“कर्नाटक सरकार ने सूखा घोषित किया, महाराष्ट्र में डबल इंजन सरकार चुप क्यों है?” नाना पटोले ने राज्य सरकार पर हमला किया
नागपुर: कांग्रेस MLA नाना पटोले ने आज नागपुर में रिपोर्टर्स से बात करते हुए आरोप लगाया कि महायुति सरकार तब भी चुप है, जब राज्य में भयंकर सूखा पड़ा है और किसानों की खड़ी फसलें सड़ गई हैं।
“कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने सूखा घोषित किया और तुरंत फैसले लिए। तो फिर महाराष्ट्र में डबल इंजन सरकार फैसले लेने में फेल क्यों हो रही है? क्या सेंटर में कुछ नहीं हो रहा है? यह सरकार मरे हुए सिर से मक्खन खा रही है,” पटोले ने आलोचना की। सीनियर नेता शरद पवार के सूखे की घोषणा के बारे में लिखे लेटर का ज़िक्र करते हुए पटोले ने कहा, “राज्य में सूखे का सबसे ज़्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। पिछले हफ़्ते हम खुद गवर्नर से मिले थे और हालात बताए थे। इतने बुरे सूखे और फ़सलों के बर्बाद होने के बाद भी सरकार नहीं जाग रही है। अगर कर्नाटक में ऐसा हो सकता है, तो महाराष्ट्र में क्यों नहीं? इसीलिए शरद पवार समेत सभी विपक्षी पार्टियां किसानों के हक़ के लिए आक्रामक हो गई हैं। सत्ताधारी पार्टी हम पर जो भी आरोप लगाती है, उससे हमें कोई लेना-देना नहीं है।”
पटोले ने धान उगाने वाले ज़िलों भंडारा, गोंदिया, गढ़चिरौली और चंद्रपुर के किसानों की समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। “इन चार ज़िलों में पहले बहुत ज़्यादा धान होता था। लेकिन, आज सरकार की बेपरवाही की वजह से वहां के किसानों पर ज़ुल्म हो रहा है। धान ख़रीद सेंटरों पर खुला भ्रष्टाचार है। मैंने विधानसभा में सबूतों के साथ इसके पूरे उदाहरण दिए हैं। इस सरकार की हालत ऐसी हो गई है कि ‘बाड़ ही खेत खा रही है’,” उन्होंने कहा। पटोले ने महायुति में अंदरूनी कलह की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया, “अभी महायुति में अंदरूनी कलह, खींचतान और एक-दूसरे को ताना मारने की होड़ मची हुई है। ठाणे में गणेश नाइक और शिंदे ग्रुप के बीच खुला झगड़ा चल रहा है। राज्य के हर जिले में सत्ताधारी पार्टियों के बीच झगड़े शुरू हो गए हैं। महायुति में इन अंदरूनी झगड़ों की वजह से पूरा महाराष्ट्र बर्बाद हो रहा है।”
नागपुर: कांग्रेस MLA नाना पटोले ने आज नागपुर में रिपोर्टर्स से बात करते हुए आरोप लगाया कि महायुति सरकार तब भी चुप है, जब राज्य में भयंकर सूखा पड़ा है और किसानों की खड़ी फसलें सड़ गई हैं।
“कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने सूखा घोषित किया और तुरंत फैसले लिए। तो फिर महाराष्ट्र में डबल इंजन सरकार फैसले लेने में फेल क्यों हो रही है? क्या सेंटर में कुछ नहीं हो रहा है? यह सरकार मरे हुए सिर से मक्खन खा रही है,” पटोले ने आलोचना की। सीनियर नेता शरद पवार के सूखे की घोषणा के बारे में लिखे लेटर का ज़िक्र करते हुए पटोले ने कहा, “राज्य में सूखे का सबसे ज़्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। पिछले हफ़्ते हम खुद गवर्नर से मिले थे और हालात बताए थे। इतने बुरे सूखे और फ़सलों के बर्बाद होने के बाद भी सरकार नहीं जाग रही है। अगर कर्नाटक में ऐसा हो सकता है, तो महाराष्ट्र में क्यों नहीं? इसीलिए शरद पवार समेत सभी विपक्षी पार्टियां किसानों के हक़ के लिए आक्रामक हो गई हैं। सत्ताधारी पार्टी हम पर जो भी आरोप लगाती है, उससे हमें कोई लेना-देना नहीं है।”
