NDA वोटर्स भी E20 पेट्रोल का विरोध कर रहे हैं! C-Voter सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए
NDA वोटर्स भी E20 पेट्रोल का विरोध कर रहे हैं! C-Voter सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए
सरकार की E20 पॉलिसी पर लोगों का कम रिस्पॉन्स; NDA सपोर्टर्स में भी 53% लोग नाखुश
नई दिल्ली, 13 जुलाई, 2026: केंद्र सरकार ने पूरे देश में 20% इथेनॉल मिले E20 पेट्रोल को प्रमोट किया है। सरकार का दावा है कि इससे क्रूड ऑयल का इंपोर्ट कम होगा, पॉल्यूशन कम होगा और गन्ना किसानों को फायदा होगा। हालांकि, C-Voter के हाल ही में किए गए एक सर्वे से बड़ा झटका लगा है। बड़ी संख्या में लोग E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने को तैयार नहीं हैं।
खास बातें (C-Voter सर्वे के आंकड़े):
कुल आबादी में: 55.1% लोगों ने कहा कि वे E20 पेट्रोल इस्तेमाल नहीं करना चाहते। सिर्फ 17.1% ने इसका सपोर्ट किया।
NDA सपोर्टर्स में: 52.5% (लगभग 53%) लोग E20 इस्तेमाल करने को तैयार नहीं हैं। सिर्फ 18.1% ने इसका सपोर्ट किया।
विपक्षी सपोर्टर्स: 57.9% ने इसका विरोध किया।
लोगों की मुख्य चिंताएँ:
कार का माइलेज कम हो जाएगा (52.8% लोग)।
इंजन खराब हो जाएगा (54.2% लोग)।
पुरानी गाड़ियों के मालिकों के साथ गलत व्यवहार होगा (56.3% लोग)।
इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी पर प्रतिक्रिया
52% लोग सरकार की पॉलिसी का विरोध करते हैं।
48.2% NDA समर्थक भी विरोध करते हैं।
लोग क्या मांग कर रहे हैं?
75.9% लोगों का कहना है कि बाज़ार में E20 और नॉर्मल पेट्रोल दोनों मिलने चाहिए। ग्राहक खुद चुन सकते हैं।
अगर E20 सस्ता भी होता है, तो भी सिर्फ़ 40.8% लोग ही इसका इस्तेमाल करेंगे, बाकी नहीं करेंगे।
यह सर्वे 8 और 9 जुलाई को CATI मेथड का इस्तेमाल करके 1,641 लोगों पर किया गया था। गलती का मार्जिन ±3% है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने E20 के विरोधियों को चुनौती दी थी, लेकिन सर्वे और कुछ YouTubers/vloggers के अनुभवों ने चर्चा को और तेज़ कर दिया है।
निष्कर्ष: सरकार की पर्यावरण और एनर्जी सुरक्षा नीतियों को अभी तक लोगों का भरोसा नहीं मिला है। E20 पेट्रोल को ज़रूरी बनाने के बजाय इसके दूसरे विकल्पों की मांग बढ़ रही है।
NDA वोटर्स भी E20 पेट्रोल का विरोध कर रहे हैं! C-Voter सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए
सरकार की E20 पॉलिसी पर लोगों का कम रिस्पॉन्स; NDA सपोर्टर्स में भी 53% लोग नाखुश
नई दिल्ली, 13 जुलाई, 2026: केंद्र सरकार ने पूरे देश में 20% इथेनॉल मिले E20 पेट्रोल को प्रमोट किया है। सरकार का दावा है कि इससे क्रूड ऑयल का इंपोर्ट कम होगा, पॉल्यूशन कम होगा और गन्ना किसानों को फायदा होगा। हालांकि, C-Voter के हाल ही में किए गए एक सर्वे से बड़ा झटका लगा है। बड़ी संख्या में लोग E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने को तैयार नहीं हैं।
खास बातें (C-Voter सर्वे के आंकड़े):
कुल आबादी में: 55.1% लोगों ने कहा कि वे E20 पेट्रोल इस्तेमाल नहीं करना चाहते। सिर्फ 17.1% ने इसका सपोर्ट किया।
NDA सपोर्टर्स में: 52.5% (लगभग 53%) लोग E20 इस्तेमाल करने को तैयार नहीं हैं। सिर्फ 18.1% ने इसका सपोर्ट किया।
विपक्षी सपोर्टर्स: 57.9% ने इसका विरोध किया।
लोगों की मुख्य चिंताएँ:
कार का माइलेज कम हो जाएगा (52.8% लोग)।
इंजन खराब हो जाएगा (54.2% लोग)।
पुरानी गाड़ियों के मालिकों के साथ गलत व्यवहार होगा (56.3% लोग)।
इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी पर प्रतिक्रिया
52% लोग सरकार की पॉलिसी का विरोध करते हैं।
48.2% NDA समर्थक भी विरोध करते हैं।
लोग क्या मांग कर रहे हैं?
