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खडकवासला से फुरसुंगी सुरंग परियोजना को पर्यावरणीय मंज़ूरी मिली, पुणे की जल आपूर्ति में वृद्धि

पुणे, 28 अगस्त, 2025: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पुणे में खडकवासला बाँध और फुरसुंगी के बीच प्रस्तावित 28 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग परियोजना को आखिरकार हरी झंडी दे दी है। इस मंज़ूरी से पुणे की जल आपूर्ति और कृषि सिंचाई प्रणाली को काफ़ी बढ़ावा मिलेगा। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना मुथा नदी की दाहिनी नहर के विकल्प के रूप में विकसित की जाएगी, जिससे जल रिसाव, प्रदूषण और वाष्पीकरण कम होगा और लगभग 2.7 टीएमसी पानी की बचत होगी।
परियोजना की विशेषताएँ और उद्देश्य
यह सुरंग 7.8 मीटर चौड़ी, 3.9 मीटर ऊँची और 1.95 मीटर ऊँची एक गोलाकार खाई में बनाई जाएगी। इस 'डी' आकार की सुरंग की क्षमता 1,510 क्यूसेक होगी। इस योजना का उद्देश्य गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से खडकवासला बाँध से फुरसुंगी तक पानी पहुँचाना है। इससे पानी की बर्बादी रुकेगी और पुणे शहर तथा उसके आसपास के किसानों को नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता एच. वी. गुनाले ने बताया कि यह परियोजना लगभग 2,190 करोड़ रुपये की लागत से पूरी होगी।
यह परियोजना पुणे जिले की 3,472 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा, यह जल रिसाव और प्रदूषण को कम करके पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगी। यह सुरंग मौजूदा खुली नहर से पानी की बर्बादी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
परियोजना की यात्रा और अनुमोदन प्रक्रिया
खड़कवासला से फुरसुंगी सुरंग परियोजना की अवधारणा सबसे पहले 2018 में प्रस्तावित की गई थी। फिर 2022 में, जल संसाधन विभाग ने परियोजना की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की और उसे राज्य तकनीकी सलाहकार समिति को सौंप दिया। समिति द्वारा रिपोर्ट में कुछ छोटी-मोटी त्रुटियों को ठीक करने के बाद, परियोजना को 2023 में प्रारंभिक स्वीकृति मिल गई। हालाँकि, पर्यावरणीय मंज़ूरी के लिए केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया था, जो पिछले कुछ महीनों से लंबित था।
जून 2025 में इस परियोजना को पर्यावरणीय मंज़ूरी मिलने में कुछ रुकावटें आईं, लेकिन जुलाई 2025 में केंद्रीय जल समिति ने परियोजना स्थल का निरीक्षण किया और सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी। अब जबकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने अंतिम 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (एनओसी) दे दिया है, उम्मीद है कि परियोजना का वास्तविक कार्य जल्द ही शुरू हो जाएगा। पर्यावरण से संबंधित प्रारंभिक कार्य मार्च 2025 में शुरू हो गए थे, और अब पूर्ण मंज़ूरी मिलने से निर्माण कार्य में तेज़ी आएगी।
राजनीतिक अनुवर्तन और स्थानीय नेतृत्व
दौंड तालुका के विधायक राहुल कुल ने इस परियोजना को गति देने के लिए विशेष प्रयास किए। यह प्रस्ताव पिछले छह महीनों से मंत्रालय में अटका हुआ था। अंततः उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ एक बैठक में अधिकारियों ने परियोजना में तेज़ी लाने का निर्णय लिया। स्थानीय नेताओं और नागरिकों ने इस पर संतोष व्यक्त किया है।
परियोजना के लाभ और भविष्य के प्रभाव
इस परियोजना के पूरा होने के बाद, पुणे शहर को पेयजल की स्थिर आपूर्ति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। मौजूदा खुली नहर से पानी के रिसाव और वाष्पीकरण के कारण हर साल बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद होता है। यह सुरंग इस नुकसान को रोकेगी और पानी का कुशल उपयोग सुनिश्चित करेगी। इससे नहर में जल प्रदूषण की समस्या भी कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

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