इसलिए यह मैनिपुलेशन और इंसानी दखल की दिक्कतों से बचकर ज़्यादा ट्रांसपेरेंट होगा। इससे पुलिस थानों में रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को तेज़ करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा, जांच के बाद कोर्ट में फाइल की गई चार्जशीट की स्क्रूटनी भी इसी सिस्टम से हो सकेगी।
जांच सिस्टम का सेंटरपीस
इस सिस्टम का सेंटरपीस एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-बेस्ड जांच असिस्टेंट, यानी ‘इन्वेस्टिगेशन कोपायलट’ होगा। इसके बारे में जानकारी देते हुए पुलिस सुपरिटेंडेंट पोद्दार ने कहा कि वह जांच अधिकारियों को क्राइम के नेचर के आधार पर जांच की दिशा, सबूतों के इवैल्यूएशन, मौजूदा कानूनों और स्टैंडर्ड पुलिस प्रोसीजर के बारे में गाइड करेंगे। वह चार्जशीट फाइल करने से पहले उसमें गलतियों को भी बताएंगे। डिजिटल, ऑडियो और फिजिकल तीनों तरह के सबूतों के लिए एक ब्लॉकचेन-बेस्ड ‘चेन ऑफ कस्टडी’ सिस्टम प्रपोज़ किया गया है। डिजिटल सबूतों के सुरक्षित रिकॉर्ड से लेकर ऑडियो सबूतों के असली सोर्स के साथ एक जैसा रहने और ज़ब्त की गई चीज़ों की हर हैंडलिंग का रिकॉर्ड इंसानी दखल से दूर रखने तक, पूरे प्रोसेस को बनाए रखने की कोशिश की गई है। पुलिस जांच के लिए ज़रूरी कई फीचर्स इस सिस्टम में शामिल किए जा रहे हैं। पोद्दार ने कहा कि यह पूरा सिस्टम महाराष्ट्र पुलिस के कंट्रोल में और राज्य में बनाए जाने वाले सुरक्षित और अलग इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करेगा। पोद्दार ने कहा कि जिन जिलों में यह प्रोजेक्ट पायलट बेसिस पर लागू किया जाएगा, उन्हें डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस का ऑफिस चुनेगा।
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