2020 दिल्ली दंगे IB ऑफिसर अंकित शर्मा मर्डर केस: ताहिर हुसैन मर्डर, किडनैपिंग और दंगे भड़काने के आरोप में दोषी करार
नई दिल्ली: दिल्ली की एक कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई, 2026) को आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य को 2020 के नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराया।
एडिशनल सेशंस जज प्रवीण सिंह ने कड़कड़डूमा कोर्ट में यह फैसला सुनाया। ताहिर हुसैन को इंडियन पीनल कोड की धारा 188, 153A, 147, 148, 149, 365 और 302 के तहत दोषी ठहराया गया। हालांकि, उसे धारा 120B (साजिश) और 129 के तहत बरी कर दिया गया।
कोर्ट ने अंकित शर्मा की हत्या में चार अन्य आरोपियों - जावेद, अनस, नजीम और कासिम - को भी दोषी ठहराया। बाकी छह आरोपियों को बरी कर दिया गया। केस का बैकग्राउंड:
यह घटना 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ी है। अंकित शर्मा अपने घर से किराने का सामान और घर का दूसरा सामान खरीदने निकला था, लेकिन वापस नहीं आया। उसकी बॉडी चांद बाग पुलिया के पास एक नाले में मिली थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उसके शरीर पर 51 चोटें थीं, जिसमें धारदार हथियार और डंडे का इस्तेमाल भी शामिल था।
अंकित के पिता की शिकायत के मुताबिक, ताहिर हुसैन और उसके साथियों पर उसकी हत्या का शक था। केस FIR 65/2020 (दयालपुर पुलिस स्टेशन) के तहत दर्ज किया गया था।
मार्च 2023 में कोर्ट ने ताहिर हुसैन और दूसरे आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किए थे। ज़्यादातर आरोपियों को बेल मिल गई थी, लेकिन ताहिर हुसैन की बेल अर्जी हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी।
नोट: अगली सुनवाई में सज़ा का ऐलान होना है। यह फैसला 2020 के दिल्ली दंगों के अहम केस में से एक है।
नई दिल्ली: दिल्ली की एक कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई, 2026) को आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य को 2020 के नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराया।
एडिशनल सेशंस जज प्रवीण सिंह ने कड़कड़डूमा कोर्ट में यह फैसला सुनाया। ताहिर हुसैन को इंडियन पीनल कोड की धारा 188, 153A, 147, 148, 149, 365 और 302 के तहत दोषी ठहराया गया। हालांकि, उसे धारा 120B (साजिश) और 129 के तहत बरी कर दिया गया।
कोर्ट ने अंकित शर्मा की हत्या में चार अन्य आरोपियों - जावेद, अनस, नजीम और कासिम - को भी दोषी ठहराया। बाकी छह आरोपियों को बरी कर दिया गया। केस का बैकग्राउंड:
यह घटना 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ी है। अंकित शर्मा अपने घर से किराने का सामान और घर का दूसरा सामान खरीदने निकला था, लेकिन वापस नहीं आया। उसकी बॉडी चांद बाग पुलिया के पास एक नाले में मिली थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उसके शरीर पर 51 चोटें थीं, जिसमें धारदार हथियार और डंडे का इस्तेमाल भी शामिल था।
अंकित के पिता की शिकायत के मुताबिक, ताहिर हुसैन और उसके साथियों पर उसकी हत्या का शक था। केस FIR 65/2020 (दयालपुर पुलिस स्टेशन) के तहत दर्ज किया गया था।
मार्च 2023 में कोर्ट ने ताहिर हुसैन और दूसरे आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किए थे। ज़्यादातर आरोपियों को बेल मिल गई थी, लेकिन ताहिर हुसैन की बेल अर्जी हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी।
नोट: अगली सुनवाई में सज़ा का ऐलान होना है। यह फैसला 2020 के दिल्ली दंगों के अहम केस में से एक है।
नई दिल्ली: दिल्ली की एक कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई, 2026) को आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य को 2020 के नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराया।
एडिशनल सेशंस जज प्रवीण सिंह ने कड़कड़डूमा कोर्ट में यह फैसला सुनाया। ताहिर हुसैन को इंडियन पीनल कोड की धारा 188, 153A, 147, 148, 149, 365 और 302 के तहत दोषी ठहराया गया। हालांकि, उसे धारा 120B (साजिश) और 129 के तहत बरी कर दिया गया।
कोर्ट ने अंकित शर्मा की हत्या में चार अन्य आरोपियों - जावेद, अनस, नजीम और कासिम - को भी दोषी ठहराया। बाकी छह आरोपियों को बरी कर दिया गया। केस का बैकग्राउंड:
यह घटना 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ी है। अंकित शर्मा अपने घर से किराने का सामान और घर का दूसरा सामान खरीदने निकला था, लेकिन वापस नहीं आया। उसकी बॉडी चांद बाग पुलिया के पास एक नाले में मिली थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उसके शरीर पर 51 चोटें थीं, जिसमें धारदार हथियार और डंडे का इस्तेमाल भी शामिल था।
अंकित के पिता की शिकायत के मुताबिक, ताहिर हुसैन और उसके साथियों पर उसकी हत्या का शक था। केस FIR 65/2020 (दयालपुर पुलिस स्टेशन) के तहत दर्ज किया गया था।
मार्च 2023 में कोर्ट ने ताहिर हुसैन और दूसरे आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किए थे। ज़्यादातर आरोपियों को बेल मिल गई थी, लेकिन ताहिर हुसैन की बेल अर्जी हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी।
नोट: अगली सुनवाई में सज़ा का ऐलान होना है। यह फैसला 2020 के दिल्ली दंगों के अहम केस में से एक है।
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