मोशी कचरा डिपो हादसा: 80 घंटे की कोशिश के बाद 8 लाशें मिलीं, परिवार टूट गए; एक की तलाश जारी
पुणे: पिंपरी-चिंचवड़ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के मोशी में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर में बुधवार (8 जुलाई, 2026) दोपहर करीब 1:30 बजे एक भयानक हादसा हुआ। हजारों टन कचरे का एक बड़ा ढेर अचानक ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्रोजेक्ट की एडमिनिस्ट्रेटिव दो मंजिला बिल्डिंग पर गिर गया, जिससे पूरी बिल्डिंग पल भर में ढह गई। शुरू में बताया गया कि हादसे में 23 कर्मचारी फंसे हुए थे।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पांच लोग खुद ही बाहर निकलने में कामयाब रहे, जबकि एक महिला समेत छह लोगों को रेस्क्यू टीमों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाकी 9 लोगों के लिए एडमिनिस्ट्रेशन ने लगातार तीन दिनों तक बहुत कोशिश की। आखिरकार 80 घंटे बाद 8 लोगों की लाशें बरामद हुई हैं। एडमिनिस्ट्रेशन ने बताया है कि एक व्यक्ति की तलाश अभी भी जारी है।
मोशी के इस कचरा डिपो में फंसे मजदूरों के परिवारों की हालत दिल दहला देने वाली थी। उनके रिश्तेदार मलबे पर आंखें मूंदे बैठे अपने दिन बिता रहे थे। जिन परिवारों को उम्मीद थी कि ‘घर का आदमी सुरक्षित बाहर आ जाएगा’, उन पर अब दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
इस हादसे ने नगर निगम की लापरवाही और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑफिस और कूड़े के ढेर के बीच सुरक्षित दूरी कितनी थी?
क्या कोई सुरक्षा दीवार थी?
क्या ऑफिस की बिल्डिंग किसी सुरक्षित जगह पर बनाई जा सकती थी?
फंसे हुए मज़दूरों की संख्या (16, 20, 23) के बारे में प्रशासन की लगातार बदलती जानकारी ने शक पैदा कर दिया है।
यह हादसा पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और सुरक्षा सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उम्मीद है कि मरने वालों के परिवारों को तुरंत मदद दी जाएगी और लापता व्यक्ति की तलाश जल्द से जल्द पूरी की जाएगी।
पुणे: पिंपरी-चिंचवड़ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के मोशी में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर में बुधवार (8 जुलाई, 2026) दोपहर करीब 1:30 बजे एक भयानक हादसा हुआ। हजारों टन कचरे का एक बड़ा ढेर अचानक ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्रोजेक्ट की एडमिनिस्ट्रेटिव दो मंजिला बिल्डिंग पर गिर गया, जिससे पूरी बिल्डिंग पल भर में ढह गई। शुरू में बताया गया कि हादसे में 23 कर्मचारी फंसे हुए थे।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पांच लोग खुद ही बाहर निकलने में कामयाब रहे, जबकि एक महिला समेत छह लोगों को रेस्क्यू टीमों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाकी 9 लोगों के लिए एडमिनिस्ट्रेशन ने लगातार तीन दिनों तक बहुत कोशिश की। आखिरकार 80 घंटे बाद 8 लोगों की लाशें बरामद हुई हैं। एडमिनिस्ट्रेशन ने बताया है कि एक व्यक्ति की तलाश अभी भी जारी है।
मोशी के इस कचरा डिपो में फंसे मजदूरों के परिवारों की हालत दिल दहला देने वाली थी। उनके रिश्तेदार मलबे पर आंखें मूंदे बैठे अपने दिन बिता रहे थे। जिन परिवारों को उम्मीद थी कि ‘घर का आदमी सुरक्षित बाहर आ जाएगा’, उन पर अब दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
इस हादसे ने नगर निगम की लापरवाही और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑफिस और कूड़े के ढेर के बीच सुरक्षित दूरी कितनी थी?
क्या कोई सुरक्षा दीवार थी?
क्या ऑफिस की बिल्डिंग किसी सुरक्षित जगह पर बनाई जा सकती थी?
फंसे हुए मज़दूरों की संख्या (16, 20, 23) के बारे में प्रशासन की लगातार बदलती जानकारी ने शक पैदा कर दिया है।
यह हादसा पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और सुरक्षा सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उम्मीद है कि मरने वालों के परिवारों को तुरंत मदद दी जाएगी और लापता व्यक्ति की तलाश जल्द से जल्द पूरी की जाएगी।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पांच लोग खुद ही बाहर निकलने में कामयाब रहे, जबकि एक महिला समेत छह लोगों को रेस्क्यू टीमों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाकी 9 लोगों के लिए एडमिनिस्ट्रेशन ने लगातार तीन दिनों तक बहुत कोशिश की। आखिरकार 80 घंटे बाद 8 लोगों की लाशें बरामद हुई हैं। एडमिनिस्ट्रेशन ने बताया है कि एक व्यक्ति की तलाश अभी भी जारी है।
मोशी के इस कचरा डिपो में फंसे मजदूरों के परिवारों की हालत दिल दहला देने वाली थी। उनके रिश्तेदार मलबे पर आंखें मूंदे बैठे अपने दिन बिता रहे थे। जिन परिवारों को उम्मीद थी कि ‘घर का आदमी सुरक्षित बाहर आ जाएगा’, उन पर अब दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
इस हादसे ने नगर निगम की लापरवाही और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑफिस और कूड़े के ढेर के बीच सुरक्षित दूरी कितनी थी?
क्या कोई सुरक्षा दीवार थी?
क्या ऑफिस की बिल्डिंग किसी सुरक्षित जगह पर बनाई जा सकती थी?
फंसे हुए मज़दूरों की संख्या (16, 20, 23) के बारे में प्रशासन की लगातार बदलती जानकारी ने शक पैदा कर दिया है।
यह हादसा पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और सुरक्षा सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उम्मीद है कि मरने वालों के परिवारों को तुरंत मदद दी जाएगी और लापता व्यक्ति की तलाश जल्द से जल्द पूरी की जाएगी।
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