‘एसिलॉक’ नाम पर कन्फ्यूजन; FDA ने कैडिला कंपनी के 2.45 करोड़ रुपये के दवा स्टॉक पर कार्रवाई
‘एसिलॉक’ नाम पर कन्फ्यूजन; FDA ने कैडिला कंपनी के 2.45 करोड़ रुपये के दवा स्टॉक पर कार्रवाई की
FDA: ‘एसिलॉक’ नाम पर कन्फ्यूजन; तुकाराम मुंढे डिपार्टमेंट ने 2.45 करोड़ रुपये के दवा स्टॉक पर बड़ी कार्रवाई की
नागपुर: स्टेट फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने दवाओं की सेफ्टी के लिए अहम कार्रवाई की है। कैडिला फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के करीब 2.45 करोड़ रुपये के दवा स्टॉक ‘एसिलॉक 150+’ और ‘एसिलॉक 300+’ पर प्रिवेंटिव कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई दवा के नाम में सिर्फ ‘प्लस’ का निशान जोड़कर एक्टिव इंग्रीडिएंट में पूरी तरह बदलाव करने से डॉक्टरों, दवा बेचने वालों और मरीजों के बीच कन्फ्यूजन की संभावना को ध्यान में रखते हुए की गई।
क्या है मामला?
कंपनी ने पहले ‘एसिलॉक 150’ और ‘एसिलॉक 300’ दवाओं को मंजूरी दी थी, जिनमें एक्टिव इंग्रीडिएंट के तौर पर रैनिटिडीन था। हालांकि, नए ‘प्लस’ वर्जन में एक अलग इंग्रीडिएंट, फैमोटिडीन का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन, ब्रांड का नाम और लेबल का डिज़ाइन लगभग एक जैसा ही रखा गया था। इससे गलत दवा देने की संभावना बन गई थी क्योंकि बाज़ार में पुराने और नए दोनों वर्शन एक साथ उपलब्ध थे।
FDA ने साफ़ किया कि अगर दवा का ओरिजिनल एक्टिव इंग्रीडिएंट बदल दिया गया है तो उसी ब्रांड का नाम इस्तेमाल करना नियमों के ख़िलाफ़ है।
राज्य भर में कार्रवाई
9 और 10 जुलाई को कंपनी के बड़े डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर पर छापे मारे गए। इनमें शामिल हैं:
नागपुर: Rs 98.71 लाख
पुणे: Rs 89.45 लाख
भिवंडी (ठाणे): Rs 57.20 लाख
कुल Rs 2.45 करोड़ से ज़्यादा के स्टॉक को बेचने पर रोक लगा दी गई है।
कंपनी को आदेश
FDA ने कैडिला कंपनी को बाज़ार में मौजूद सभी स्टॉक को तुरंत वापस लेने का निर्देश दिया है। मामले की आगे की जांच चल रही है और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तुकाराम मुंढे की राय
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने कहा, "किसी दवा के नाम की वजह से मरीज़ों, डॉक्टरों या बेचने वालों में कन्फ्यूजन पैदा करना पब्लिक हेल्थ के लिए एक गंभीर मामला है। ब्रांड नेम, लेबलिंग और मार्केटिंग में नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।"
दवा की सेफ्टी पक्का करने के लिए इस कार्रवाई को ज़रूरी माना जा रहा है।
‘एसिलॉक’ नाम पर कन्फ्यूजन; FDA ने कैडिला कंपनी के 2.45 करोड़ रुपये के दवा स्टॉक पर कार्रवाई की
FDA: ‘एसिलॉक’ नाम पर कन्फ्यूजन; तुकाराम मुंढे डिपार्टमेंट ने 2.45 करोड़ रुपये के दवा स्टॉक पर बड़ी कार्रवाई की
नागपुर: स्टेट फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने दवाओं की सेफ्टी के लिए अहम कार्रवाई की है। कैडिला फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के करीब 2.45 करोड़ रुपये के दवा स्टॉक ‘एसिलॉक 150+’ और ‘एसिलॉक 300+’ पर प्रिवेंटिव कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई दवा के नाम में सिर्फ ‘प्लस’ का निशान जोड़कर एक्टिव इंग्रीडिएंट में पूरी तरह बदलाव करने से डॉक्टरों, दवा बेचने वालों और मरीजों के बीच कन्फ्यूजन की संभावना को ध्यान में रखते हुए की गई।
क्या है मामला?
