राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिकता केस: बड़ा ट्विस्ट!
राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिकता केस: बड़ा ट्विस्ट! हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार, होम मिनिस्ट्री की फाइल में क्या है? MP की पोस्ट खतरे में?
लखनऊ, 20 मार्च, 2026: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता (भारतीय और ब्रिटिश) के मामले में केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। जस्टिस राजीव सिंह की बेंच ने गृह मंत्रालय को राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े सभी रिकॉर्ड और डॉक्यूमेंट तुरंत जमा करने का आदेश दिया है। इस मामले में गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े बहुत ज़रूरी डॉक्यूमेंट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपे हैं, जिनकी कोर्ट ने जांच शुरू कर दी है।
यह मामला कर्नाटक BJP कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका से शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में रजिस्टर्ड एक कंपनी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स में (2005-2009 के दौरान) खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता अमान्य हो सकती है क्योंकि भारतीय कानून के तहत दोहरी नागरिकता की इजाज़त नहीं है। इससे पहले लखनऊ की स्पेशल MP-MLA कोर्ट ने यह पिटीशन खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की गई थी।
9 मार्च, 2026 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकीलों से पूछा कि राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता की शिकायत पर होम मिनिस्ट्री ने अब तक क्या एक्शन लिया है? इसके बाद कोर्ट ने होम मिनिस्ट्री के सिटीजनशिप विंग और फॉरेन डिपार्टमेंट की पूरी फाइल, ब्रिटिश सरकार के साथ हुए कॉरेस्पोंडेंस समेत सभी डॉक्यूमेंट्स जमा करने का निर्देश दिया। होम मिनिस्ट्री ने इस बारे में 2019 में राहुल गांधी को नोटिस जारी किया था, कोर्ट ने उसके रिकॉर्ड भी देखे।
खास बातें:
राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता का आरोप; कंपनी के डॉक्यूमेंट्स में ब्रिटिश के तौर पर दर्ज।
भारत के संविधान के आर्टिकल 9 और सिटीजनशिप एक्ट के तहत दोहरी नागरिकता गैर-कानूनी है।
होम मिनिस्ट्री ने सीलबंद लिफाफे में स्पेशल डॉक्यूमेंट्स जमा किए; कोर्ट ने अपनी जांच शुरू कर दी।
अगली सुनवाई 19 मार्च, 2026 को है; इसके बाद कोई बड़ा फैसला आने की उम्मीद है।
पिटीशनर ने FIR दर्ज करने और CBI जांच की मांग की है।
इस केस ने पॉलिटिकल गलियारों में काफी चर्चा पैदा कर दी है और इसका असर राहुल गांधी की लोकसभा मेंबरशिप (रायबरेली) पर पड़ सकता है। केंद्र सरकार और कांग्रेस की तरफ से अभी तक कोई ऑफिशियल जवाब नहीं आया है। हाई कोर्ट के इस फैसले से दोहरी नागरिकता के आरोपों को नया मोड़ मिल सकता है। लोगों को इस केस पर रेगुलर अपडेट्स चेक करते रहना चाहिए।
राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिकता केस: बड़ा ट्विस्ट! हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार, होम मिनिस्ट्री की फाइल में क्या है? MP की पोस्ट खतरे में?