75.9% लोगों का कहना है कि बाज़ार में E20 और नॉर्मल पेट्रोल दोनों मिलने चाहिए। ग्राहक खुद चुन सकते हैं।
अगर E20 सस्ता भी होता है, तो भी सिर्फ़ 40.8% लोग ही इसका इस्तेमाल करेंगे, बाकी नहीं करेंगे।
यह सर्वे 8 और 9 जुलाई को CATI मेथड का इस्तेमाल करके 1,641 लोगों पर किया गया था। गलती का मार्जिन ±3% है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने E20 के विरोधियों को चुनौती दी थी, लेकिन सर्वे और कुछ YouTubers/vloggers के अनुभवों ने चर्चा को और तेज़ कर दिया है।
निष्कर्ष: सरकार की पर्यावरण और एनर्जी सुरक्षा नीतियों को अभी तक लोगों का भरोसा नहीं मिला है। E20 पेट्रोल को ज़रूरी बनाने के बजाय इसके दूसरे विकल्पों की मांग बढ़ रही है।
सरकार की E20 पॉलिसी पर लोगों का कम रिस्पॉन्स; NDA सपोर्टर्स में भी 53% लोग नाखुश
नई दिल्ली, 13 जुलाई, 2026: केंद्र सरकार ने पूरे देश में 20% इथेनॉल मिले E20 पेट्रोल को प्रमोट किया है। सरकार का दावा है कि इससे क्रूड ऑयल का इंपोर्ट कम होगा, पॉल्यूशन कम होगा और गन्ना किसानों को फायदा होगा। हालांकि, C-Voter के हाल ही में किए गए एक सर्वे से बड़ा झटका लगा है। बड़ी संख्या में लोग E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने को तैयार नहीं हैं।
खास बातें (C-Voter सर्वे के आंकड़े):
कुल आबादी में: 55.1% लोगों ने कहा कि वे E20 पेट्रोल इस्तेमाल नहीं करना चाहते। सिर्फ 17.1% ने इसका सपोर्ट किया।
NDA सपोर्टर्स में: 52.5% (लगभग 53%) लोग E20 इस्तेमाल करने को तैयार नहीं हैं। सिर्फ 18.1% ने इसका सपोर्ट किया।
विपक्षी सपोर्टर्स: 57.9% ने इसका विरोध किया।
लोगों की मुख्य चिंताएँ:
कार का माइलेज कम हो जाएगा (52.8% लोग)।
इंजन खराब हो जाएगा (54.2% लोग)।
पुरानी गाड़ियों के मालिकों के साथ गलत व्यवहार होगा (56.3% लोग)।
इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी पर प्रतिक्रिया
52% लोग सरकार की पॉलिसी का विरोध करते हैं।
48.2% NDA समर्थक भी विरोध करते हैं।
लोग क्या मांग कर रहे हैं?
75.9% लोगों का कहना है कि बाज़ार में E20 और नॉर्मल पेट्रोल दोनों मिलने चाहिए। ग्राहक खुद चुन सकते हैं।
अगर E20 सस्ता भी होता है, तो भी सिर्फ़ 40.8% लोग ही इसका इस्तेमाल करेंगे, बाकी नहीं करेंगे।
यह सर्वे 8 और 9 जुलाई को CATI मेथड का इस्तेमाल करके 1,641 लोगों पर किया गया था। गलती का मार्जिन ±3% है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने E20 के विरोधियों को चुनौती दी थी, लेकिन सर्वे और कुछ YouTubers/vloggers के अनुभवों ने चर्चा को और तेज़ कर दिया है।
निष्कर्ष: सरकार की पर्यावरण और एनर्जी सुरक्षा नीतियों को अभी तक लोगों का भरोसा नहीं मिला है। E20 पेट्रोल को ज़रूरी बनाने के बजाय इसके दूसरे विकल्पों की मांग बढ़ रही है।
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