
मराठा आरक्षण पर फडणवीस का बड़ा खुलासा: जरांगे के बारे में क्या कहा?
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मनोज जरांगे पाटिल ने ओबीसी वर्ग से मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर फिर से विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने मराठा और ओबीसी आरक्षण के मुद्दे का कानूनी दायरे में समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने मनोज जरांगे पाटिल के विरोध प्रदर्शन को लेकर एक अहम बयान भी दिया है।
मराठा आरक्षण की मांग और सरकार की भूमिका
मनोज जरांगे पाटिल पिछले कुछ वर्षों से ओबीसी वर्ग से मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन, भूख हड़ताल और मार्च कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में, मराठा समुदाय ने मुंबई समेत पूरे राज्य में अपना विरोध प्रदर्शन तेज़ कर दिया है। इस साल, 29 अगस्त, 2025 को जरांगे ने मुंबई के आज़ाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने की घोषणा की है। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, "सरकार मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए कानूनी दायरे में काम कर रही है। हम किसी भी समुदाय के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि मराठा और ओबीसी समुदायों के बीच कोई दरार न पड़े।"
फडणवीस ने आगे कहा, "मराठा समुदाय की मांगों को कानून की कसौटी पर खरा उतरना होगा। अगर कोई मांग कानून की कसौटी पर खरी नहीं उतरती, तो वह अदालत में नहीं टिक पाएगी और समुदाय को इसके परिणाम भुगतने होंगे। इसलिए हम सभी पक्षों पर विचार करने के बाद ही कोई फैसला ले रहे हैं।"
जरांगे के आंदोलन पर फडणवीस की राय
मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा आरक्षण के लिए आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने अक्सर फडणवीस की आलोचना की है और सरकार पर आरक्षण देने में आनाकानी करने का आरोप लगाया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, फडणवीस ने कहा, "हम स्वीकार करते हैं कि जरांगे ने मराठा समुदाय के हित में विरोध प्रदर्शन किया है। लेकिन उनकी कुछ माँगें कानून के दायरे में नहीं आतीं। हमने उनसे बात करने की कोशिश की है। मैंने खुद उनसे बात की है और उन्हें समझाने की कोशिश की है।"
फडणवीस ने जरांगे के विरोध प्रदर्शन को लोकतंत्र का हिस्सा माना, लेकिन उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की। फडणवीस ने कहा, "विरोध प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इससे कानून-व्यवस्था बाधित नहीं होनी चाहिए। जरांगे ने गणेशोत्सव के दौरान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का वादा किया है और हम इसका स्वागत करते हैं।"
ओबीसी समुदाय की चिंताएँ
ओबीसी वर्ग से मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की माँग ने ओबीसी समुदाय में भी अशांति पैदा कर दी है। ओबीसी समुदाय के नेता और मंत्री छगन भुजबल ने मराठा आरक्षण का विरोध किया है। इस पर, फडणवीस ने कहा, "हम यह सुनिश्चित करेंगे कि मराठा समुदाय को आरक्षण देते समय ओबीसी समुदाय के साथ अन्याय न हो। दोनों समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार का कर्तव्य है।"
जरांगे का विरोध और बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
मनोज जरांगे ने 29 अगस्त को मुंबई में भूख हड़ताल की घोषणा की थी। हालाँकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें गणेशोत्सव की पृष्ठभूमि में विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जरांगे ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई और फडणवीस की आलोचना करते हुए कहा, "यह अब लोकतंत्र नहीं रहा। अंग्रेजों के जमाने में भी भूख हड़तालों पर रोक नहीं थी, लेकिन फडणवीस के दौर में ऐसा हो रहा है।"
फडणवीस ने इस आलोचना का जवाब देते हुए कहा, "हम किसी आंदोलन का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना ज़रूरी है। गणेशोत्सव महाराष्ट्र का एक प्रमुख त्योहार है और हम इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि इस दौरान कोई गड़बड़ी न हो।"
मराठा आरक्षण का इतिहास
मराठा आरक्षण का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में रहा है। 2014 में फडणवीस सरकार ने मराठा समुदाय को 16% आरक्षण दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में इस आरक्षण को रद्द कर दिया। इसके बाद, फडणवीस ने मराठा समुदाय को 10% अलग से आरक्षण दिया, लेकिन जरांगे ने ओबीसी वर्ग से आरक्षण की मांग जारी रखते हुए कहा कि यह आरक्षण अपर्याप्त है।
जरांगे ने मांग की है कि मराठा समुदाय को कुनबी प्रमाण पत्र दिया जाए, जिससे मराठों को ओबीसी श्रेणी के तहत लाभ मिल सके। इस पर फडणवीस ने कहा, "कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने के लिए उचित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। हम इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन सभी मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करना कानूनी रूप से संभव नहीं है।"
आगे क्या?
