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“बराबरी के लिए वारकरी आंदोलन में भी 60 परसेंट लोग कट्टरपंथी ताकतों को ताकत दे रहे हैं” - शरद पवार

नई दिल्ली: नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार ग्रुप) के प्रेसिडेंट शरद पवार ने वारकरी पंथ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “वारकरी पंथ में रिएक्शनरी सोच वाले लोग घुस गए हैं। जिस तरह से इस पंथ के 60 परसेंट लोग कट्टरपंथी ताकतों को ताकत दे रहे हैं।”
शरद पवार ने यह बात ऑल इंडिया मराठी लिटरेचर कॉन्फ्रेंस ऑफ गवर्नमेंट वुमन ऑफिसर्स के संस्मरण में छपे एक इंटरव्यू में कही। उन्होंने कहा, “वारकरी पंथ जैसे बराबरी के आंदोलन में भी रिएक्शनरी लोग घुसने लगे हैं। बोलते समय वे खुद को ऐसे पेश करते हैं जिससे कट्टरपंथी ताकतों को और ताकत मिलती है।”
पवार ने आगे कहा, “इसलिए हमने अब लिस्ट तैयार करना शुरू कर दिया है। अभी, करीब 40 लोग हैं जो कीर्तन और प्रवचन के ज़रिए प्रोग्रेसिव सोच रखते हैं। उनकी बहुत ज़रूरत है। बदकिस्मती से, ज्ञान के इस रास्ते पर महिलाएं कहीं नहीं दिखतीं।” इस बयान से राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। रिएक्शन: महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री संजय शिरसाट ने शरद पवार के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "वरकरी समुदाय में कई जातियों के लोग हैं। कोई भी एक जाति का नहीं है। हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश हो रही है। शरद पवार को हिंदू समुदाय की ताकत को बांटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।" दूसरी ओर, MLA अमोल मिटकरी ने शरद पवार के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "पवार ने क्या गलत कहा? उन्होंने जो विचार बताए हैं, वे सही हैं। यह संख्या 60 प्रतिशत से ज़्यादा है। जो लोग अब चिल्ला रहे हैं, वे नाबालिग लड़कियों पर अत्याचार की घटनाओं पर चुप क्यों रहे?" मिटकरी ने अशोक खराट, गुंजल महाराज और अलंदी की घटनाओं का ज़िक्र करके शरद पवार के आंकड़ों को और वज़न दिया। शरद पवार के बयान ने वरकरी समुदाय के प्रोग्रेसिव और रिग्रेसिव विचारों पर एक नई बहस छेड़ दी है। इस बारे में और भी रिएक्शन आ रहे हैं, और राजनीतिक माहौल गर्म होता दिख रहा है।

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