जवानी में साइलेंट किलर! हरियाणा में 6 साल में हार्ट अटैक से 18 हज़ार मौतें,
जवानी में साइलेंट किलर! हरियाणा में 6 साल में हार्ट अटैक से 18 हज़ार मौतें, 2020 से 2026 तक के आंकड़े चौंकाने वाले; कल से कोरोना बढ़ा है, फिर भी सरकार ने कोई जांच नहीं की
चंडीगढ़/हरियाणा, 20 मार्च 2026: हरियाणा विधानसभा में बुधवार को एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य सरकार की ओर से सदन में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2020 से जनवरी 2026 तक 6 सालों में 18 से 45 साल के 17,973 युवाओं की हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर से मौत हुई है। यह आंकड़ा हर दिन औसतन लगभग 8 मौतों का दिखाता है, जो युवा पीढ़ी के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करता है।
यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने सदन में कांग्रेस विधायकों (जुलाना से विनेश फोगट सहित) के एक लिखित सवाल के जवाब में दी। साल-दर-साल मौतों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है:
2020: 2,394 मौतें
2021: 3,188 मौतें
2022: 2,796 मौतें
2023: 2,886 मौतें
2024: 3,063 मौतें
2025: 3,255 मौतें (सबसे ज़्यादा)
जनवरी 2026: 391 मौतें
कुल: 17,973 (लगभग 18,000)
विपक्षी विधायकों ने इन मौतों के बीच कोरोना संक्रमण या कोविड-19 वैक्सीन के संभावित लिंक पर सवाल उठाए, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई स्टडी या सर्वे नहीं किया गया है। जिलेवार आंकड़े भी पेश किए गए, जिसमें कुछ जिलों में मौतों की संख्या काफी ज़्यादा दिखाई गई।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के पीछे स्ट्रेस, अनहेल्दी लाइफस्टाइल, प्रदूषण, एक्सरसाइज की कमी, स्मोकिंग, जंक फूड और कोविड के बाद के असर जैसे फैक्टर हो सकते हैं। 2022 से मौतों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी गई है, जो कोरोना के बाद के हालात को दिखाती है।
चिंताएं और सावधानियां:
हार्ट अटैक युवा पीढ़ी का 'साइलेंट किलर' बन गया है।
रेगुलर हेल्थ चेकअप, एक्सरसाइज़, बैलेंस्ड डाइट और स्ट्रेस मैनेजमेंट की सलाह।
सरकार से मांग है कि मौत के कारणों पर गहराई से स्टडी की जाए और जागरूकता कैंपेन चलाया जाए।
ये आंकड़े हरियाणा में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी जैसे हैं। डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने युवाओं से अपील की है कि वे तुरंत अपनी लाइफस्टाइल बदलें, ताकि इस ट्रेंड को रोका जा सके।
जवानी में साइलेंट किलर! हरियाणा में 6 साल में हार्ट अटैक से 18 हज़ार मौतें, 2020 से 2026 तक के आंकड़े चौंकाने वाले; कल से कोरोना बढ़ा है, फिर भी सरकार ने कोई जांच नहीं की
चंडीगढ़/हरियाणा, 20 मार्च 2026: हरियाणा विधानसभा में बुधवार को एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य सरकार की ओर से सदन में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2020 से जनवरी 2026 तक 6 सालों में 18 से 45 साल के 17,973 युवाओं की हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर से मौत हुई है। यह आंकड़ा हर दिन औसतन लगभग 8 मौतों का दिखाता है, जो युवा पीढ़ी के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करता है।
यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने सदन में कांग्रेस विधायकों (जुलाना से विनेश फोगट सहित) के एक लिखित सवाल के जवाब में दी। साल-दर-साल मौतों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है:
2020: 2,394 मौतें
2021: 3,188 मौतें
2022: 2,796 मौतें
2023: 2,886 मौतें
2024: 3,063 मौतें