पटोले ने धान उगाने वाले ज़िलों भंडारा, गोंदिया, गढ़चिरौली और चंद्रपुर के किसानों की समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। “इन चार ज़िलों में पहले बहुत ज़्यादा धान होता था। लेकिन, आज सरकार की बेपरवाही की वजह से वहां के किसानों पर ज़ुल्म हो रहा है। धान ख़रीद सेंटरों पर खुला भ्रष्टाचार है। मैंने विधानसभा में सबूतों के साथ इसके पूरे उदाहरण दिए हैं। इस सरकार की हालत ऐसी हो गई है कि ‘बाड़ ही खेत खा रही है’,” उन्होंने कहा। पटोले ने महायुति में अंदरूनी कलह की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया, “अभी महायुति में अंदरूनी कलह, खींचतान और एक-दूसरे को ताना मारने की होड़ मची हुई है। ठाणे में गणेश नाइक और शिंदे ग्रुप के बीच खुला झगड़ा चल रहा है। राज्य के हर जिले में सत्ताधारी पार्टियों के बीच झगड़े शुरू हो गए हैं। महायुति में इन अंदरूनी झगड़ों की वजह से पूरा महाराष्ट्र बर्बाद हो रहा है।”
“कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने सूखा घोषित किया और तुरंत फैसले लिए। तो फिर महाराष्ट्र में डबल इंजन सरकार फैसले लेने में फेल क्यों हो रही है? क्या सेंटर में कुछ नहीं हो रहा है? यह सरकार मरे हुए सिर से मक्खन खा रही है,” पटोले ने आलोचना की। सीनियर नेता शरद पवार के सूखे की घोषणा के बारे में लिखे लेटर का ज़िक्र करते हुए पटोले ने कहा, “राज्य में सूखे का सबसे ज़्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। पिछले हफ़्ते हम खुद गवर्नर से मिले थे और हालात बताए थे। इतने बुरे सूखे और फ़सलों के बर्बाद होने के बाद भी सरकार नहीं जाग रही है। अगर कर्नाटक में ऐसा हो सकता है, तो महाराष्ट्र में क्यों नहीं? इसीलिए शरद पवार समेत सभी विपक्षी पार्टियां किसानों के हक़ के लिए आक्रामक हो गई हैं। सत्ताधारी पार्टी हम पर जो भी आरोप लगाती है, उससे हमें कोई लेना-देना नहीं है।”
पटोले ने धान उगाने वाले ज़िलों भंडारा, गोंदिया, गढ़चिरौली और चंद्रपुर के किसानों की समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। “इन चार ज़िलों में पहले बहुत ज़्यादा धान होता था। लेकिन, आज सरकार की बेपरवाही की वजह से वहां के किसानों पर ज़ुल्म हो रहा है। धान ख़रीद सेंटरों पर खुला भ्रष्टाचार है। मैंने विधानसभा में सबूतों के साथ इसके पूरे उदाहरण दिए हैं। इस सरकार की हालत ऐसी हो गई है कि ‘बाड़ ही खेत खा रही है’,” उन्होंने कहा। पटोले ने महायुति में अंदरूनी कलह की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया, “अभी महायुति में अंदरूनी कलह, खींचतान और एक-दूसरे को ताना मारने की होड़ मची हुई है। ठाणे में गणेश नाइक और शिंदे ग्रुप के बीच खुला झगड़ा चल रहा है। राज्य के हर जिले में सत्ताधारी पार्टियों के बीच झगड़े शुरू हो गए हैं। महायुति में इन अंदरूनी झगड़ों की वजह से पूरा महाराष्ट्र बर्बाद हो रहा है।”
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