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मनोज जरांगे पाटिल ने ओबीसी वर्ग से मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर फिर से विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने मराठा और ओबीसी आरक्षण के मुद्दे का कानूनी दायरे में समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने मनोज जरांगे पाटिल के विरोध प्रदर्शन को लेकर एक अहम बयान भी दिया है।
मराठा आरक्षण की मांग और सरकार की भूमिका
मनोज जरांगे पाटिल पिछले कुछ वर्षों से ओबीसी वर्ग से मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन, भूख हड़ताल और मार्च कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में, मराठा समुदाय ने मुंबई समेत पूरे राज्य में अपना विरोध प्रदर्शन तेज़ कर दिया है। इस साल, 29 अगस्त, 2025 को जरांगे ने मुंबई के आज़ाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने की घोषणा की है। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, "सरकार मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए कानूनी दायरे में काम कर रही है। हम किसी भी समुदाय के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि मराठा और ओबीसी समुदायों के बीच कोई दरार न पड़े।"
फडणवीस ने आगे कहा, "मराठा समुदाय की मांगों को कानून की कसौटी पर खरा उतरना होगा। अगर कोई मांग कानून की कसौटी पर खरी नहीं उतरती, तो वह अदालत में नहीं टिक पाएगी और समुदाय को इसके परिणाम भुगतने होंगे। इसलिए हम सभी पक्षों पर विचार करने के बाद ही कोई फैसला ले रहे हैं।"
जरांगे के आंदोलन पर फडणवीस की राय
मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा आरक्षण के लिए आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने अक्सर फडणवीस की आलोचना की है और सरकार पर आरक्षण देने में आनाकानी करने का आरोप लगाया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, फडणवीस ने कहा, "हम स्वीकार करते हैं कि जरांगे ने मराठा समुदाय के हित में विरोध प्रदर्शन किया है। लेकिन उनकी कुछ माँगें कानून के दायरे में नहीं आतीं। हमने उनसे बात करने की कोशिश की है। मैंने खुद उनसे बात की है और उन्हें समझाने की कोशिश की है।"
फडणवीस ने जरांगे के विरोध प्रदर्शन को लोकतंत्र का हिस्सा माना, लेकिन उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की। फडणवीस ने कहा, "विरोध प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इससे कानून-व्यवस्था बाधित नहीं होनी चाहिए। जरांगे ने गणेशोत्सव के दौरान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का वादा किया है और हम इसका स्वागत करते हैं।"
ओबीसी समुदाय की चिंताएँ
ओबीसी वर्ग से मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की माँग ने ओबीसी समुदाय में भी अशांति पैदा कर दी है। ओबीसी समुदाय के नेता और मंत्री छगन भुजबल ने मराठा आरक्षण का विरोध किया है। इस पर, फडणवीस ने कहा, "हम यह सुनिश्चित करेंगे कि मराठा समुदाय को आरक्षण देते समय ओबीसी समुदाय के साथ अन्याय न हो। दोनों समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार का कर्तव्य है।"
जरांगे का विरोध और बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
मनोज जरांगे ने 29 अगस्त को मुंबई में भूख हड़ताल की घोषणा की थी। हालाँकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें गणेशोत्सव की पृष्ठभूमि में विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जरांगे ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई और फडणवीस की आलोचना करते हुए कहा, "यह अब लोकतंत्र नहीं रहा। अंग्रेजों के जमाने में भी भूख हड़तालों पर रोक नहीं थी, लेकिन फडणवीस के दौर में ऐसा हो रहा है।"
फडणवीस ने इस आलोचना का जवाब देते हुए कहा, "हम किसी आंदोलन का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना ज़रूरी है। गणेशोत्सव महाराष्ट्र का एक प्रमुख त्योहार है और हम इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि इस दौरान कोई गड़बड़ी न हो।"
मराठा आरक्षण का इतिहास
मराठा आरक्षण का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में रहा है। 2014 में फडणवीस सरकार ने मराठा समुदाय को 16% आरक्षण दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में इस आरक्षण को रद्द कर दिया। इसके बाद, फडणवीस ने मराठा समुदाय को 10% अलग से आरक्षण दिया, लेकिन जरांगे ने ओबीसी वर्ग से आरक्षण की मांग जारी रखते हुए कहा कि यह आरक्षण अपर्याप्त है।
जरांगे ने मांग की है कि मराठा समुदाय को कुनबी प्रमाण पत्र दिया जाए, जिससे मराठों को ओबीसी श्रेणी के तहत लाभ मिल सके। इस पर फडणवीस ने कहा, "कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने के लिए उचित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। हम इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन सभी मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करना कानूनी रूप से संभव नहीं है।"
आगे क्या?
