मालेगांव में बुखार से परेशान बच्चे; हॉस्पिटल में बेड की कमी के कारण फर्श पर गद्दों पर इलाज
मालेगांव - एक महीने से बारिश न होने के कारण शहर में संक्रामक बीमारियों के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। अकेले जनरल हॉस्पिटल में डेंगू, मलेरिया और कई तरह के बुखार के 135 मरीज निगरानी में इलाज करा रहे हैं।
बच्चों के वार्ड की कैपेसिटी सिर्फ 25 बेड की है, लेकिन अभी 52 बच्चे भर्ती हैं। बेड की कमी के कारण मरीजों का इलाज फर्श पर गद्दे बिछाकर किया जा रहा है। प्राइवेट हॉस्पिटल में भी जांच के लिए मरीजों की लाइनें लगी हैं।
जनरल हॉस्पिटल के आउटपेशेंट जांच रूम में रोजाना मरीजों की संख्या में एवरेज 45 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। बदन दर्द, सिरदर्द, सर्दी, खांसी, पैरों में जलन, बुखार और मुंह का स्वाद न आना जैसे लक्षणों वाले मरीज सबसे ज्यादा हैं। बुधवार (2 तारीख) को आउटपेशेंट वार्ड में करीब 1304 मरीजों ने इलाज कराया। एवरेज से करीब चार सौ मरीज ज्यादा आए। इनमें से सिर्फ बुखार वाले 135 मरीज हॉस्पिटल में भर्ती हुए हैं। खराब खाने या पानी से पीलिया होने वाले पांच छोटे बच्चे भी भर्ती हैं। हालांकि उनकी हालत कंट्रोल में है, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स ने पीने के पानी को लेकर सावधान रहने की अपील की है।
जनरल हॉस्पिटल में दवाओं का काफी स्टॉक है और सभी ब्लड टेस्ट हो चुके हैं। मेडिकल ऑफिसर डॉ. योगेश पाटिल ने कहा कि हालांकि मेडिकल स्टाफ कम है, लेकिन मरीज़ों की देखभाल में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने लोगों को अपनी सेहत का ध्यान रखने, पानी उबालकर और छानकर पीने, सोते समय मच्छर भगाने वाली क्रीम का इस्तेमाल करने और घर में बुज़ुर्गों और बच्चों पर खास ध्यान देने की सलाह दी।
मालेगांव - एक महीने से बारिश न होने के कारण शहर में संक्रामक बीमारियों के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। अकेले जनरल हॉस्पिटल में डेंगू, मलेरिया और कई तरह के बुखार के 135 मरीज निगरानी में इलाज करा रहे हैं।
बच्चों के वार्ड की कैपेसिटी सिर्फ 25 बेड की है, लेकिन अभी 52 बच्चे भर्ती हैं। बेड की कमी के कारण मरीजों का इलाज फर्श पर गद्दे बिछाकर किया जा रहा है। प्राइवेट हॉस्पिटल में भी जांच के लिए मरीजों की लाइनें लगी हैं।
जनरल हॉस्पिटल के आउटपेशेंट जांच रूम में रोजाना मरीजों की संख्या में एवरेज 45 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। बदन दर्द, सिरदर्द, सर्दी, खांसी, पैरों में जलन, बुखार और मुंह का स्वाद न आना जैसे लक्षणों वाले मरीज सबसे ज्यादा हैं। बुधवार (2 तारीख) को आउटपेशेंट वार्ड में करीब 1304 मरीजों ने इलाज कराया। एवरेज से करीब चार सौ मरीज ज्यादा आए। इनमें से सिर्फ बुखार वाले 135 मरीज हॉस्पिटल में भर्ती हुए हैं। खराब खाने या पानी से पीलिया होने वाले पांच छोटे बच्चे भी भर्ती हैं। हालांकि उनकी हालत कंट्रोल में है, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स ने पीने के पानी को लेकर सावधान रहने की अपील की है।
जनरल हॉस्पिटल में दवाओं का काफी स्टॉक है और सभी ब्लड टेस्ट हो चुके हैं। मेडिकल ऑफिसर डॉ. योगेश पाटिल ने कहा कि हालांकि मेडिकल स्टाफ कम है, लेकिन मरीज़ों की देखभाल में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने लोगों को अपनी सेहत का ध्यान रखने, पानी उबालकर और छानकर पीने, सोते समय मच्छर भगाने वाली क्रीम का इस्तेमाल करने और घर में बुज़ुर्गों और बच्चों पर खास ध्यान देने की सलाह दी।
बच्चों के वार्ड की कैपेसिटी सिर्फ 25 बेड की है, लेकिन अभी 52 बच्चे भर्ती हैं। बेड की कमी के कारण मरीजों का इलाज फर्श पर गद्दे बिछाकर किया जा रहा है। प्राइवेट हॉस्पिटल में भी जांच के लिए मरीजों की लाइनें लगी हैं।
जनरल हॉस्पिटल के आउटपेशेंट जांच रूम में रोजाना मरीजों की संख्या में एवरेज 45 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। बदन दर्द, सिरदर्द, सर्दी, खांसी, पैरों में जलन, बुखार और मुंह का स्वाद न आना जैसे लक्षणों वाले मरीज सबसे ज्यादा हैं। बुधवार (2 तारीख) को आउटपेशेंट वार्ड में करीब 1304 मरीजों ने इलाज कराया। एवरेज से करीब चार सौ मरीज ज्यादा आए। इनमें से सिर्फ बुखार वाले 135 मरीज हॉस्पिटल में भर्ती हुए हैं। खराब खाने या पानी से पीलिया होने वाले पांच छोटे बच्चे भी भर्ती हैं। हालांकि उनकी हालत कंट्रोल में है, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स ने पीने के पानी को लेकर सावधान रहने की अपील की है।
जनरल हॉस्पिटल में दवाओं का काफी स्टॉक है और सभी ब्लड टेस्ट हो चुके हैं। मेडिकल ऑफिसर डॉ. योगेश पाटिल ने कहा कि हालांकि मेडिकल स्टाफ कम है, लेकिन मरीज़ों की देखभाल में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने लोगों को अपनी सेहत का ध्यान रखने, पानी उबालकर और छानकर पीने, सोते समय मच्छर भगाने वाली क्रीम का इस्तेमाल करने और घर में बुज़ुर्गों और बच्चों पर खास ध्यान देने की सलाह दी।
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