अनिल अंबानी ग्रुप लोन केस: 73,000 करोड़ रुपये का ‘बड़ा घोटाला’; CBI ने सुप्रीम कोर्ट को दी चौंकाने वाली रिपोर्ट
मुंबई/नई दिल्ली, 7 अप्रैल, 2026: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने अनिल अंबानी के रिलायंस अंबानी एडल्ट ग्रुप (RAAG) के खिलाफ 73,006 करोड़ रुपये के बैंक लोन घोटाले का बड़ा दावा किया है। CBI ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी स्टेटस रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा किया है।
CBI ने कहा है कि सात अलग-अलग मामलों में एक्टिव जांच चल रही है। यह भी कहा गया है कि इन मामलों में कुछ सीनियर सरकारी अधिकारियों और कंपनी मैनेजमेंट के बीच मिलीभगत की संभावना है।
मुख्य आरोप क्या हैं?
ED (एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट) ने यह नतीजा निकाला है कि प्रोजेक्ट हेल्प नाम की एक स्कीम के ज़रिए इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी प्रोसीजर (IBC) प्रोसेस को लागू करके जानबूझकर और मिलीभगत करके बैंकों के करोड़ों रुपये डुबाने की कोशिश की गई थी।
एक मामले में, बैंकों का 2,983 करोड़ रुपये का दावा सिर्फ़ 26 करोड़ रुपये में निपटा दिया गया। पता चला है कि इसके लिए आठ प्राइवेट फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का इस्तेमाल किया गया था।
ऐसा कहा जा रहा है कि सरकारी बैंकों के अधिकारियों ने अंबानी ग्रुप को गलत फायदा पहुंचाने के लिए मिलीभगत की होगी।
23 मार्च, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED के सीनियर अधिकारियों को निर्देश दिया था कि दोनों एजेंसियां कोऑर्डिनेट करें और ट्रांसपेरेंट तरीके से और तय समय में जांच पूरी करें। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने जांच में देरी पर नाराजगी जताई थी।
अगली सुनवाई कब है?
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल, 2026 को होगी।
इस पर अभी तक अनिल अंबानी ग्रुप की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।
खास बातें:
कुल सात मामलों में जांच चल रही है
कुछ सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है
IBC प्रोसेस का गलत इस्तेमाल करके बैंकों को नुकसान
सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED को कोऑर्डिनेशन से काम करने का निर्देश दिया
इस स्कैम के सामने आने के बाद कॉर्पोरेट जगत में भारी हलचल मच गई है। उम्मीद है कि जांच ज़्यादा तेज़ी से और ट्रांसपेरेंट तरीके से की जाएगी।
मुंबई/नई दिल्ली, 7 अप्रैल, 2026: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने अनिल अंबानी के रिलायंस अंबानी एडल्ट ग्रुप (RAAG) के खिलाफ 73,006 करोड़ रुपये के बैंक लोन घोटाले का बड़ा दावा किया है। CBI ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी स्टेटस रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा किया है।
CBI ने कहा है कि सात अलग-अलग मामलों में एक्टिव जांच चल रही है। यह भी कहा गया है कि इन मामलों में कुछ सीनियर सरकारी अधिकारियों और कंपनी मैनेजमेंट के बीच मिलीभगत की संभावना है।
मुख्य आरोप क्या हैं?
ED (एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट) ने यह नतीजा निकाला है कि प्रोजेक्ट हेल्प नाम की एक स्कीम के ज़रिए इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी प्रोसीजर (IBC) प्रोसेस को लागू करके जानबूझकर और मिलीभगत करके बैंकों के करोड़ों रुपये डुबाने की कोशिश की गई थी।
एक मामले में, बैंकों का 2,983 करोड़ रुपये का दावा सिर्फ़ 26 करोड़ रुपये में निपटा दिया गया। पता चला है कि इसके लिए आठ प्राइवेट फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का इस्तेमाल किया गया था।
ऐसा कहा जा रहा है कि सरकारी बैंकों के अधिकारियों ने अंबानी ग्रुप को गलत फायदा पहुंचाने के लिए मिलीभगत की होगी।
23 मार्च, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED के सीनियर अधिकारियों को निर्देश दिया था कि दोनों एजेंसियां कोऑर्डिनेट करें और ट्रांसपेरेंट तरीके से और तय समय में जांच पूरी करें। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने जांच में देरी पर नाराजगी जताई थी।
अगली सुनवाई कब है?
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल, 2026 को होगी।
इस पर अभी तक अनिल अंबानी ग्रुप की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।
खास बातें:
कुल सात मामलों में जांच चल रही है
कुछ सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है
IBC प्रोसेस का गलत इस्तेमाल करके बैंकों को नुकसान
सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED को कोऑर्डिनेशन से काम करने का निर्देश दिया
इस स्कैम के सामने आने के बाद कॉर्पोरेट जगत में भारी हलचल मच गई है। उम्मीद है कि जांच ज़्यादा तेज़ी से और ट्रांसपेरेंट तरीके से की जाएगी।
CBI ने कहा है कि सात अलग-अलग मामलों में एक्टिव जांच चल रही है। यह भी कहा गया है कि इन मामलों में कुछ सीनियर सरकारी अधिकारियों और कंपनी मैनेजमेंट के बीच मिलीभगत की संभावना है।
मुख्य आरोप क्या हैं?
ED (एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट) ने यह नतीजा निकाला है कि प्रोजेक्ट हेल्प नाम की एक स्कीम के ज़रिए इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी प्रोसीजर (IBC) प्रोसेस को लागू करके जानबूझकर और मिलीभगत करके बैंकों के करोड़ों रुपये डुबाने की कोशिश की गई थी।
एक मामले में, बैंकों का 2,983 करोड़ रुपये का दावा सिर्फ़ 26 करोड़ रुपये में निपटा दिया गया। पता चला है कि इसके लिए आठ प्राइवेट फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का इस्तेमाल किया गया था।
ऐसा कहा जा रहा है कि सरकारी बैंकों के अधिकारियों ने अंबानी ग्रुप को गलत फायदा पहुंचाने के लिए मिलीभगत की होगी।
23 मार्च, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED के सीनियर अधिकारियों को निर्देश दिया था कि दोनों एजेंसियां कोऑर्डिनेट करें और ट्रांसपेरेंट तरीके से और तय समय में जांच पूरी करें। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने जांच में देरी पर नाराजगी जताई थी।
अगली सुनवाई कब है?
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल, 2026 को होगी।
इस पर अभी तक अनिल अंबानी ग्रुप की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।
खास बातें:
कुल सात मामलों में जांच चल रही है
कुछ सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है
IBC प्रोसेस का गलत इस्तेमाल करके बैंकों को नुकसान
सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED को कोऑर्डिनेशन से काम करने का निर्देश दिया
इस स्कैम के सामने आने के बाद कॉर्पोरेट जगत में भारी हलचल मच गई है। उम्मीद है कि जांच ज़्यादा तेज़ी से और ट्रांसपेरेंट तरीके से की जाएगी।
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