2025: 3,255 मौतें (सबसे ज़्यादा)
जनवरी 2026: 391 मौतें
कुल: 17,973 (लगभग 18,000)
विपक्षी विधायकों ने इन मौतों के बीच कोरोना संक्रमण या कोविड-19 वैक्सीन के संभावित लिंक पर सवाल उठाए, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई स्टडी या सर्वे नहीं किया गया है। जिलेवार आंकड़े भी पेश किए गए, जिसमें कुछ जिलों में मौतों की संख्या काफी ज़्यादा दिखाई गई।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के पीछे स्ट्रेस, अनहेल्दी लाइफस्टाइल, प्रदूषण, एक्सरसाइज की कमी, स्मोकिंग, जंक फूड और कोविड के बाद के असर जैसे फैक्टर हो सकते हैं। 2022 से मौतों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी गई है, जो कोरोना के बाद के हालात को दिखाती है।
चिंताएं और सावधानियां:
हार्ट अटैक युवा पीढ़ी का 'साइलेंट किलर' बन गया है।
रेगुलर हेल्थ चेकअप, एक्सरसाइज़, बैलेंस्ड डाइट और स्ट्रेस मैनेजमेंट की सलाह।
सरकार से मांग है कि मौत के कारणों पर गहराई से स्टडी की जाए और जागरूकता कैंपेन चलाया जाए।
ये आंकड़े हरियाणा में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी जैसे हैं। डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने युवाओं से अपील की है कि वे तुरंत अपनी लाइफस्टाइल बदलें, ताकि इस ट्रेंड को रोका जा सके।
चंडीगढ़/हरियाणा, 20 मार्च 2026: हरियाणा विधानसभा में बुधवार को एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य सरकार की ओर से सदन में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2020 से जनवरी 2026 तक 6 सालों में 18 से 45 साल के 17,973 युवाओं की हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर से मौत हुई है। यह आंकड़ा हर दिन औसतन लगभग 8 मौतों का दिखाता है, जो युवा पीढ़ी के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करता है।
यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने सदन में कांग्रेस विधायकों (जुलाना से विनेश फोगट सहित) के एक लिखित सवाल के जवाब में दी। साल-दर-साल मौतों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है:
2020: 2,394 मौतें
2021: 3,188 मौतें
2022: 2,796 मौतें
2023: 2,886 मौतें
2024: 3,063 मौतें
2025: 3,255 मौतें (सबसे ज़्यादा)
जनवरी 2026: 391 मौतें
कुल: 17,973 (लगभग 18,000)
विपक्षी विधायकों ने इन मौतों के बीच कोरोना संक्रमण या कोविड-19 वैक्सीन के संभावित लिंक पर सवाल उठाए, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई स्टडी या सर्वे नहीं किया गया है। जिलेवार आंकड़े भी पेश किए गए, जिसमें कुछ जिलों में मौतों की संख्या काफी ज़्यादा दिखाई गई।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के पीछे स्ट्रेस, अनहेल्दी लाइफस्टाइल, प्रदूषण, एक्सरसाइज की कमी, स्मोकिंग, जंक फूड और कोविड के बाद के असर जैसे फैक्टर हो सकते हैं। 2022 से मौतों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी गई है, जो कोरोना के बाद के हालात को दिखाती है।
चिंताएं और सावधानियां:
हार्ट अटैक युवा पीढ़ी का 'साइलेंट किलर' बन गया है।
रेगुलर हेल्थ चेकअप, एक्सरसाइज़, बैलेंस्ड डाइट और स्ट्रेस मैनेजमेंट की सलाह।
सरकार से मांग है कि मौत के कारणों पर गहराई से स्टडी की जाए और जागरूकता कैंपेन चलाया जाए।
ये आंकड़े हरियाणा में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी जैसे हैं। डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने युवाओं से अपील की है कि वे तुरंत अपनी लाइफस्टाइल बदलें, ताकि इस ट्रेंड को रोका जा सके।
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