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कौन हैं BJP की वह पूर्व प्रवक्ता? जिन्हें हाई कोर्ट जज बनाने की हुई सिफारिश; महाराष्ट्र में सवाल और बवाल

मुंबई: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 जुलाई को बॉम्बे हाई कोर्ट सहित छह विभिन्न हाई कोर्ट्स में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सिफारिश की थी। इसमें बॉम्बे हाई कोर्ट के लिए तीन अधिवक्ताओं—आरती अरुण साठे, अजीत भगवानराव कडेथांकर और सुशील मनोहर घोडेश्वर—के नाम शामिल थे। हालांकि, आरती अरुण साठे की सिफारिश ने महाराष्ट्र में विवाद खड़ा कर दिया है।
आरती अरुण साठे कौन हैं?
आरती अरुण साठे बॉम्बे हाई कोर्ट की अधिवक्ता हैं और 20 साल से अधिक समय से वकालत कर रही हैं। वे प्रत्यक्ष कर मामलों की विशेषज्ञ हैं और टैक्स विवादों, सेबी, प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (एसएटी), सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (सीईएसटीएटी) के साथ-साथ वैवाहिक विवादों में पैरवी करती रही हैं। साठे मुंबई भाजपा विधि प्रकोष्ठ की प्रमुख थीं और फरवरी 2023 में महाराष्ट्र भाजपा की प्रवक्ता नियुक्त की गई थीं। हालांकि, जनवरी 2024 में उन्होंने व्यक्तिगत और व्यावसायिक कारणों से प्रवक्ता पद और भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
उनके पिता, अरुण साठे, भी एक प्रसिद्ध वकील हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) तथा भाजपा से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं। वे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी रह चुके हैं।
NCP विधायक रोहित पवार ने उठाए सवाल
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने साठे की सिफारिश पर सवाल उठाते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े व्यक्ति की हाई कोर्ट जज के रूप में नियुक्ति लोकतंत्र और न्यायपालिका की निष्पक्षता के लिए खतरा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “न्यायाधीश का पद अत्यंत जिम्मेदारी वाला होता है। उसे निष्पक्ष होना चाहिए। सत्तारूढ़ दल से किसी को न्यायाधीश नियुक्त करना निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।” पवार ने यह भी मांग की कि साठे की सिफारिश पर पुनर्विचार किया जाए और मुख्य न्यायाधीश इस मामले में मार्गदर्शन प्रदान करें। हालांकि, उन्होंने साठे की योग्यता पर सवाल नहीं उठाया।
भाजपा ने आरोपों को बताया निराधार
महाराष्ट्र भाजपा ने पवार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि साठे की सिफारिश पूरी तरह योग्यता के आधार पर और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई है। राज्य भाजपा मीडिया प्रकोष्ठ के प्रभारी नवनाथ बान ने कहा, “आरती साठे ने कुछ साल पहले ही भाजपा प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका पार्टी से अब कोई संबंध नहीं है। उनकी योग्यता पर सवाल उठाने का कोई आधार नहीं है।”
विवाद की पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई कर रहे हैं, ने साठे सहित कई अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों के नाम हाई कोर्ट जज के लिए अनुशंसित किए थे। लेकिन साठे की पूर्व में भाजपा से संबद्धता के कारण उनकी सिफारिश पर सवाल उठ रहे हैं। यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मुद्दा बन गया है, जहां विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।

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