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बिजली बिल का बकाया 1 लाख 3 हज़ार करोड़ रुपये; खेती वाले ग्राहकों से 80 हज़ार करोड़ रुपये की रिकवरी बाकी

महाराष्ट्र में बिजली के बकाए का पहाड़: ग्राहकों पर 1.03 लाख करोड़ रुपये, किसानों पर 80 हज़ार करोड़ रुपये
महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (महावितरण) के बिजली बिलों का बकाया काफी बढ़ गया है। पता चला है कि राज्य में अलग-अलग कैटेगरी के बिजली ग्राहकों पर कुल 1 लाख 3 हज़ार करोड़ रुपये का बकाया है। इसमें से खेती वाले (एग्रीकल्चरल पंप) ग्राहकों पर करीब 80 हज़ार करोड़ रुपये का बकाया है।
महावितरण के डेटा के मुताबिक, कुल बकाए में प्रिंसिपल अमाउंट और उस पर लगने वाला इंटरेस्ट और पेनल्टी शामिल है। पिछले डेटा (2024 तक) में बकाया करीब 89 हज़ार करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जो अब और बढ़कर 1.03 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
खास बातें:
खेती वाले ग्राहकों का बकाया: किसानों पर बिजली बिलों का बकाया सबसे ज़्यादा है। देखा गया है कि कई किसानों ने 5 से 15 साल से अपने बिल नहीं भरे हैं।
दूसरे कंज्यूमर: घरेलू, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल वगैरह कैटेगरी के कंज्यूमर पर भी बड़ी रकम का बकाया है।
नतीजा: इन बकायों की वजह से महावितरण कंपनी पर फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ गया है। कंपनी को बिजली खरीदने, उसका मेंटेनेंस करने और नई स्कीम लागू करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
बकाया वसूलने के लिए सरकार और महावितरण कई तरह के कदम उठा रहे हैं। इनमें स्मार्ट मीटर के ज़रिए रिमोट डिस्कनेक्शन, रिकवरी कैंपेन और किसानों के लिए खास स्कीम शामिल हैं। हालांकि, किसान समुदाय पर बकाया होने की वजह से बिजली की कीमतों को कंट्रोल में रखना और कंपनी के नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो रहा है।
महावितरण ने कंज्यूमर से अपील की है कि वे अपने बिल समय पर भरें। बकाएदारों पर कार्रवाई की जा रही है, और कुछ जगहों पर बिजली सप्लाई काटी जा रही है।

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