मराठा आरक्षण की मांग और सरकार की भूमिका
मनोज जरांगे पाटिल पिछले कुछ वर्षों से ओबीसी वर्ग से मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन, भूख हड़ताल और मार्च कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में, मराठा समुदाय ने मुंबई समेत पूरे राज्य में अपना विरोध प्रदर्शन तेज़ कर दिया है। इस साल, 29 अगस्त, 2025 को जरांगे ने मुंबई के आज़ाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने की घोषणा की है। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, "सरकार मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए कानूनी दायरे में काम कर रही है। हम किसी भी समुदाय के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि मराठा और ओबीसी समुदायों के बीच कोई दरार न पड़े।"
फडणवीस ने आगे कहा, "मराठा समुदाय की मांगों को कानून की कसौटी पर खरा उतरना होगा। अगर कोई मांग कानून की कसौटी पर खरी नहीं उतरती, तो वह अदालत में नहीं टिक पाएगी और समुदाय को इसके परिणाम भुगतने होंगे। इसलिए हम सभी पक्षों पर विचार करने के बाद ही कोई फैसला ले रहे हैं।"
जरांगे के आंदोलन पर फडणवीस की राय
मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा आरक्षण के लिए आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने अक्सर फडणवीस की आलोचना की है और सरकार पर आरक्षण देने में आनाकानी करने का आरोप लगाया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, फडणवीस ने कहा, "हम स्वीकार करते हैं कि जरांगे ने मराठा समुदाय के हित में विरोध प्रदर्शन किया है। लेकिन उनकी कुछ माँगें कानून के दायरे में नहीं आतीं। हमने उनसे बात करने की कोशिश की है। मैंने खुद उनसे बात की है और उन्हें समझाने की कोशिश की है।"
फडणवीस ने जरांगे के विरोध प्रदर्शन को लोकतंत्र का हिस्सा माना, लेकिन उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की। फडणवीस ने कहा, "विरोध प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इससे कानून-व्यवस्था बाधित नहीं होनी चाहिए। जरांगे ने गणेशोत्सव के दौरान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का वादा किया है और हम इसका स्वागत करते हैं।"
ओबीसी समुदाय की चिंताएँ
ओबीसी वर्ग से मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की माँग ने ओबीसी समुदाय में भी अशांति पैदा कर दी है। ओबीसी समुदाय के नेता और मंत्री छगन भुजबल ने मराठा आरक्षण का विरोध किया है। इस पर, फडणवीस ने कहा, "हम यह सुनिश्चित करेंगे कि मराठा समुदाय को आरक्षण देते समय ओबीसी समुदाय के साथ अन्याय न हो। दोनों समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार का कर्तव्य है।"
जरांगे का विरोध और बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
मनोज जरांगे ने 29 अगस्त को मुंबई में भूख हड़ताल की घोषणा की थी। हालाँकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें गणेशोत्सव की पृष्ठभूमि में विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जरांगे ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई और फडणवीस की आलोचना करते हुए कहा, "यह अब लोकतंत्र नहीं रहा। अंग्रेजों के जमाने में भी भूख हड़तालों पर रोक नहीं थी, लेकिन फडणवीस के दौर में ऐसा हो रहा है।"
फडणवीस ने इस आलोचना का जवाब देते हुए कहा, "हम किसी आंदोलन का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना ज़रूरी है। गणेशोत्सव महाराष्ट्र का एक प्रमुख त्योहार है और हम इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि इस दौरान कोई गड़बड़ी न हो।"
मराठा आरक्षण का इतिहास
मराठा आरक्षण का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में रहा है। 2014 में फडणवीस सरकार ने मराठा समुदाय को 16% आरक्षण दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में इस आरक्षण को रद्द कर दिया। इसके बाद, फडणवीस ने मराठा समुदाय को 10% अलग से आरक्षण दिया, लेकिन जरांगे ने ओबीसी वर्ग से आरक्षण की मांग जारी रखते हुए कहा कि यह आरक्षण अपर्याप्त है।
जरांगे ने मांग की है कि मराठा समुदाय को कुनबी प्रमाण पत्र दिया जाए, जिससे मराठों को ओबीसी श्रेणी के तहत लाभ मिल सके। इस पर फडणवीस ने कहा, "कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने के लिए उचित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। हम इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन सभी मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करना कानूनी रूप से संभव नहीं है।"
आगे क्या?