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“मैं न तो हिंदू विरोधी हूं और न ही मुस्लिम विरोधी”; नॉइज़ पॉल्यूशन के मुद्दे पर विद्यानंद बापट का साफ़ जवाब

पुणे: विद्यानंद बापट से गणेशोत्सव के दौरान DJ, लाउडस्पीकर और तेज़ आवाज़ के खिलाफ़ उनके स्टैंड के बारे में पूछा गया, “क्या आपका स्टैंड हिंदू विरोधी है?” बापट ने साफ़ शब्दों में जवाब दिया, “मैं न तो हिंदू विरोधी हूं और न ही मुस्लिम विरोधी। मैं सिर्फ़ बेवजह और बहुत ज़्यादा नॉइज़ पॉल्यूशन के खिलाफ़ हूं।”
बापट ने कहा कि उनका स्टैंड किसी खास धर्म या समुदाय के खिलाफ़ नहीं है। वह मंदिरों, मस्जिदों, राजनीतिक मीटिंग या किसी भी दूसरे पब्लिक इवेंट में तेज़ आवाज़ के भी उतने ही खिलाफ़ हैं। उन्होंने कहा कि नॉइज़ पॉल्यूशन नागरिकों के शांति के बुनियादी अधिकार का उल्लंघन है। मस्जिदों पर लगे हॉर्न के बारे में पूछे जाने पर बापट ने कहा, “यह एक लॉजिकल गलती है। सिर्फ इसलिए कि एक आदमी ने गाय को मारा, इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरा आदमी बछड़े को मार सकता है। एक गलती दूसरी गलती को सही नहीं ठहराती। मस्जिदों के हॉर्न को लेकर कई पिटीशन फाइल की गई हैं और कोर्ट ने सभी धार्मिक जगहों पर नॉइज़ पॉल्यूशन को लेकर फैसला दिया है। मुस्लिम कम्युनिटी ने खुद ‘मस्जिद अज़ान’ ऐप बनाया है, जो नॉइज़ पॉल्यूशन कम करता है।”
उन्होंने ड्रम और पारंपरिक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स पर भी अपनी बात साफ की। “हालांकि एक परंपरा है, लेकिन मोटरसाइकिल के हॉर्न, साइलेंसर, DJ, लाउडस्पीकर और ड्रम सभी एक ही लेवल के हैं। अगर ये ऐसी प्रैक्टिस हैं जो किसी व्यक्ति के शांति के अधिकार का उल्लंघन करती हैं, तो उन्हें रोका जाना चाहिए। सती और बाल विवाह जैसी कई प्रैक्टिस पहले भी होती थीं, लेकिन उन्हें रोक दिया गया,” बापट ने कहा।
विद्याानंद बापट ने बार-बार कहा है कि उनका संघर्ष सिर्फ नागरिकों की हेल्थ, शांति और पब्लिक ऑर्डर के लिए है। वह धर्म के नाम पर नॉइज़ पॉल्यूशन का विरोध करते हैं, लेकिन किसी भी धर्म या त्योहारों की आज़ादी के खिलाफ नहीं हैं। इस रुख के कारण बापट इस समय चर्चा के केंद्र में हैं। गणेशोत्सव के बैकग्राउंड में उनके इस साफ रुख ने सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू कर दी है।

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