कंपनी ने पहले ‘एसिलॉक 150’ और ‘एसिलॉक 300’ दवाओं को मंजूरी दी थी, जिनमें एक्टिव इंग्रीडिएंट के तौर पर रैनिटिडीन था। हालांकि, नए ‘प्लस’ वर्जन में एक अलग इंग्रीडिएंट, फैमोटिडीन का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन, ब्रांड का नाम और लेबल का डिज़ाइन लगभग एक जैसा ही रखा गया था। इससे गलत दवा देने की संभावना बन गई थी क्योंकि बाज़ार में पुराने और नए दोनों वर्शन एक साथ उपलब्ध थे।
FDA ने साफ़ किया कि अगर दवा का ओरिजिनल एक्टिव इंग्रीडिएंट बदल दिया गया है तो उसी ब्रांड का नाम इस्तेमाल करना नियमों के ख़िलाफ़ है।
राज्य भर में कार्रवाई
9 और 10 जुलाई को कंपनी के बड़े डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर पर छापे मारे गए। इनमें शामिल हैं:
नागपुर: Rs 98.71 लाख
पुणे: Rs 89.45 लाख
भिवंडी (ठाणे): Rs 57.20 लाख
कुल Rs 2.45 करोड़ से ज़्यादा के स्टॉक को बेचने पर रोक लगा दी गई है।
कंपनी को आदेश
FDA ने कैडिला कंपनी को बाज़ार में मौजूद सभी स्टॉक को तुरंत वापस लेने का निर्देश दिया है। मामले की आगे की जांच चल रही है और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तुकाराम मुंढे की राय
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने कहा, "किसी दवा के नाम की वजह से मरीज़ों, डॉक्टरों या बेचने वालों में कन्फ्यूजन पैदा करना पब्लिक हेल्थ के लिए एक गंभीर मामला है। ब्रांड नेम, लेबलिंग और मार्केटिंग में नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।"
दवा की सेफ्टी पक्का करने के लिए इस कार्रवाई को ज़रूरी माना जा रहा है।
FDA: ‘एसिलॉक’ नाम पर कन्फ्यूजन; तुकाराम मुंढे डिपार्टमेंट ने 2.45 करोड़ रुपये के दवा स्टॉक पर बड़ी कार्रवाई की
नागपुर: स्टेट फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने दवाओं की सेफ्टी के लिए अहम कार्रवाई की है। कैडिला फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के करीब 2.45 करोड़ रुपये के दवा स्टॉक ‘एसिलॉक 150+’ और ‘एसिलॉक 300+’ पर प्रिवेंटिव कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई दवा के नाम में सिर्फ ‘प्लस’ का निशान जोड़कर एक्टिव इंग्रीडिएंट में पूरी तरह बदलाव करने से डॉक्टरों, दवा बेचने वालों और मरीजों के बीच कन्फ्यूजन की संभावना को ध्यान में रखते हुए की गई।
क्या है मामला?
कंपनी ने पहले ‘एसिलॉक 150’ और ‘एसिलॉक 300’ दवाओं को मंजूरी दी थी, जिनमें एक्टिव इंग्रीडिएंट के तौर पर रैनिटिडीन था। हालांकि, नए ‘प्लस’ वर्जन में एक अलग इंग्रीडिएंट, फैमोटिडीन का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन, ब्रांड का नाम और लेबल का डिज़ाइन लगभग एक जैसा ही रखा गया था। इससे गलत दवा देने की संभावना बन गई थी क्योंकि बाज़ार में पुराने और नए दोनों वर्शन एक साथ उपलब्ध थे।
FDA ने साफ़ किया कि अगर दवा का ओरिजिनल एक्टिव इंग्रीडिएंट बदल दिया गया है तो उसी ब्रांड का नाम इस्तेमाल करना नियमों के ख़िलाफ़ है।
राज्य भर में कार्रवाई
9 और 10 जुलाई को कंपनी के बड़े डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर पर छापे मारे गए। इनमें शामिल हैं:
नागपुर: Rs 98.71 लाख
पुणे: Rs 89.45 लाख
भिवंडी (ठाणे): Rs 57.20 लाख
कुल Rs 2.45 करोड़ से ज़्यादा के स्टॉक को बेचने पर रोक लगा दी गई है।
कंपनी को आदेश
FDA ने कैडिला कंपनी को बाज़ार में मौजूद सभी स्टॉक को तुरंत वापस लेने का निर्देश दिया है। मामले की आगे की जांच चल रही है और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तुकाराम मुंढे की राय
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने कहा, "किसी दवा के नाम की वजह से मरीज़ों, डॉक्टरों या बेचने वालों में कन्फ्यूजन पैदा करना पब्लिक हेल्थ के लिए एक गंभीर मामला है। ब्रांड नेम, लेबलिंग और मार्केटिंग में नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।"
दवा की सेफ्टी पक्का करने के लिए इस कार्रवाई को ज़रूरी माना जा रहा है।
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