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कोई समाधान नहीं, बातचीत बेनतीजा; मनोज जरांगे और सरकारी प्रतिनिधिमंडल के बीच तीखी बहस

मराठा आरक्षण विरोध अपडेट: मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा समुदाय को 'सागेसोयर' सहित ओबीसी कोटे से आरक्षण दिलाने की मांग को लेकर मुंबई के आज़ाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू कर दी है। आज (30 अगस्त) भूख हड़ताल का दूसरा दिन है और राज्य भर से हज़ारों मराठा प्रदर्शनकारी इस जगह पर एकत्रित हुए हैं। जरांगे पाटिल ने कड़ा रुख अपनाया है कि जब तक आरक्षण नहीं मिलता, वह भूख हड़ताल वापस नहीं लेंगे। इसलिए, राज्य सरकार इसका समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।
आज (शनिवार, 30 अगस्त) जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रतिनिधिमंडल के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इसमें संभागीय आयुक्त विजय सूर्यवंशी और पूर्व न्यायमूर्ति शिंदे शामिल थे। इस बैठक में दोनों पक्षों की ओर से ज़ोरदार दलीलों के कारण चर्चा गरमा गई।
चर्चा में वास्तव में क्या हुआ?
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए गए: सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस लेने में सकारात्मकता दिखाई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि गंभीर अपराधों को छोड़कर अन्य सभी मामले वापस ले लिए जाएँगे।
शहीद प्रदर्शनकारियों के परिवारों को नौकरी: सरकार ने राज्य परिवहन बोर्ड में आरक्षण के लिए अपनी जान गंवाने वाले 53 प्रदर्शनकारियों में से 23 को नौकरी देने की घोषणा की।
हैदराबाद राजपत्र और कुणबी प्रविष्टियाँ: हैदराबाद राजपत्र में ऐतिहासिक प्रविष्टियों पर चर्चा हुई। जरांगे पाटिल ने दृढ़ता से कहा कि मराठवाड़ा में मराठा समुदाय कुणबी है। सरकार ने अब तक की गई कुणबी प्रविष्टियों की जानकारी दी।
इस बैठक में जरांगे पाटिल ने सरकार से कई प्रतिप्रश्न पूछे। इसके बाद, सरकारी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समाधान पर पहुँचे लौट गया। मनोज जरांगे पाटिल अपनी भूख हड़ताल पर अड़े हुए हैं और उन्होंने तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। पूरे राज्य ने इस आंदोलन और इसके आगे के घटनाक्रम पर ध्यान दिया है।

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