लखनऊ, 20 मार्च, 2026: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता (भारतीय और ब्रिटिश) के मामले में केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। जस्टिस राजीव सिंह की बेंच ने गृह मंत्रालय को राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े सभी रिकॉर्ड और डॉक्यूमेंट तुरंत जमा करने का आदेश दिया है। इस मामले में गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े बहुत ज़रूरी डॉक्यूमेंट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपे हैं, जिनकी कोर्ट ने जांच शुरू कर दी है।
यह मामला कर्नाटक BJP कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका से शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में रजिस्टर्ड एक कंपनी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स में (2005-2009 के दौरान) खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता अमान्य हो सकती है क्योंकि भारतीय कानून के तहत दोहरी नागरिकता की इजाज़त नहीं है। इससे पहले लखनऊ की स्पेशल MP-MLA कोर्ट ने यह पिटीशन खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की गई थी।
9 मार्च, 2026 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकीलों से पूछा कि राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता की शिकायत पर होम मिनिस्ट्री ने अब तक क्या एक्शन लिया है? इसके बाद कोर्ट ने होम मिनिस्ट्री के सिटीजनशिप विंग और फॉरेन डिपार्टमेंट की पूरी फाइल, ब्रिटिश सरकार के साथ हुए कॉरेस्पोंडेंस समेत सभी डॉक्यूमेंट्स जमा करने का निर्देश दिया। होम मिनिस्ट्री ने इस बारे में 2019 में राहुल गांधी को नोटिस जारी किया था, कोर्ट ने उसके रिकॉर्ड भी देखे।
खास बातें:
राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता का आरोप; कंपनी के डॉक्यूमेंट्स में ब्रिटिश के तौर पर दर्ज।
भारत के संविधान के आर्टिकल 9 और सिटीजनशिप एक्ट के तहत दोहरी नागरिकता गैर-कानूनी है।
होम मिनिस्ट्री ने सीलबंद लिफाफे में स्पेशल डॉक्यूमेंट्स जमा किए; कोर्ट ने अपनी जांच शुरू कर दी।
अगली सुनवाई 19 मार्च, 2026 को है; इसके बाद कोई बड़ा फैसला आने की उम्मीद है।
पिटीशनर ने FIR दर्ज करने और CBI जांच की मांग की है।
इस केस ने पॉलिटिकल गलियारों में काफी चर्चा पैदा कर दी है और इसका असर राहुल गांधी की लोकसभा मेंबरशिप (रायबरेली) पर पड़ सकता है। केंद्र सरकार और कांग्रेस की तरफ से अभी तक कोई ऑफिशियल जवाब नहीं आया है। हाई कोर्ट के इस फैसले से दोहरी नागरिकता के आरोपों को नया मोड़ मिल सकता है। लोगों को इस केस पर रेगुलर अपडेट्स चेक करते रहना चाहिए।
लखनऊ, 20 मार्च, 2026: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता (भारतीय और ब्रिटिश) के मामले में केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। जस्टिस राजीव सिंह की बेंच ने गृह मंत्रालय को राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े सभी रिकॉर्ड और डॉक्यूमेंट तुरंत जमा करने का आदेश दिया है। इस मामले में गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े बहुत ज़रूरी डॉक्यूमेंट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपे हैं, जिनकी कोर्ट ने जांच शुरू कर दी है।
यह मामला कर्नाटक BJP कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका से शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में रजिस्टर्ड एक कंपनी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स में (2005-2009 के दौरान) खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता अमान्य हो सकती है क्योंकि भारतीय कानून के तहत दोहरी नागरिकता की इजाज़त नहीं है। इससे पहले लखनऊ की स्पेशल MP-MLA कोर्ट ने यह पिटीशन खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की गई थी।
9 मार्च, 2026 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकीलों से पूछा कि राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता की शिकायत पर होम मिनिस्ट्री ने अब तक क्या एक्शन लिया है? इसके बाद कोर्ट ने होम मिनिस्ट्री के सिटीजनशिप विंग और फॉरेन डिपार्टमेंट की पूरी फाइल, ब्रिटिश सरकार के साथ हुए कॉरेस्पोंडेंस समेत सभी डॉक्यूमेंट्स जमा करने का निर्देश दिया। होम मिनिस्ट्री ने इस बारे में 2019 में राहुल गांधी को नोटिस जारी किया था, कोर्ट ने उसके रिकॉर्ड भी देखे।
खास बातें:
राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता का आरोप; कंपनी के डॉक्यूमेंट्स में ब्रिटिश के तौर पर दर्ज।
भारत के संविधान के आर्टिकल 9 और सिटीजनशिप एक्ट के तहत दोहरी नागरिकता गैर-कानूनी है।
होम मिनिस्ट्री ने सीलबंद लिफाफे में स्पेशल डॉक्यूमेंट्स जमा किए; कोर्ट ने अपनी जांच शुरू कर दी।
अगली सुनवाई 19 मार्च, 2026 को है; इसके बाद कोई बड़ा फैसला आने की उम्मीद है।
पिटीशनर ने FIR दर्ज करने और CBI जांच की मांग की है।
इस केस ने पॉलिटिकल गलियारों में काफी चर्चा पैदा कर दी है और इसका असर राहुल गांधी की लोकसभा मेंबरशिप (रायबरेली) पर पड़ सकता है। केंद्र सरकार और कांग्रेस की तरफ से अभी तक कोई ऑफिशियल जवाब नहीं आया है। हाई कोर्ट के इस फैसले से दोहरी नागरिकता के आरोपों को नया मोड़ मिल सकता है। लोगों को इस केस पर रेगुलर अपडेट्स चेक करते रहना चाहिए।
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