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सांगली एग्रीकल्चरल मार्केट कमेटी का तीन-तरफ़ा बंटवारा; बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स को टर्म खत्म होने से पहले ही बर्खास्त करना किसानों के साथ नाइंसाफ़ी — जयंत पाटिल

सांगली — राज्य सरकार ने सांगली एग्रीकल्चरल मार्केट कमेटी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स को उसके अभी भी काम करते हुए और उसका टर्म खत्म होने से पहले ही बर्खास्त करने का फ़ैसला किया है। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता और MLA जयंत पाटिल ने मंगलवार को सांगली में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फ़ैसले की कड़ी निंदा की।
जयंत पाटिल ने कहा, "सांगली मार्केट कमेटी देश की एक ज़रूरी मार्केट है। क्योंकि यह कर्नाटक बॉर्डर पर है, इसलिए यहाँ बड़ी मात्रा में खेती का सामान आता है। जाट और कवठे महांकाल मार्केट कमेटी भी इसी कमेटी के तहत आती हैं। तीनों तालुका के चुने हुए डायरेक्टर्स ने तालमेल बिठाकर अच्छा काम किया था। फिर भी सरकार ने बोर्ड को टर्म खत्म होने से पहले बर्खास्त करके लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन किया है।" उन्होंने आगे कहा, “मार्केट कमेटियों के बंटवारे (तीन हिस्सों में) से पहले डायरेक्टरों का अपना टर्म पूरा करना ज़रूरी था। मेन मार्केट और सब-मार्केट एक-दूसरे पर निर्भर हैं। इस फैसले से जाट और कवथेमहांकल के सूखा प्रभावित तालुकाओं में किसानों, कुलियों, व्यापारियों और कारोबारियों को बहुत नुकसान होगा।”
जयंत पाटिल ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई सिर्फ़ सांगली पर की गई है, जबकि राज्य की दूसरी मार्केट कमेटियों का बंटवारा अभी बाकी है। उनका मानना ​​है कि यह फैसला राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने आलोचना करते हुए कहा, “राज्य सरकार का यह रुख तानाशाही की ओर झुका हुआ है।”
जयंत पाटिल ने यह भी कहा कि बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में अपील की है और आने वाले दिनों में कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
बैकग्राउंड:
राज्य सरकार ने सांगली मार्केट कमेटी को तीन हिस्सों में बांटकर अलग-अलग मार्केट कमेटियां बनाने का फैसला किया है। इससे सांगली, जाट और कवथेमहांकल इलाके प्रभावित होंगे। जयंत पाटिल ने बताया कि सालों से तीनों तालुकाओं के डायरेक्टरों के तालमेल की वजह से कमेटी मज़बूत थी। डिस्ट्रिक्ट बैंक डायरेक्टर्स के लिए 10 साल की लिमिट के बारे में पूछे जाने पर जयंत पाटिल ने कहा, “सेंट्रल गवर्नमेंट का कानून राज्य में भी लागू हो गया है। लेकिन हमने चीफ मिनिस्टर देवेंद्र फडणवीस से रिक्वेस्ट की है कि वे वेस्टर्न महाराष्ट्र में कोऑपरेटिव सेक्टर की अलग स्थिति को देखते हुए छूट दें।”

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